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असम के 11000 बिहू डांसर्स के साथ 2548 धुलिया ने बनाया ढ़ोल बजाने का विश्व रिकॉर्ड

असम के लोकनृत्य बिहू और पारंपरिक संगीत ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। यह लोकनृत्य मुख्य रूप से नववर्ष के मौके पर मनाएं जाने वाले रोंगाली पर्व के अवसर किया जाता है। गुवाहाटी के सरूसजाई स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में दोनों रिकॉर्ड बने।

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11,000 बिहू डांसर्स और 2548 धुलिया ने बजाया ढ़ोल

नववर्ष बोहाग बिहू के मौके पर गुवाहाटी के सरूसजाई स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बिहू डांसर्स और धुलिया ने ढ़ोल बजाने में दो अलग-अलग कीर्तिमान स्थापित किया है। 13 अप्रैल 2023 को आयोजित इस कार्यक्रम में 11,304 बिहू डांसर्स के साथ-साथ 2548 धुलिया ने ढ़ोल परफॉर्म किया।

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इस बात की जानकारी असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर दी। उन्होंने इसे ग्रेट टीम वर्क करार दिया। इस मौके पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लंदन मुख्यालय से भी जज सरूसजाई स्टेडियम में उपस्थित रहें। हेमंत बिस्वा सरमा ने इस मेगाबिहू के रिहर्सल की तस्वीरें भी ट्वीटर पर शेयर की थी।

बनाये गये ये दोनों वर्ल्ड रिकॉर्ड

गुवाहाटी के सरूसजाई स्टेडियम में दो विश्व रिकॉर्ड बनाए गये जो पहले कभी नहीं हुआ था।

  • विश्व में सबसे ज्यादा डांसर्स ने एक साथ बिहू डांस परफार्म किया।
  • विश्व में सबसे ज्यादा लोक संगीतकारों ने ढ़ोल, गोगोना, तोका, पेपा को एक साथ बजाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया।
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आपको बता दें, पिछले साल दिसंबर में असम के पारंपरिक गमछा (गमोसा) को जीआई टैग प्रदान किया जा चुका है।

प्रधानमंत्री ने प्रदान किया सर्टिफिकेट

सरूसजाई स्टेडियम में बिहू डांस और पारंपरिक संगीत परफॉर्मेंस के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परफॉर्मेंस में भाग लेने वाले प्रत्येक कलाकार को उनका ओरिजिनल गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट और 25,000 रुपये इनाम स्वरूप प्रदान किया।

यह इनाम सिर्फ बिहू डांसर्स और धुलिया संगीतकारों को ही नहीं बल्कि उनके मास्टर और ट्रेनर को भी प्रदान किया गया। इससे पहले ढ़ोल बजाने का रिकॉर्ड 1356 धुलिया के नाम पर दर्ज था, जिसे इस दिन तोड़ा गया।

FAQs
रोंगाली बिहू में लोग क्या करते हैं?

असम नववर्ष के मौके पर मनाये जाने वाले रोंगाली बिहू के दौरान लोग लोकनृत्य और पारंपरिव ढ़ोल बढ़ाते हैं। एक-दूसरे के साथ नाचते-गाते लोग असम में नये साल का स्वागत करते हैं।

क्या बिहू नया साल है?

बिहू असम में नये साल के शुरुआत के प्रतिक के तौर पर मनाया जाता है। यह साल का पहला बिहू होता है। इसे रोंगाली बिहू कहा जाता है, जो असम का मुख्य पर्व है।

बोहाग बिहू के 7 दिन कौन-कौन से हैं?

बोहाग बिहू 7 दिनों तक मनाया जाने वाला पर्व है। इन 7 दिनों को चोट बिहू, गोरू बिहू, मनुह बिहू, कुटुम बिहू, सेनेही बिहू, मेला बिहू और चेरा बिहू कहा जाता है।

असम को जीआई टैग क्यों मिला?

असम के पारंपरित गमछा (गमोसा) को जीआई टैग मिला है। इसका अर्थ हुआ कि यह पारंपरिक गमछा मूल रूप से असम में सबसे पहले बनाया गया था। या इसका आविष्कार असम में ही हुआ था।

असम में बिहू कितनी बार मनाया जाता है?

असम में बिहू तीन बार मनाए जाते हैं, जो तीन ऋतुओं के प्रतीक हैं। पहला बिहू बोहाग बिहू या रंगोली बिहू होता है। यह असम का मुख्य पर्व है। दूसरा बिहू काति बिहू या कोंगाली बिहू होता है। तीसरा बिहू माघ बिहू या भोगाली बिहू होता है।

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