भारत एक ऐसा देश है जहाँ इमारतों से लेकर बाग़ बगीचों, हिल स्टेशन और धार्मिक स्थल का अनूठा संग्रह देखने को मिलता है। हज़ारों सालों से अनेकों धर्मों, जातियों को समेटे हुए भारत खूबसूरती की इबारत लिखता रहा है। ऐसे ही खूबसूरत आलीशान जगहों में ये 5 जगह भी आती हैं जिन्हें भले ही अलग अलग नाम से पुकारा जाए पर हैं ये एक ही शक्ति की रूपरेखा। वो शक्ति जिसने भारत को नई नवेली दुल्हन की तरह अनेकों वादियों से, झीलों से, इमारतों से सजाया है।
तो चलिए इस बार सैर की जाये भारत के 5 आलीशान धार्मिक स्थलों की जहाँ हर साल हज़ारों की तादात में श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर सैंकड़ों मील दूरी का सफर तय करके यहाँ पहुँचते हैं। जिसके कारण यह स्थल लोगों के बीच खासा मशहूर हैं। जहाँ पहुंचकर आप न सिर्फ आस्था से इन जगहों से जुड़ेंगे बल्कि यहाँ का मनोरम दृश्य आपको वहीँ रह जाने को मजबूर कर देगा। एक नज़र में देखें भारत के 5 खूबसूरत वातावरण वाले ऐतिहासिक धार्मिक स्थल।
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वैष्णो देवी, जम्मू और कश्मीर

वैष्णो देवी की गुफा और अंदर का मनोहारी दृश्य सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है
Image Courtesy:Abhishek b4u
वैष्णो देवी मंदिर जम्मू से लगभग 42 किलोमीटर दूर कटरा नामक स्थान पर स्थित है।
वैष्णो देवी मंदिर हज़ारों लाखों की आस्थाओं की धरोहर जम्मू कश्मीर में है। जहाँ साल-भर भारी संख्या में श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर में अनेकों कहानियां है कहा जाता है कि देवी वैष्णों इस गुफा में छिपी और एक राक्षस का वध कर दिया था। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है। मंदिर के पिंड एक गुफा में स्थापित है, गुफा की लंबाई 30 मी. और ऊंचाई 1.5 मी. है।
कैसे जाएँ- वैष्णो देवी की यात्रा का पहला पड़ाव जम्मू है। जम्मू देश और विदेशों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। देश के दूर-दराज हिस्सों से आने वाले पर्यटक जम्मू हवाई अड्डे तक प्लेन से आ सकते है। विदेशों से आने पर्यटकों को दिल्ली के रास्ते से आना होगा। अगर आप ट्रेन द्वारा जाना चाहते हैं तो रेलयात्री, जम्मू के तवी रेलवे स्टेशन तक आ सकते है वहां से बस या टैक्सी से होटल या सैर पर जा सकते है। पहाड़ी इलाका होले के कारण यहां दूसरे शहरों से बसों का आवागमन बहुत ज्यादा नही है लेकिन कई शहरों से प्राईवेट बसें मिल जाती है।
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स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

शुद्ध सोने से बना सिखों का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर
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यह मंदिर अमृतसर नगर के बीचोबीच है। इसे 'दरबार साहिब' भी कहा जाता है। यह देश का एक प्रमुख तीर्थस्थल है और यहां पूरे साल बड़ी संख्या में श्रद्धालू आते हैं। अमृतसर में स्थित इस मंदिर को सबसे पहले 16वीं शताब्दी में 5वें सिक्ख गुरू, गुरू अर्जुन देव जी ने बनवाया था। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में महाराजा रणजीत सिंह ने इस गुरुद्वारे की ऊपरी छत को 400 किग्रा सोने के वर्क से ढंक दिया, जिससे इसका नाम स्वर्ण मंदिर पड़ा।
कैसे जाएँ- अगर आप वायु यात्रा द्वारा अमृतसर जाने की सोच रहे हैं तो ग्रेंड ट्रंक रोड (एनएच-1) पर स्थित होने के कारण भारत के प्रमुख शहरों से यहां सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू से अमृतसर के लिए बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा जीटी रोड अमृतसर को पाकिस्तान के लाहौर से भी जोड़ता है। अमृतसर रेल मार्ग से भारत के ज्यादातर हिस्सों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और जम्मू से अमृतसर के लिए प्रतिदिन ट्रेनें मिलती हैं। अमृतसर में शहर से 11 किमी दूर श्री गुरू रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जिसके जरिए यहां हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इसे विश्व के कई स्थानों से जोड़ती हैं।
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अजमेर शरीफ, अजमेर

हज़ारों श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर यहाँ आते हैं
Image Courtesy:Zakir Naqvi
जयपुर से करीब 132 किलोमीटर दूर अजमेर सूफी संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए प्रसिद्ध है। हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह एक ऐसा पाक शफ्फाक नाम है जिसे मात्र सुनने से ही रूह को सुकून मिलता है। अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की मजार की जियारत कर दरूर-ओ-फातेहा पढ़ने की चाहत हर ख्वाजा के चाहने वालों की होती है। वो एक बार इस दरबार में अपनी हाज़िरी लगाने अवश्य आना चाहते हैं। यहाँ आने वाले जायरीन चाहे वे किसी भी मजहब के क्यों न हों ख्वाजा के दर पर दस्तक देने के बाद उनके जहन में सिर्फ अकीदा और लबों पर शांति अमन का पैगाम ही बाकी रहता है।
कैसे पहुंचें- अजमेर शहर दिल्ली और मुंबई के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर स्वर्णिम चतुर्भुज पर स्थित है। इसके अलावा, अजमेर राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, उदयपुर और भरतपुर जैसे सभी प्रमुख शहरों से सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। राज्य संचालित बसों के अलावा कई पर्यटक बसों की सेवा भी उपलब्ध है। अजमेर जंक्शन अजमेर का निकटतम रेल्वे स्टेशन है। क्योंकि यह राज्य का प्रमुख रेल्वे स्टेशन है, यहाँ से भारत के सभी प्रमुख शहरों के लिए रेल उपलब्ध हैं। जयपुर में स्थित सांगानेर हवाई अड्डा अजमेर का निकटतम हवाई अड्डा है जो 132 किमी. की दूरी पर स्थित है। शहर तक पहुँचने के लिए हवाई अड्डे से किराये की टैक्सी ली जा सकती है। यह हवाई अड्डा दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नियमित उड़ानों द्वारा जुड़ा हुआ है।
तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्रप्रदेश

यहाँ भगवान वेंकटेश्वर की भव्य मूर्ति सुशोभित है
Image Courtesy:Prasoon
यह मंदिर भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक है। वेंकटेश्वर मंदिर भारत के सबसे महत्वपूर्ण आलीशान मंदिरों में से एक हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर के प्रति अटूट रहती है। इस मंदिर की खूबसूरती और वातावरण तारीफ़ करने लायक है।वेंकटेश्वर मंदिर के शिखर पर स्वर्ण पत्थर (सोने का पत्थर) चढ़ा हुआ है। यह मंदिर धार्मिक मान्यता में तो लोकप्रिय है ही साथ ही साथ इसके शिखर पर सोने का पत्थर देखने के लिए भी पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रहती है।
कैसे जाएँ- तिरुपति में राज्य का सबसे बड़ा बस टर्मिनल है। दक्षिण भारत के सभी प्रमुख शहरों से यहाँ के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध है। अलिपिरी बस स्टॉप से प्रत्येक दो मिनिट में तिरुमाला के लिए बसें उपलब्ध हैं। तिरुपति एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है जहाँ से पूरे देश के लिए ट्रेन उपलब्ध हैं। रेनिगुंटा जंक्शन रास्ते द्वारा तिरुपति से मात्र 10 किमी. की दूरी पर स्थित है। गुडुर जंक्शन तिरुपति से 84 किमी. की दूरी पर स्थित है। तिरुपति हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित किया गया है परन्तु अभी तक यहाँ से कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नहीं हैं। वर्तमान में यहां से हैदराबाद, दिल्ली, विज़ाग, कोयम्बतूर, कोलकाता और मुंबई के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। हवाई अड्डा शहर से 15 किमी. की दूरी पर स्थित है। निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चेन्नई है।
महाबोधि मंदिर बोधगया, बिहार

महाबोधि मंदिर में बुद्ध की एक बहुत बड़ी मूर्त्ति स्थापित
Image Courtesy:Bpilgrim
माना जाता है कि महाबोधि मंदिर का निर्माण 5 वीं शताब्दी के पूर्व हुआ था। महाबोधि मन्दिर एक पवित्र बौद्ध धार्मिक स्थल है क्योंकि यह वही स्थान है जहाँ पर गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। पश्चिमी हिस्से में पवित्र बोधि वृक्ष स्थित है। संरचना में द्रविड़ वास्तुकला शैली की झलक दिखती है। निःसन्देह रूप से यह सबसे पहले बौद्ध मन्दिरों में से है जो पूरी तरह से ईंटों से बना है और वास्तविक रूप में अभी भी खड़ा है। इसी शैली में बनी चार छोटी लाटें केन्द्रीय लाट के चारों ओर स्थित हैं।
कैसे जाएँ- बोधगया का नज़दीकी हवाई अड्डा गया 7 किलोमीटर दूर है। गया अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा, जिसे बोधगया अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे को नाम से भी जाना जाता है, बोधगया से 7 किमी तथा गया रेलवेस्टेशन से 10 किमी की दूरी पर है। यह बिहार का एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा है और चीन, जापान, श्रीलंका जैसे एशियाई देशों तथा प्रमुक भारतीय शहरों से जुड़ा है। निकटतम रेलवेस्टेशन गया है और सभी प्रमुख शहरों से गाड़ियाँ गया को जोड़ती हैं। बुद्ध परिक्रमा गाड़ी सभी बौद्ध तीर्थ स्थलों से होती हुई बोद्ध आध्यात्म पर्यटन कराती है।



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