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17वीं सदी में जब नहीं काम आया दुआ-ताबीज़ तो अयोध्‍या के हनुमान गढ़ी मंदिर में हुआ चमत्कार!

22 जनवरी 2024 का दिन इतिहास में दर्ज होगा। दुनिया भर की नजरें अयोध्या पर टिकी हुई हैं। नवनिर्मित भव्य राम मंदिर का उद्घाटन होने के साथ ही रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ भी उमड़ पड़ेगी। लोग सिर्फ राम मंदिर ही नहीं बल्कि आसपास कई जगहों पर भी घुमने जाएंगे। इनमें अयोध्या का लोकप्रिय मंदिर 'हनुमानगढ़ी' भी शामिल है। हनुमानगढ़ी मंदिर का इतिहास बड़ा ही रोचक है।

Hanumangarhi temple ayodhya

इस मंदिर के निर्माण में तत्कालिन नवाब साहब की उल्लेखनिय भूमिका रही है। करीब 10वीं शताब्दी में निर्मित हनुमानगढ़ी मंदिर के बारे में स्थानीय मान्यता है कि भगवान राम के दर्शन के साथ हनुमान का दर्शन किये बिना अयोध्या की यात्रा संपूर्ण नहीं होती है।

हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन किये बिना रामलला की पूजा अधुरी मानी जाती है। हनुमानगढ़ी को हनुमानजी का घर कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जब श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित अयोध्या वापस लौटे उसके बाद से ही हनुमान जी भी एक गुफा में अयोध्या में रहने लगे। इस गुफा को ही आज हनुमानगढ़ी कहा जाता है। अयोध्या की मान्यता के अनुसार रामलला के दर्शन करने से पहले श्रद्धालुओं को हनुमानगढ़ी जाकर श्रीराम के दर्शन करने की अनुमति लेनी पड़ती है। इसके बाद ही श्रीराम के दर्शन मिल पाते हैं।

इतिहास के पन्ने खंगालने पर हनुमानगढ़ी मंदिर के बारे में दो तरह का इतिहास मिलता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्‍वविद्यालय, फैजाबाद में डॉ. महेश चंद्र के रिसर्च के आधार पर हनुमानगढ़ी मंदिर के इतिहास का वर्णन कुछ यूं किया गया है :-

महाराज विक्रमादित्य ने बनवाया था पहला मंदिर

temple ayodhya hanumangarhi

अयोध्या में भगवान हनुमान को समर्पित मंदिर का सर्वप्रथम निर्माण महाराज विक्रमादित्य ने करवाया था। महाराज विक्रमादित्य का बनवाया हुआ श्री हनुमान जी का प्राचीन मन्दिर जब विनष्ट हो गया तो उस स्थान को लोग हनुमान टीला कहने लगे। जब लखनऊ में नवाब मसूर अली खां सफदर जंग साहब का शासनकाल था, उस समय इस स्थान पर बाबा अभय रामदास जी त्यागी नामक एक महात्मा कुटी बनाकर निवास करते थे। कहा जाता था कि वे बड़े सिद्ध सन्त थे। दावा तो यहां तक किया जाता था कि हनुमान जी ने उनको साक्षात् दर्शन भी दिया था।

हनुमान जी के मंदिर का चमत्कार

image of hanumangarhi temple ayodhya

इतिहास के अनुसार 17वीं शताब्दी में एक बार जब नवाब मसूर अली साहब बहुत सख्त बीमार पड़ गये तब बड़े-बड़े हकीम और वैद्यों की दवा की गई लेकिन उससे उन्हें कोई फायदा न हुआ। सैंकड़ों मुसलमान फकीरों की दुआ और ताबीज भी लाये गये, पर कोई फायदा नहीं हुआ।

नवाब साहब की बीमारी के बारे में पता चलने पर महाराज टिकैत राय मंसूर खान का हाल लेने पहुंचे। वापस आते ही उन्होंने महात्मा अभयराम दास जी को भेजा। महात्मा जी अयोध्‍या के रहने वाले एक ज्ञानी वैद्य होने के साथ-साथ पुजारी थे। उन्‍होंने हनुमान जी का नाम लेकर दवा दी। दवा बहुत तेजी से अपना असर कर गयी और नवाब साहब ठीक हो गये। मंदिर के इस चमत्कार को देख नवाब मंसूर अली ने हनुमान टीले पर हनुमान जी का मन्दिर बनवाया, जो अब हनुमान गढ़ी के नाम से जाना जाता है।

hanumangarhi temple ayodhya uttarpradesh

मंदिर का निर्माण महाराज टिकैतराय की अध्यक्षता में कराया गया। हनुमान गढ़ी में 4 पट्टियाँ हैं। हरद्वारी, बसतिया, उज्जैनियाँ, टिकैतनगर और सगरिया। ये चारों पट्टियों के अलग-अलग चार महन्त हैं और चारों महन्तों के ऊपर एक बड़े महन्त हैं। जिन्हें लोग गद्दीनशीनत जी कहते हैं। हनुमान गढ़ी में लगभग 5000 साधु निवास करते हैं। जिन्हें मन्दिर की आय में से कच्चा भोजन तथा एकादशी को प्रति व्यक्ति दो रूपया फलाहार के निमित्त दिया जाता है।

हनुमानगढ़ी मंदिर का दूसरा इतिहास जो वीकिपीडिया में मिलता है :-

हनुमानगढ़ी पर कब्जे के लिए हुई लड़ाई

वर्ष 1822 में फैजाबाद के एक न्यायिक अधिकारी हफीजुल्ला ने कहा कि बाबर की बनाई मस्जिद रामजन्मभूमि पर बनी है। उसने यह भी कहा कि ये मस्जिद सीता रसोई के पास है। इसके 33 वर्ष बाद हनुमान गढ़ी पर भीषण संघर्ष हुआ। 1855में ब्रिटिश रेजिडेंट ने अवध के नबाव को खत लिखकर हनुमान गढ़ी पर जिहादियों के हमले को रोकने के लिए कहा। ब्रिटिश रेजिडेंट ने खत में लिखा कि सुन्नी मौलवी गुलाम हुसैन रामजन्मभूमि पर हमला करने के लिए मस्जिद से तकरीर कर मुसलमानों को भड़का रहा है।

hanuman garhi history

मौलवी का दावा है कि हनुमान गढ़ी के भीतर मस्जिद है और मुसलमानों को उस पर कब्जा कर लेना चाहिए। आरोप लगाया गया कि ब्रिटिश रेजिडेंट के बार-बार फोर्स भेजने के आग्रह पर भी नबाव ने कोई ध्यान नहीं दिया। शुरू में एक छोटी झड़प हुई लेकिन कुछ दिन बाद जुलाई के महीने में यह खुनी संघर्ष में बदल गयी। गुलाम हुसैन ने जिहादियों के एक झुण्ड के साथ हनुमान गढ़ी पर हमला किया जिसका हिन्दू वैरागी साधुओं ने तगड़ा जबाव भी दिया था। कहा जाता है कि इस हमले में गुलाम हुसैन समेत 70 सुन्नी जिहादी मारे गये थे।

दावा किया जाता है कि 1857 के फरवरी महीने में मौलवी अहमदुल्ला शाह इसी गुलाम हुसैन की मौत का बदला लेने फैजाबाद गया था। वहां एक मस्जिद में भड़काऊ भाषण देने पर गिरफ्तार हुआ। मई में क्रांति होने से पहले ही उसे फांसी पर चढाने का हुक्म हो चुका था। एकाएक बगावत होने पर उसने जेल के डाक्टर नजफ अली के कपड़े पहनकर डाक्टर की मदद से ही जेल पर कब्जा कर लिया और क्रान्तिकारी बन गया।

hanuman garhi temple at ayodhya ram mandir

उसका चरित्र बहुत कुछ मुल्ला मसूद अजहर से मिलता जुलता था। मौलवी जेल में ताबीज़ -गंडे देता था। हनुमान गढ़ी पर हमला करने वाले मौलवी गुलाम हुसैन को यह अपना पीर कहता था। गुलाम हुसैन, सैयद अहमद बरेलवी का शागिर्द था जो 1826 में बालाकोट के पहले आतंकवादी अड्डे को सिख फौजों द्वारा ध्वस्त करते समय मारा गया।

अयोध्या में सिर्फ रामजन्मभूमि ही नहीं बल्कि उसके आसपास दूसरे पवित्र स्थानों को लेकर भी इतिहास में कई हिंसक झड़प हो चुकी हैं। हनुमानगढ़ी इन हिंसक झड़पों से अछुता नहीं रहा है। हमें पूरा भरोसा है कि रामलला के दर्शन के बाद जब आप हनुमानगढ़ी में माता अंजनी और पवनपुत्र हनुमान के दर्शन करने जाएंगे तो आपको NativePlanet का यह आर्टिकल जरूर याद आएगा।

आज की तारीख में अच्छी बात यह है कि अब अयोध्या में हर तरफ शांति और खुशहाली का माहौल है। एक तरफ भव्य राम मंदिर के भूतल का निर्माण लगभग संपन्न होने ही वाला है और 23 जनवरी से आम भक्त भी रामलला के दर्शन कर सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या में मस्जिद का निर्माणकार्य भी शुरू होगा।

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