अयोध्या में रामलला के दर्शन करने आने वाले भक्तों जलविहार का भी आनंद उठा सकें, इसके लिए सरयू नदी में जल्द ही वाटर मेट्रो की शुरुआत की जाएगी। इससे पहले सरयू नदी में क्रुज सेवा 'जटायू' की शुरुआत भी की जा चुकी है। लेकिन अब वाटर मेट्रो की शुरुआत की जाएगी जिसका संचालन सरयू नदी के दो घाटों के बीच होगा।

वाटर मेट्रो की शुरुआत मुख्य रूप से अयोध्या के पर्यटन को समृद्ध और जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ही किया जा रहा है। वाटर मेट्रो के संचालन में पूरी तरह से पर्यावरण का ध्यान रखा जाएगा ताकि सरयू नदी में किसी भी प्रकार से प्रदूषण न फैल पाए।
बता दें, इससे पहले कोच्चि में भी वाटर मेट्रो की शुरुआत हो चुकी है। कोच्चि में भारत की पहली वाटर मेट्रो सेवा की शुरुआत की गयी थी।
कोचीन शिपयार्ड में तैयार हो रही है वाटर मेट्रो
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार सरयू नदी में जिस वाटर मेट्रो का संचालन होगा, उसका निर्माण कोचिन शिपयार्ड में किया गया है। सरयू नदी में यह किसी क्रुज की तरह ही दिखाई देगी। वाटर मेट्रो पूरी तरह से एयर कंडीशन होने वाली है, जिससे सर्दियों में अयोध्या में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड में न तो यात्री ठिठुरे और न ही गर्मियों में उन्हें पसीने से तर-बतर होना पड़े।
मिली जानकारी के अनुसार अयोध्या की सरयू नदी में चलने वाली वाटर मेट्रो को अभी वाराणसी पहुंचाया गया है। कुछ दिनों में केंद्रीय जलमार्ग मंत्रालय की तरफ से इसे उत्तर प्रदेश राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।
किन घाटों के बीच होगा संचालन
अयोध्या में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ही वाटर मेट्रो को शुरू करने की योजना बनायी गयी है। सरयू नदी में वाटर मेट्रो का संचालन अयोध्या के संत तुलसीदास घाट से गुप्तार घाट के बीच किया जाएगा। करीब 14 किमी का सफर तय कर वाटर मेट्रो में लगभग 50 यात्री एक बार में जलविहार का आनंद उठा सकेंगे। जिस वाटर मेट्रो को अयोध्या की सरयू नदी के लिए तैयार किया गया है, वह बैट्री चालित होगी।

इसके लिए दोनों घाटों पर जेटी के साथ-साथ चार्जिंग प्वाएंट भी बनाए गये हैं। दोनों घाटों पर जेटी की स्थापना भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की तरफ से किया गया है। वाटर मेट्रो की दोनों तरफ किनारों पर फाइबर से बनी सीट लगायी गयी हैं, जिनपर यात्री बैठकर जलविहार का आनंद उठा सकेंगे।
वाटर मेट्रो की खासियतें और किराया
वाटर मेट्रो का नाम कैटा मेरन वैसल बोट है। यह 50 सीटर एमवी (मोटर व्हीकल) है। बोट पूरी तरह से एयर कंडीशन होगी, जिसमें यात्रियों की सुविधा के लिए डिस्प्ले बोर्ड भी लगाया जाएगा। इस बोर्ड पर विभिन्न जानकारियां साझा की जाएंगी। यात्रियों के केबिन से पायलट का केबिन पूरी तरह से अलग बनाया गया है। एक बार पूरी तरह से चार्ज होने के बाद यह वाटर मेट्रो करीब 1 घंटे तक लगातार यात्रा करने में सक्षम होगी। इस 1 घंटे के दौरान ही वाटर मेट्रो संत तुलसी घाट से गुप्तार घाट के बीच की 14 किमी की दूरी को तय कर लेगी।
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वाटर मेट्रो में जीवन रक्षक जैकेट व अन्य उपकरण रखें होंगे। अभी तक वाटर मेट्रो के किराए का कोई खुलासा नहीं किया गया है और न ही कब से वाटर मेट्रो शुरू होगी, इसकी तारीख का खुलासा भी हुआ है। लेकिन कोच्चि वाटर मेट्रो का किराया करीब 20 रूपए होता है। इसलिए संभावना है कि अयोध्या में सरयू नदी वाटर मेट्रो का किराया भी 20 से 30 रूपए के बीच ही होगा।



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