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चिलचिलाती धूप और चिपचिपाते पसीने से राहत देंगे इस गर्मी आपको उत्तर भारत के ये हिल स्टेशन

By Syedbelal

गर्मियाँ आ गयी हैं और बच्चों की छुट्टियां भी शुरू हो चुकी हैं। भारत में गर्मी को लोग ज्यादा पसंद नहीं करते और इस दौरान उनकी एक ही मंशा रहती है कि कैसे एक ऐसे स्थान कि तलाश की जाये जहां उन्हें गर्मी से निजात मिल सके साथ ही वो अपने परिवार, दोस्तों के संग कुछ फुर्सत के पल बिता सकें। तो इस गर्मी हम आपको ये सलाह देंगे कि आप उत्तर भारत की यात्रा करें।

हो सकता है इसे पढ़ने के बाद आप ये सोंचें कि उत्तर भारत में तो बेइंतेहा गर्मी पड़ती है तो ऐसे में हम आपको वेकेशन पर वहां क्यों भेज रहे हैं? तो चाहिए आपकी मुश्किल को आसान करते हैं हम आज आपको अवगत करा रहे हैं उत्तर भारत के कुछ चुनिंदा हिल स्टेशनों से।

तो अब देर किस बात की आज ही रिजर्वेशन कॉउंटर पर जाइये, टिकट बुक कराइये और निकल जाइये उत्तर भारत और वहां की खूबसूरती को निहारने। यकीन मानिये ये डेस्टिनेशन इतने खूबसूरत हैं कि इनसे आपको प्यार हो जाएगा और फिर आप हर साल गर्मी का इंतज़ार करेंगे कि कैसे गर्मी आये और आप निकल जाएं इन स्थानों की यात्रा पर। आइये आपको रू-ब-रू कराते हैं उत्तर भारत के कुछ चुनिंदा हिल स्टेशनों से।

कश्मीर

कश्मीर

कश्मीर अपनी अपार प्राकृतिक सुंदरता के कारण पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है। भारत के उत्तर- पश्चिमी क्षेत्र में स्थित कश्मीर घाटी हिमालय और पीर पंजाल पर्वत श्रुंखला के बीच बसी है। आपको प्रसिद्द डल झील के किनारे स्थित हज़रत बल मस्ज़िद अवश्य देखनी चाहिए जिसे पहले साजिद जहां के इशरत महल या ‘प्लेज़र हाउस' के नाम से जाना जाता था। इसके अलावा यहां आप चरार-ए-शरीफ, झेलम नदी के किनारे स्थित शाह हमदान का खानकाह,खीर भवानी का मंदिर ,शंकराचार्य मंदिर,मार्तंड सूर्य मंदिर और शालीमार गार्डन जैसे स्थानों की भी यात्रा कर सकते हैं।

केदारनाथ

केदारनाथ

केदारनाथ उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह स्थान समुद्रतल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर गढ़वाल हिमालय में स्थित है। केदारनाथ मन्दिर को हिन्दुओं के पवित्रतम गंतव्यों (चार धामों) में से एक माना जाता है और बारहों ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ऊँचा यहीं पर स्थित है। मन्दिर के पास से ही शानदार मन्दाकिनी नदी बहती है। गर्मियों के दौरान इस तीर्थस्थल पर पर्यटकों की भारी भीड़ भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिये आते हैं। केदारनाथ आने वाले यात्रियों को मन्दिर के निकट स्थित आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि पर अवश्य जाना चाहिये। सोनप्रयाग केदारनाथ से 19 किमी की दूरी पर और 1829 मी की ऊँचाई पर स्थित है। यह मुख्यतः बासुकी और मन्दाकिनी नदियों को संगम स्थल है। सन् 1972 में स्थापित केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य अलकनन्दा नदी की घाटी में स्थित है। आप इसकी भी यात्रा अवश्य करें।

मनाली

मनाली

मनाली, हिमाचल प्रदेश राज्‍य में समुद्र स्‍तर से 1950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्यटकों की पहली पसंद है और ऐसा हिल स्‍टेशन है जहां पर्यटक सबसे ज्‍यादा आते है। मनाली, कुल्‍लु जिले का एक हिस्‍सा है जो हिमाचल की राजधानी शिमला से 250 किमी. की दूरी पर स्थित है। मनाली आये पर्यटकों के बीच यहां के सुंदर दृश्‍यों, गार्डन, पहाड़ो, और सेब के बागों के लिए जाना जाता है। यहां के बागों में लाल और हरे सेब काफी मात्रा में पैदा होते है। यहां आने पर पर्यटक हिमालय नेशनल पार्क, हिडिम्‍बा मंदिर, सोलांग घाटी, रोहतांग पास, पनदोह बांध, पंद्रकनी पास, रघुनाथ मंदिर और जगन्‍ननाथी देवी मंदिर देख सकते हैं।यहां का हडिम्‍बा मंदिर 1533 ई. में हिंदू धर्म की देवी हडिम्‍बा को समर्पित करके बनाया गया था।

श्रीनगर

श्रीनगर

श्रीनगर, कश्‍मीर राज्‍य की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी है जिसे समस्‍त भारतवासी धरती का स्‍वर्ग और पूरब का वेनिस कहते हैं। झेलम नदी के तट पर स्थित खूबसूरत झीलों, महान ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्‍व रखने वाला शहर, श्रीनगर हर प्रकार के पर्यटन की धुरी पर खरा उतरता है और पर्यटकों का मन-पसंदीदा गंतव्‍य हैं। यहां के निशात बाग, शालीमार बाग, अच्‍छाबल बाग, चश्‍मा शाही और परी महल काफी प्रसिद्ध हैं जिन्‍हें देखने और यहां भ्रमण करने बड़ी संख्‍या में पर्यटक देश - विदेश से आते हैं। यह सभी बाग शहर के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा देते हैं। श्रीनगर के पर्यटन स्‍थलों में से डल झील, नागिन झील, अंचार झील और मानसबाल झील व अन्‍य झीलें काफी प्रसिद्ध हैं जो क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं।

गंगोत्री

गंगोत्री

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है।यह समुद्र तल से 3750 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय पर्वतमाला में स्थित है। यह भागीरथी नदी के तट पर बसा हुआ है।चार धाम एवं दो धाम दोनों तीर्थयात्राओं के लिए गंगोत्री एक पवित्र स्थल है। भागीरथी नदी का जलाश्रय स्थल घने जंगलों में हैं। इस क्षेत्र में बर्फीले पहाड़,ग्लेशियर,लंबी पर्वत श्रेणियां,गहरी घाटियां,खड़ी चट्टानें और संकरी घाटियां हैं।इस स्थान की समुद्र तल से ऊंचाई 1800 से 7083 मीटर के बीच है। पर्यटकों को यहां अल्पाइन शंक्वाकार वृक्षों के वन,अल्पाइन झाड़ियां,तथा हरे-भरे घास के मैदान देखने का अवसर मिलता है। यह वनक्षेत्र गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित है,तथा इसका विस्तार भारत-चीन सीमा तक है।

शिमला

शिमला

शिमला, एक ख़ूबसूरत हिल स्टेशन है जो हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। समुद्र की सतह से 2202 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस जगह को ‘समर रिफ्यूज' और ‘हिल स्टेशनों की रानी' के रूप में भी जाना जाता है। शिमला भारत में सबसे बड़ी आइस स्केटिंग रिंक के लिए प्रसिद्ध है। सर्दियों के दौरान, जमीन प्राकृतिक बर्फ से ढँक जाती है और यही वह समय होता है (दिसंबर से जनवरी) जब स्केटिंग का पूरा आनंद उठाया जाता है। यहाँ ट्रैकिंग भी बहुत लोकप्रिय है। जुंगा, चैल, चुरदार, शाली पीक, हातू पीक और कुल्लू जैसी जगहें विभिन्न मार्गों द्वारा शिमला से जुड़ी हुई हैं।

लेह

लेह

लेह शहर इंडस नदी के किनारे कराकोरम और हिमालय की श्रृंखला के बीच स्थित है। इस जगह की प्राकृतिक सुन्दरता देश भर से पर्यटकों को साल के बारहों महीने अपनी ओर खींचती है। इस शहर में ज़्यादातर हिस्से में मस्जिद और बौद्ध स्मारक हैं जो सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में बनाये गए थे। खरीददारी में रुचि रखने वाले पर्यटक तिब्बती गहने, ऊनी कपड़े और हाथ से या मशीन से बुने कालीन खरीद सकते हैं। बर्फ से ढका हिमालय पहाड़ इस जगह की सुन्दरता को बढ़ाता है। लेह के कई इलाकों जैसे उबड़ खाबड़ हिमालयन भू-भाग में ट्रेक्किंग भी की जा सकती है और इस दौरान वहां की प्राकृतिक सुंदरता का मज़ा उठाया जा सकता है।

मसूरी

मसूरी

मसूरी, पहाडियों की रानी के रूप में लोकप्रिय है जो उत्‍तराखंड राज्‍य के नैनीताल जिले में स्थित एक हिल स्‍टेशन है। यह महान पर्वत हिमालय की तलहटी पर समुद्र स्‍तर से 1880 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ शहर है। यह हिल स्‍टेशन शिवालिक पर्वतमाला और दून घाटियों के अद्धुत दृश्‍य प्रदान करता है। इस जगह को यमुनोत्री और गंगोत्री के धार्मिक केंद्रों के लिए प्रवेश द्वार भी माना जाता है।

कांगड़ा

कांगड़ा

कांगड़ा हिमाचल प्रदेश में मांझी और बेनेर धाराओं मिलन स्थान पर स्थित एक पर्यटक स्‍थल है। धौलाधार रेंज और शिवालिक रेंज के बीच कांगड़ा घाटी में बसे इस शहर से बाणगंगा धारा दिखाई देती है। यह सामान्यतः देव भूमि के रूप में भी जाना जाता है, जिसका मतलब है देवताओं का निवास। वेदों के अनुसार, विभिन्न गैर आर्यन जनजातीय समुदाय आर्यों के आगमन से पहले यहाँ रहते थे। महान भारतीय महाकाव्य महाभारत में, कांगड़ा को त्रिगार्त राज्य के रूप में संदर्भित किया गया है।

लैंसडाउन

लैंसडाउन

लैंसडाउन, उत्तराखण्ड के पौडी जिले में स्थित एक सुन्दर हिल स्टेशन है, जहाँ गढवाल रेजीमेंट नामक भारतीय सेना का सैन्य-दल स्थित है। यह समुन्दरी तट से 1706 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। स्थानीय भाषा में इसे "कालुदंड" कहते हैं, जिसका अर्थ है "काली पहाडी"। 1887 में, भारत के वाइसरॉय रहे लोर्ड लैंसडाउन ने इस हिल स्टेशन की खोज की। औपनिवेशिक काल दौरान यह स्वतंत्रता सेनानियों का प्रमुख स्थान था। अंग्रेजों ने इस स्थान को गढवाल राइफल्स प्रक्षिक्षण केंद्र के रुप में विकसित किया। आज यहाँ, भारतीय सेना का गढवाल राइफल्स कमांड आफिस स्थित है।

मणिकरण

मणिकरण

मणिकरण हिन्दू और सिख दोनों के लिए पवित्र धार्मिक स्थल है। यह 1737 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, कुल्लू से 45 कि.मी दूर हिमाचल राज्य में है। मणिकरण का अर्थ है "बहुमूल्य रत्न"। पौराणिक कथा अनुसार भगवन शिव की पत्नी पार्वती ने अपना बहुमूल्य रत्न यहाँ के किसी जलाशय में खो दिया। मां पार्वती के निवेदन पर भगवन शिव ने अपने अनुयायीयों को रत्न खोजने के लिए कहा पर वे इसमें विफल रहे। तब भगवन शिव ने क्रोध में अपना तृतीय नेत्र खोला, जिसके कारण धरती में दरार पड़ी और बहुमूल्य रत्नों और जवाहरातों का सृजन हुआ।

अल्मोड़ा

अल्मोड़ा

सुयाल और कोसी नदी के बीच 5 किमी लंबी घोड़े की पीठ के आकर की पहाड़ी पर बसा अल्मोड़ा कुमाऊं क्षेत्र का बेहद चर्चित हिल स्टेशन है। हरे भरे सुंदर जंगलों से घिरा यह शहर समुद्र तल से 1651 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चंद वंश और कत्यूरी वंश ने 15वीं और 16वीं शताब्दी में शासन किया था। अल्मोड़ा की पहाड़ियों से पर्यटक हिमालय की बर्फ से ढंकी चोटियों का विहंगम नजारा देख सकते हैं। इस जगह की कई ऐसी खासियत है, जिससे विश्व भर के पर्यटक इनकी ओर खिंचे चले आते हैं।

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