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भक्तों की मुरादों को पूरा करती हैं पहाड़ों वाली देवी

By Goldi

धार्मिक और तीर्थ स्थलों

भाव-भक्ति में लीन उत्तरभारत के ये प्रसिद्ध मंदिर

धार्मिक स्थल पहाड़ों पर भी स्थित है,जहां भक्त हर साल हज़ारों की तादात में श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर सैंकड़ों मील दूरी का सफर तय करके पहुँचते हैं। जिसके कारण यह स्थल लोगों के बीच खासा मशहूर हैं। जहाँ पहुंचकर आप न सिर्फ आस्था से इन जगहों से जुड़ेंगे

वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू-कश्मीर

वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू-कश्मीर

भारत में हिन्‍दूओं का पवित्र तीर्थस्‍थल वैष्णो देवी मंदिर है जो त्रिकुटा हिल्‍स में कटरा नामक जगह पर 1700 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के पिंड एक गुफा में स्‍थापित है, गुफा की लंबाई 30 मी. और ऊंचाई 1.5 मी. है। लोकप्रिय कथाओं के अनुसार, देवी वैष्‍णों इस गुफा में छिपी और एक राक्षस का वध कर दिया।मंदिर का मुख्‍य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है। इस मंदिर की देखरेख की जिम्‍मेदारी वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की है। PC: Abhishek Chandra

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार

मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का प्रसिद्ध मंदिर है,जोकि हरिद्वार से 3 किमी की दूरी पर स्थित है। मान्यताओं के अनुसार मनसा देवी की उत्पत्ति ऋषि कश्यप के मन से हुई थी। यहां स्थापित पेड़ पर धागा बांधने से मनोकामना जरूर पूरी होती है। जिसके बाद पेड़ से एक धागा खोलने की परम्परा है। इस मंदिर को आप हरी की पौड़ी से भी देख सकते हैं।PC:Ekabhishek

शारदा माता मंदिर, मध्यप्रदेश

शारदा माता मंदिर, मध्यप्रदेश

मैहर मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक छोटा सा नगर है। यह एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थस्थल है। मैहर में शारदा मां का प्रसिद्ध मन्दिर है, इसे देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। कहते है की यहां पर देवी सती का हार गिरा था। मैहर वाली माता मंदिर मध्यप्रदेश राज्य की त्रिकुटा पहाड़ी पर बसा है।PC: LRBurdak

चामुंडेश्वरी मंदिर,कर्नाटक

चामुंडेश्वरी मंदिर,कर्नाटक

कर्नाटक के मैसूर में स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है। बताया जाता है कि, इस मंदिर की स्थापना 12वीं सदी में की गई थी। मंदिर परिसर में राक्षस महिषासुर की एक 16 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। जो यहां के मुख्य आकर्षणों में से एक है। PC:Sanjay Acharya

तारा देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

तारा देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

तारा देवी मंदिर शिमला से 13 किमी दूर शोघी में स्थित है। पहाड़ो पर स्थित तारा देवी को देवी दुर्गा की नौ बहनों में से नौवीं बहन कहा जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 250 साल पहले बनाया गया था। यहां स्थापित देवी की मूर्ति को लेकर मान्यता है की तारा देवी की मूर्ति प. बंगाल से लाई गई थी।

तारा तारिणी मंदिर, उड़ीसा

तारा तारिणी मंदिर, उड़ीसा

ओडिशा में बरहामपुर शहर के पास तारा तारिणी पहाड़ी पर स्थित मंदिर सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह देवी मंदिर अपनेआप में बहुत ख़ास है क्योंकि यह मंदिर दो जुड़वां देवियों तारा और तारिणी को समर्पित है। यह मंदिर देवी सटी के 4 शक्ति पीठों के मध्य में स्थापित है, यानि इस मंदिर की चारों दिशा में एक एक शक्ति पीठ है। PC: Nayansatya

बम्लेश्वरी देवी मंदिर, छत्तीसगढ़

बम्लेश्वरी देवी मंदिर, छत्तीसगढ़

माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य में राजनांदगांव ज़िले के डोंगरगढ़ कस्बे में 1600 फ़ीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर की अधिष्ठात्री देवी माँ बगलामुखी हैं, जिन्हें माँ दुर्गा का स्वरुप माना जाता है और ‘माँ बम्लेश्वरी देवी' के नाम से छत्तीसगढ़ की मुख़्य आराध्या के रूप में पूजा जाता है। यहां पहुंचने के लिए लगभग 1100 सीढ़ियां है।

अर्बुदा देवी मंदिर, राजस्थान

अर्बुदा देवी मंदिर, राजस्थान

राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन माउंटआबू से 3 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है अर्बुदा देवी मंदिर। यह मंदिर ऊँची चोटी पर बना है और देवी दुर्गा को समर्पित है। यह मंदिर एक गुफ़ा के अंदर स्थित है। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्त 365 सीढियां चढ़कर यहाँ आते हैं जिसमें प्रत्येक सीढ़ी एक वर्ष के एक दिन का प्रतीक है। लंबी यात्रा भक्तों को रोक नहीं पाती जो बड़ी संख्या में यहाँ देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं।

कनक दुर्गा मंदिर, आंध्र प्रदेश

कनक दुर्गा मंदिर, आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में बना देवी कनक दुर्गा मंदिर हिंदू धर्म के प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। कनकदुर्गा मंदिर कृष्णा नदी के तट पर इंद्रकीलाद्रि पहाड़ की एक चोटी पर बसा है। यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। यह आंध्र प्रदेश का महत्वपूर्ण और दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। माना जाता है कि,इस मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि यहां की देवी प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी, इसलिए इसे बहुत खास और शक्तिशाली माना जाता है। PC:Srikar Kashyap

सप्तश्रृंगी देवी मंदिर, महाराष्ट्र

सप्तश्रृंगी देवी मंदिर, महाराष्ट्र

सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं। यहां की देवी मूर्ती लगभग 10 फ़ीट ऊंची है। देवी मूर्ति के 18 हाथ है. जिनसे वे अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र पकडे हुए है। यह मंदिर छोटे-बड़े सात पर्वतों से घिरा हुआ है इसलिए यहां की देवी को सप्तश्रृंगी यानी सात पर्वतों की देवी कहा जाता है। PC:AmitUdeshi

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