सैंकड़ों सालों के इंतजार के बाद आखिरकार राम जन्मभूमि पर एक बार फिर से भगवान श्रीराम को स्थापित किया जा रहा है। 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर के भूतल में रामलला की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है। इस समारोह की यजमानी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं। मंदिर के निर्माण के लिए राजस्थान से पत्थर लाये गये तो महाराष्ट्र से लायी गयी लकड़ियों से चौखट और दरवाजे बनाए गये।

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने की दौड़ में रामलला की 3 मूर्तियां शामिल हैं। इनमें से एक मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा लेकिन बाकी दो मूर्तियों का क्या होगा? जब मंदिर को ही इतने भव्य तरीके से बनाया जा रहा है तो इसमें स्थापित होने वाली मूर्तियां कितनी खास होंगी? कौन हैं वो भाग्यशाली शिल्पकार जिन्हें रामलला की मूर्तियों को तराशने का मौका मिला है? इस आर्टिकल में हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देने के साथ-साथ राम मंदिर से जुड़ी और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां देने वाले हैं।
सबसे पहले आपको बता दें, मंदिर के भूतल में भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। इसलिए मूर्तियों को बनाने का ऑर्डर देते समय सभी मूर्तिकारों से इस बात का खास ख्याल रखने के लिए कहा गया था कि मूर्तियों के चेहरे पर 5 साल के बालक की कोमलता झलकनी चाहिए। रामलला की कौन सी मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होगी, इसका चुनाव करने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने एक कमेटी का गठन किया है। वहीं मूर्ति का चयन करेगी।

अब बताते हैं कौन-कौन हैं भाग्यशाली मूर्तिकार
रामलला की मूर्तियों का निर्माण करने की जिम्मेदारी जिन भाग्यशाली मूर्तिकारों को मिली है, उनमें मैसूर से अरुण योगीराज, सत्यनारायण पांडे और बैंगलोर के मशहूर मूर्तिकार जीएल भट्ट शामिल हैं। तीनों ने ही मई 2023 को रामलला की मूर्तियां तैयार करने का काम शुरू कर दिया था। मिली जानकारी के अनुसार रामलला की मूर्तियों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, अब बस इनका चयन होना बाकी है।
क्या-क्या खास है तीनों मूर्तियों में
अरुण योगीराज रामलला की जिस मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं, वह 51 इंच लंबी है। इस मूर्ति में भगवान श्रीराम धनुष-बाण पकड़े दिखेंगे। अगर अरुण योगीराज की मूर्ति को चुना जाता है तो यह उनकी बनायी तीसरी मूर्ति होगी जिसका उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे। इससे पहले उनकी बनायी केदारनाथ में श्री आदिशंकराचार्य और दिल्ली में सुभाष चंद्र बोस की मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं।

सत्यनारायण पांडे 40 साल पुरानी मकराना पत्थर से रामलला की मूर्ति बना रहे हैं। सत्यनारायण का दावा है कि यह मूर्ति कभी खराब नहीं होगी क्योंकि दुनिया के 100 सबसे अच्छे पत्थरों में मकराना पत्थर की गिनती होती है। जिस मात्रा में कैल्शियम और आयरन होने से कोई पत्थर कभी खराब नहीं होती, उतनी मात्रा में मकराना पत्थर में सब मिलता है। दावा किया जाता है कि मकराना पत्थर अब दुनिया के किसी भी पहाड़ पर नहीं पाया जाता है।
जीएल भट्ट की बनायी मूर्ति की ऊंचाई लगभग 4 फीट होगी और गर्भगृह में अगर यह स्थापित होती है तो कमल आधारभूमि पर रखने के बाद इस मूर्ति की ऊंचाई 8 फीट हो जाएगी। मूर्ति का निर्माण कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के किनारे पहाड़ से लायी गयी शिलाओं से किया जा रहा है। शास्त्रों में जिस प्रकार भगवान श्रीराम को श्याम वर्ण का बताया गया है, यह मूर्ति भी वैसी ही होगी।
क्या होगा बाकी 2 मूर्तियों का

राम मंदिर के भूतल के गर्भगृह में रामलला की एक ही मूर्ति स्थापित की जाएगी, लेकिन इस रेस में कुल 3 मूर्तियां हैं। तो फिर बाकी की 2 मूर्तियों का क्या होगा? मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बाकी की दो मूर्तियों में से एक मूर्ति को उत्सव मूर्ति के तौर पर रखा जाएगा। किसी खास मौके या उत्सव के दिन उस मूर्ति को मंदिर से बाहर निकाला जाएगा जैसा आमतौर पर दक्षिण भारतीय मंदिरों में किया जाता है। तीसरी मूर्ति का क्या होगा, इसपर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसका फैसला होना अभी बाकी है।
पूर्व में प्रवेश-दक्षिण में निकास
राम मंदिर के भूतल का निर्माण कार्य लगभग 90% पूरा हो चुका है। नागर शैली में बनायी जा रही मंदिर में दक्षिण द्रविड़ शैली की झलक भी दिखेगी। 23 जनवरी 2024 से मंदिर के द्वार को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर परिसर 70 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें से मंदिर को 2.70 एकड़ के क्षेत्र में तैयार किया जा रहा है। बाकी के क्षेत्र में से 25-30 प्रतिशत जमीन पर ही निर्माणकार्य होगा।
इसके बाद के क्षेत्र को हरियाली के लिए खुला छोड़ा जाएगा। मंदिर के भूतल में स्थापित रामलला के दर्शन के लिए भक्तों को मंदिर के पूर्व द्वार से 33 सीढ़ियां चढ़कर जाना होगा। दर्शन करने के बाद भक्त दक्षिण द्वार से बाहर निकल आएंगे। मंदिर परिसर में कुल 44 द्वार होंगे। भूतल में रामलला और प्रथम तल में राम दरबार बनाया जाएगा।
मिश्रित शैली का प्रतिक

मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर को मिश्रित शैली के आधार पर तैयार किया जा रहा है। परिसर के ठीक बीच में राम मंदिर होगा, जो नागर शैली के आधार पर तैयार किया जा रहा है। यह उत्तर भारतीय मंदिरों की विशेषता है। लेकिन मंदिर के चारों तरफ आयताकार परकोटा भी होगा, जिसे चारों कोनों पर चार मंदिर - भगवान सूर्य, गणपति, माता पार्वती और महादेव के मंदिर होंगे।
इन मंदिरों को दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली के आधार पर तैयार किया जा रहा है। मंदिर की नींव को 14 मीटर की गहराई में तैयार किया गया है। नींव में स्टोन डस्ट और फ्लश ऐश भरा गया है, ताकि 1000 साल बाद भी इस मंदिर की नींव जरा भी कमजोर ना पड़े। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 25 हजार फ्री लॉकर तैयार किये जा रहे हैं, जिसमें अपना सामान मुफ्त में रखकर श्रद्धालु भगवान श्रीराम और अन्य मंदिरों के दर्शन करने जा सकते हैं।



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