कई बार लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और ऑफिस के काम से इतना बोर हो जाते हैं कि बस बैग पैक करके कहीं घूमने निकल पड़ने का मन होता है। लेकिन ऑफिस में दी गयी जिम्मेदारियां उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं। देश में महामारी कोरोना के फैलने के बाद हाईब्रिड काम अथवा वर्क फ्रॉम होम का प्रचलन काफी बढ़ गया है।
तो क्यों न इसका फायदा उठाया जाए और वेकेशन के लिए बैग पैक करने के साथ-साथ ऑफिस वाला लैपटॉप भी लेकर वर्केशन (Workation) पर निकल पड़े, जिससे ऑफिस के काम का भी नुकसान न हो और रोज की बोरयत वाली जिंदगी से भी कुछ दिनों की छुट्टियां मिल जाएं।

क्या होता है वर्केशन?
वर्केशन अंग्रेजी के दो शब्दों से मिलकर बना है, वर्क और वेकेशन। यानी किसी ऐसी जगह पर, जहां आप घूमने गये हैं वहां एंजॉय करते हुए आप अपने ऑफिस के सारे कामों को खुशी-खुशी निपटा लेते हैं। दरअसल, वर्केशन का आइडिया वर्क फ्रॉम होम से ही आया है, जहां लोग घर पर रहकर ही ऑफिस के समयानुसार सभी कामों को निपटाते हैं।
खासतौर पर कोरोना के समय जब देशभर में लॉकडाउन लग गया था, तब अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को छुट्टी या ऑफिस आकर काम करने के बजाए वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दिया था। वर्केशन पर ऑफिस के समय के अलावा बाकी पूरा समय आपको एंजॉय और घूमने-फिरने के लिए मिल जाता है और आपकी छुट्टियों की वजह से ऑफिस का काम भी पेंडिंग नहीं होता है।
क्या हैं वर्केशन के फायदे?
उत्पादन क्षमता में वृद्धि : ऑफिस में लगातार काम करते रहने से व्यक्ति जितना शरीर से थकता है उससे कहीं ज्यादा वह मानसिक रूप से भी खुद को थका हुआ महसूस करता है। वर्केशन उसी बोरियत को खत्म करके दिमाग की रचनात्मकता को बढ़ाती है। इससे व्यक्ति दिल और दिमाग से ताजा हो जाता है और मानसिक रूप से काफी रिलैक्स्ड भी महसूस करता है।
वर्क-लाइफ बैलेंस में मदद : घर में रहकर ऑफिस का काम करना, सुनने में जितना आसान लगता है, घर को संभालते हुए इस काम को पूरा करना उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है। वर्केशन कम दिनों के लिए होता है जो लोगों को अपने काम और परिवार या एंजॉयमेंट में संतुलन बनाने की सीख दे जाता है।
तनाव में आती है कमी : अगर आप घर या ऑफिस में किसी भी कारण से तनाव झेलते हैं तो वर्केशन निश्चित रूप से आपको इसमें मददगार साबित होगा। चूंकि लोग वर्केशन के लिए घर से दूर किसी शांत जगह का ही चुनाव करते हैं, इसलिए शरीर रिलैक्स्ड होने के साथ-साथ आपका मन भी तनावरहित हो जाता है। इससे न सिर्फ आपका व्यक्तिगत जीवन बल्कि ऑफिस में आपके परफॉर्मेंस में भी काफी ज्यादा सुधार आता है।
बचत करवाता है वर्केशन : पारंपरिक वेकेशन पर जाने का मतलब ढेर सारा खर्च और छुट्टियों भी खत्म। लेकिन वर्केशन पर लोगों को काम भी करना होता है, इसलिए इसमें बहुत ज्यादा एक्टिविटी नहीं होती है। कम एक्टिविटी होने की वजह से लोगों का खर्च भी वर्केशन में होता है और काम के साथ-साथ हल्का-फुल्का एंजॉय भी कर लेते हैं।

वो जगहें, जो हैं वर्केशन के लिए परफेक्ट
गोवा : गोवा अपने शानदार समुद्रतट, संस्कृति और शांत वातावरण के लिए ही सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इस वजह से गोवा वर्केशन के लिए एक आदर्श जगह माना जाता है। गोवा के समुद्रतटों पर आपको जहां पार्टी करने के लिए होटल और बार मिल जाएंगे, दूसरी तरफ यहां ऐसे कई कैफे भी मिलेंगे जो को-वर्किंग स्पेस की सुविधा उपलब्ध करवाते हैं। काम के बीच में कुछ देर के लिए समुद्रतटों पर घूम कर आना भी काफी रिफ्रेशिंग होता होगा, है न...। इसके साथ ही गोवा में आपको नाइटलाइफ भी एंजॉय करने का पूरा मौका मिलेगा।
ऋषिकेश : ऋषिकेश को अध्यात्मिक पर्यटन से जोड़कर देखा जाता है। ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों में मुख्य रूप से दो तरह के पर्यटक होते हैं। पहले वो जो अध्यात्म, योग और खुद को तनाव से मुक्त करवाने यहां आते हैं वहीं दूसरी तरह के पर्यटक वैसे भी होते हैं जिन्हें एडवेंचर एक्टिविटी बहुत पसंद होती है। वर्केशन पर आप गंगा किनारे बसे इस शहर में अध्यात्मिक पर्यटन और आश्रमों में ठहरने और काम के साथ खुद को तनावमुक्त करने का भी मौका दे सकेंगे।
वरकला : केरल का समुद्रतटिय शहर जो अपने शांत वातावरण और शानदार बीच की वजह से काफी लोकप्रिय वर्केशन डेस्टिनेशन है। हाल के वर्षों में वरकला में वर्केशन पर आने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। गोवा की तरह ही वरकला में भी समुद्रतटों पर को-वर्किंग स्पेस तैयार किये जा रहे हैं जहां लोग काम के साथ-साथ अपना वेकेशन भी एंजॉय कर सकेंगे।
मनाली : हिमाचल प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं, जहां लोग वर्केशन पर जाना पसंद करते हैं। इनमें मनाली का नाम सबसे ऊपर आता है। शिमला की तुलना में मनाली में पर्यटकों की भीड़ भी कम होती है, जिस वजह से लोग पहाड़ी नजारों का लुत्फ उठाते हुए यहां काम को भी प्राथमिकता दे पाते हैं।
इसके ठीक पास में मौजूद कुल्लु भी वर्केशन के लिए एक आदर्श जगह है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में धर्मकोट और धर्मशाला भी ऐसी जगहें हैं जहां का वातावरण को-वर्किंग स्पेस अथवा वर्केशन के लिए आदर्श है। यहां न तो पर्यटकों का अधिक शोर होता है और न ही गर्मी अथवा उमस की परेशानी होती है।



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