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बसंत पंचमी 2018: विद्या की देवी सरस्वती के इन मंदिरों को जानते है क्या आप?

By Goldi

बसंत पंचमी के पवन अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है। यह पर्व भारत के सभी राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने का भी प्रचलन है।

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बसंत पंचमी के पवन अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है। यह पर्व भारत के सभी राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने का भी प्रचलन है। इस दिन यूं तो स्कूल और घरों में मां सरस्वती की वन्दना की जाती है, लोग देवी मां को पीली मिठाइयों का भोग लगाती हैं। तो कुछ इस दिन मां सरस्वती के मंदिर जाकर भी उनकी वन्दना करते हैं। तो आइये बसंत पंचमी के खास मौके पर देवी सरस्वती के प्राचीन मन्दिरों पर नजर डालते हैं।

पुष्कर

पुष्कर

मंदिरों के नगर के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान स्थित पुष्कर में देवी सरस्वती का एक बेहद ही खूबसूरत मंदिर स्थित है। पुष्कर में विद्या की देवी सरस्वती यहां नदी के रूप में भी है,जिन्हें उर्वरता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। बता दें, ब्रह्मा ही का मंदिर भी स्थित है। कहा जाता है कि, सरस्वती ने ही ब्रह्मा जी को सिर्फ पुष्कर में उनका मंदिर होने श्राप दिया था।

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ से तीन किमी की दूरी पर स्थित माणा में सरस्वती नदी बहती है, यहां देवी मां का एक मंदिर हैं, जिसमे उनकी मूर्ति में वह हाथों में वीणा लिए बैठी हुई हैं। यहां दर्शन करने वाले श्रधालुयों की माने तो, यहां माता के दर्शन वालों को मूर्ति में साक्षत देवी सरस्वती के दर्शन मिलते हैं। Pc: Karunamay Mukhopadhyay

कोट्यम

कोट्यम

केरल के कोट्यम में देवी सरस्वती का इकलौता मंदिर है, जो श्रधालुयों के बीच मुक्म्बिका के नाम से प्रसिद्ध है। यहां देवी की मूर्ति पूर्वी मुखी है ।

कर्नाटक

कर्नाटक

श्रृंगेरी शारदाम्बा मंदिर कर्नाटक का प्रसिद्ध मंदिर है जिसक निर्माण श्री शंकर भागावात्पदा ने 7वां शताब्दी में कराया था, यहां की मूर्ति को लेकर कहा जाता है कि पहले यहां चंदन की मूर्ति थी , बाद में उसकी जगह सोने की मूर्ति स्थापित कर दी गई। Pc:Some guy 2086

मैहर

मैहर

मध्य प्रदेश में स्थित सतना जिले में लगभग 600 फुट की ऊंचाई वाली त्रिकुटा पहाड़ी पर मां दुर्गा के शारदीय रूप देवी शारदा का मंदिर है। मां मैहर देवी के मंदिर तक पहुंचने के लिए 1063 सीढि़यों तय करनी पड़ती हैं। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि आल्हा और उदल नाम के दो चिरंजीवनी सालों से रोज देवी की पूजा कर रहे हैं।Pc:LRBurdak

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