भारत एक ऐसा देश है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसके कोस-कोस पर पानी बदलता है और हर 5 कोस पर बोली। भारत इतनी तरह की संस्कृतियों का मिश्रण है कि इसके अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग एक-दूसरे की संस्कृति से ही अनजान है।
कुछ ऐसा ही हाल तब हुआ जब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने अपने X पेज (पूर्व का ट्विटर) पर असम के कार्बी आदिवासियों का एक वीडियो शेयर किया जिन्होंने अपने नाम पर विश्व रिकॉर्ड दर्ज करवाया है। आइए आपको इस अनोखे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण विश्व रिकॉर्ड के बारे में सारी जानकारियां देते हैं।
असम के कार्बी समुदाय के 700 से अधिक आदिवासियों ने बांस पर चलने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है, जिसका वीडियो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने शेयर किया है। इन आदिवासियों ने 10 मिनट तक बांस पर चलकर यह उपलब्धि हासिल की है। मिली जानकारी के अनुसार असम में बांस पर चलने की इस कलाकारी को स्थानीय भाषा कांग-डॉन्ग-डैंग कहा जाता है। इन आदिवासियों ने एक सीधी लाइन बनाकर बांस पर चलते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
इस लाइन में लगभग 721 आदिवासी पुरुष शामिल थे। यह विश्व रिकॉर्ड सबसे अधिक लंबी लाइन बनाकर यूं बांस पर चलने का बनाया गया है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबित कार्बी आदिवासियों ने बांस पर चलते हुए लगभग 2 किमी लंबी लाइन बना डाली थी। इन्होंने 10 मिनट तक बांस की पतली लाठियों पर बैलेंस बनाकर चलते हुए यह रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान इन सबके पैर जमीन से काफी ऊपर इन बांस की पतली-पतली लाठियों पर ही था और सभी सिर्फ बांस को जमीन पर टिकाकर आगे बढ़ रहे थे।
बता दें, बांस पर चलने की यह कला आदिवासियों में सदियों पुरानी है। यह कला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सिखायी और इसी तरह से यह स्थानांतरित होती रहती है। यह विश्व रिकॉर्ड असम में हाल ही में आयोजित हुए 50वें कार्बी यूथ फेस्टिवल के दौरान बनाया गया। असम के इन आदिवासियों की इस शानदार उपलब्धि पर नेटिजेन भी वाहवाही कर रहे हैं।
कई लोगों ने कमेंट सेक्शन में लिखा है कि आदिवासी समुदाय के ये लोग अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए भारत को गौरवांवित कर रहे हैं। इससे पहले का रिकॉर्ड सिर्फ 250 लोगों के बांस पर इस तरह से चलने का था, जिसे कार्बी आदिवासी समुदाय के लोगों ने निश्चित रूप से काफी पीछे छोड़ दिया है।



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