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जम्मू-कश्मीर की हसीन वादियों में छुपा हुआ नायाब पर्यटन स्थल

By Goldi

जम्मू से लगभग 88 किमी की दूरी पर स्थित कठुआ जम्मू के सबसे खूबसूरत जिलों में से एक माना जाता है और विभिन्न पर्यटक आकर्षण और धार्मिक केन्द्रों के लिए लोकप्रिय है। कठुआ' शब्द डोगरी भाषा के ठुआं' से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ 'बिच्छू' है। कुछ लोगों का मत है कि कठुआ शब्द 'कश्यप' ऋषि के नाम से उत्पन्न हुआ है। यह नगर जम्मू काश्मीर का 'प्रवेश द्वार' तथा औद्योगिक नगर भी है।

किंवदंती है कि 2000 साल पहले, अन्दोत्र राजवंश के जोध सिंह, जो एक लोकप्रिय राजपूत राजा थे, यहाँ अपने तीन बेटों के साथ बस गए। तीनों बेटों ने तीन छोटे शहरों की स्थापना की, अर्थात् तरफ मंजली, तरफ तज्वल और तरफ भज्वल। ये तीनो शहरे एक साथ स्थानीय लोगों द्वारा कथई नाम से जाने जाते थे और अंततः कथई कठुआ बन गया।

यह खूबसूरत सा जिला एक ओर मंदिरों, से परिपूर्ण है, तो दूसरी ओर बर्फ से ढ़के पर्वतों, प्राकृतिक सुंदरता और घाटियों के लिए भी प्रसिद्ध है। तो आइये इसी क्रम में जानते हैं कि, आप कठुया में क्या क्या घूम और देख सकते हैं-

धौला वाली माता

धौला वाली माता

गुरुद्वारा सिंह सभा

गुरुद्वारा सिंह सभा

गुरुद्वारा चौक के नाम से लोकप्रिय गुरुद्वारा सिंह सभा कठुआ शहर के बीच में स्थित है। गुरुद्वारा के आसपास एक सिख मिशनरी कॉलेज भी है। लोकप्रिय सिख त्योहार गुरपूरब और प्रकाश उत्सव को बड़े जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नगर कीर्तन और कार त्योहार अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम है जिन्हें इस जगह पर मनाया जाता है।

बानी

बानी

चन्देल

चन्देल

अगर आपने अभी तक सेब या अखरोट के बगीचे नहीं देखें हैं, तो आपको एक बाद चन्देल की सैर अवश्य करनी चाहिए, जोकि बानी से करीबन 10 किमी की दूरी पर स्थित है। सेब-अखरोट के बगीचे के अलावा पर्यटक यहां एक कलकल करता झरना भी देख सकते हैं, जिसे चन्देली नाम से जाना जाता है।

धार महानपुर

धार महानपुर

बसोहली

बसोहली

रावी नदी के तट पर स्थित बसोहली कठुआ जिले का छोटा सा शहर है। ह शहर 1635 में राजा या राजा भोपत पाल द्वारा स्थापित किया गया था। देश भर से पर्यटक इस शहर के अद्भुत पुराने पत्थर की नक्काशीदार मूर्तियों और छोटे चित्रों को देखने के लिए यात्रा करते हैं, जो बसोहली चित्रों के नाम से भी जाने जाते हैं।

दुग्गन

दुग्गन

समुद्री स्तर से करीबन 7 हजार की ऊंचाई पर स्थित दुग्गन एक बेहद ही खूबसूरत घाटी है, जिसकी चौड़ाई एक किलोमीटर और लंबाई पांच किलोमीटर है। चीड़, देवदार के पेड़ से घिरे इस घाटी के दोनों तरफ से नदियां प्रवाहित होती है। सर्दी हो या गर्मी दोनों ही मौसम में यहां का खुशनुमा मौसम पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।

सारथल

सारथल

कैसे जायें कठुया

कैसे जायें कठुया

हवाईजहाज द्वारा
कठुया का निकतम हवाई अड्डा श्रीनगर है, जोकि देश के सभी मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है। पर्यटक श्रीनगर पहुँचने के बाद यहां से आसानी से टैक्सी या बस के जरिये कठुया पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा
कठुआ रेलवे स्टेशन कानपुर, जालंधर, दिल्ली, जम्मू, और करनाल जैसे शहरों के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। स्टेशन शहर के केंद्र से 7 किमी की दूरी के आसपास स्थित है और यात्री यहाँ से गंतव्य तक पहुंचने के लिए टैक्सियों को ले सकते हैं।

सड़क द्वारा
कठुआ के लिए नियमित बसें नई दिल्ली, जम्मू, शिमला, श्रीनगर, कटरा, उधमपुर, चंडीगढ़ और पठानकोट से उपलब्ध हैं।

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