राम मंदिर का उद्घाटन का शुभ मुहूर्त आ चुका है। अयोध्यावासियों के साथ-साथ विश्व भर में फैले राम-भक्तों का 500 सालों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। आज 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यजमानी में अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर का उद्घाटन और भूतल के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।

पीएम मोदी 5 घंटों के लिए अयोध्या में होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में उनका कार्यक्रम कुबेर टीला मंदिर में दर्शन करने के साथ खत्म होगा। कुबेर टीला पर भगवान शिव का मंदिर स्थित है। इस मंदिर का इतना अधिक महत्व क्यों है, कि प्रधानमंत्री की अयोध्या में होने वाली इतनी महत्वपूर्ण यात्रा में इसे शामिल किया गया है?
आइए पहले पीएम मोदी की अयोध्या यात्रा की 5 घंटों की Itinerary जान लेते हैं -
- सुबह 10.25 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे।
- 10.45 बजे वह अयोध्या हेलीपैड पहुंचेंगे।
- ठीक 10.55 बजे पीएम मोदी अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचेंगे।
- 12.06 से 12.55 बजे तक पीएम मोदी रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान की यजमानी करेंगे।
- 12.55 बजे पीएम मोदी राम मंदिर परिसर छोड़कर बाहर निकलेंगे।
- दोपहर 1 बजे सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचेंगे।
- दोपहर 1 से 2 बजे तक पीएम मोदी अयोध्या में सार्वजनिक कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।
- दोपहर 2.10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुबेर टीला मंदिर में दर्शन करने के लिए जाएंगे।
चलिए अब बात करते हैं अयोध्या के कुबेर टीला मंदिर की। कुबेर टीला का काफी पौराणिक महत्व है।
क्या है कुबेर टीला का इतिहास

कहा जाता है कि कुबेर टीला पर भगवान शिव का जलाभिषेक किये बिना अयोध्या की यात्रा कभी भी संपूर्ण नहीं हो सकती है। अयोध्या के इतिहास का वर्णन करने वाले ग्रंथ रुद्रयामल के अनुसार युगों पूर्व इस स्थान पर धन के देवता कुबेर का आगमन हुआ था। उन्होंने ही सबसे पहले श्रीराम जन्मभूमि के निकट इस ऊंचे टीले पर शिवलिंग की स्थापना कर उनकी पूजा की थी। बाद में धीरे-धीरे यहां मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी, कुबेर समेत कुल 9 देवी-देवताओं की स्थापना की गयी थी।
9 देवी-देवताओं की मौजूदगी की वजह से ही इस स्थान को भक्त 'नौ-रत्न' के नाम से जानते हैं। हाल ही में यहां पक्षीराज जटायू की प्रतिमा भी स्थापित की गयी। जिस तरह लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए श्रीराम ने रामेश्वरम भगवान शिव की पूजा की थी, ठीक उसी तर्ज पर श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण शुरू होने से पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से भी कुबेर टीला पर भगवान शिव का दुग्धाभिषेक किया गया था।

पुरातात्विक महत्व भी हुआ स्वीकार
कुबेर टीला का महत्व केवल धार्मिक या पौराणिक ही नहीं है। बल्कि इस जगह के पुरातात्विक महत्व को भी स्वीकार किया जा चुका है। वर्ष 1902 में एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा ने रामनगरी में 84 कोसी परिक्रमा परिधि में जिन 148 स्थानों को चिन्हित किया था, उनमें कुबेर टीला भी शामिल है।
बाद में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने भी अयोध्या जिले में जिन 8 स्थानों को संरक्षण सूची में स्थान दिया था उनमें कुबेर टीला भी शामिल है। स्थानिय लोगों का कहना है कि करीब 5 दशन पूर्व यहां से भगवान शिव की बारात निकाली जाती थी। लेकिन अयोध्या पर आतंकी हमला होने के बाद यह सिलसिला रूक गया।
98 वर्षीय मूर्तिकार ने बनायी जटायू की मूर्ति

पिछले साल कुबेर टीला पर पक्षीराज जटायू की प्रतिमा लगायी गयी थी, जिसका अनावरण पीएम मोदी ने किया था। कांस्य से बनी यह भारी-भरकम मूर्ति दिल्ली से बनाकर अयोध्या लायी गयी थी। इस मूर्ति का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार 98 वर्षीय राम वांजी सूरत ने किया है। उन्होंने इसे अपने बेटे अनिल, जिनकी उम्र 65 साल है, के साथ मिलकर तैयार किया था।
मीडिया रिपोर्ट्स में अनिल के हवाले से कहा गया कि कुबेर टीला के लिए श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र की तरफ से दो तरह की मूर्ति का विकल्प दिया गया था। पहले विकल्प में जटायू को आक्रामक मोड में और दूसरे विकल्प में उन्हें उड़ते हुए दिखाया गया। मंदिर ट्रस्ट को उड़ती हुई मुद्रा वाली मूर्ति ही पसंद आयी।



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