भारत देश में कई मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जिन्हें हम ज्योतिर्लिंग कहते हैं।पूरे भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं और इसे पूरे विश्व में हिंदुओं द्वारा सर्वाधिक पूजनीय माना जाता है।भारत में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ऐसा माना जाता है कि जो सभी 12 ज्योतिर्लिंग का भ्रमण कर लेता है उन्हें मुक्ति मिल जाती है। इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहें हैं भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में।
भीमाशंकर तीर्थस्थल महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। हरे जंगलों से घिरा यह तीर्थस्थल बेहद खूबसूरत भी है। यह तीर्थ स्थल भीमा नदी और सह्याद्री पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है।यहीं से भीमा नदी भी निकलती है। यह दक्षिण पश्चिम दिशा में
बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से जा मिलती है। यहां भगवान शिव का छठा प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे कुंभकर्ण के पुत्र भीम की एक कथा प्रसिद्ध है।
बाहरी कोलाहल से दूर,सफ़ेद बादलों के मध्य स्थित भीमाशंकर किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पहाड़ियों के ऊँची श्रेडीयों के आसपस घने जंगलों में वनस्पतियों और जीवों की दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है। ये स्थान ऐसा प्रतीत होता है, मानो खुद
शिव भगवान सह्याद्री की सीमायों पर अपनी नजर बनाये रखे हुए है। भीमशंकर यात्रा करने के लिए उचित स्थान है..यहां की ठंडी हवाएं और मन मोहने वाले दृश्य आपके दिल को छू लेंगे।

मोटेश्वर महादेव
इस मंदिर का शिवलिंग काफी मोटा है। इसलिए इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इसी मंदिर के पास से भीमा नामक एक नदी भी बहती है जो कृष्णा नदी में जाकर मिलती है। पुराणों में ऐसी
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्वा से इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद 12 ज्योतिर्लिगों का नाम जापते हुए इस मंदिर के दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर होते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं।PC: Pradeep245

ऐसे हुई थी यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना
कहा जाता है कि कुंभकर्ण के एक पुत्र का नाम भीम था। कुंभकर्ण को कर्कटी नाम की एक महिला पर्वत पर मिली थी। उसे देखकर कुंभकर्ण उस पर मोहित हो गया और उससे विवाह कर लिया। विवाह के बाद कुंभकर्ण लंका लौट आया, लेकिन कर्कटी पर्वत पर ही रही। कुछ समय बाद कर्कटी को भीम नाम का पुत्र हुआ। जब श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध कर दिया तो कर्कटी ने अपने पुत्र को देवताओं के छल से दूर रखने का फैसला किया।PC: ସୁରଥ କୁମାର ପାଢ଼ୀ

देवतायों से लिया पिता की ,मौत का बदला
बड़े होने पर जब भीम को अपने पिता की मृत्यु का कारण पता चला तो उसने देवताओं से बदला लेने का निश्चय कर लिया। भीम ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके उनसे बहुत ताकतवर होने का वरदान प्राप्त कर लिया। कामरूपेश्वप नाम के राजा भगवान शिव के भक्त थे।PC:Udaykumar PR

राजा ने भीम को बनाया बंदी
एक दिन भीम ने राजा को शिवलिंग की पूजा करते हुए देख लिया। भीम ने राजा को भगवान की पूजा छोड़ उसकी पूजा करने को कहा। राजा के बात न मानने पर भीम ने उन्हें बंदी बना लिया। राजा ने कारागार में ही शिवलिंग बना कर उनकी पूजा करने लगा। जब भीम ने यह देखा तो उसने अपनी तलवार से राजा के बनाए शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया।
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जब खुद भगवान ने दिए भीम को दर्शन
ऐसा करने पर शिवलिंग में से स्वयं भगवान शिव प्रकट हो गए। भगवान शिव और भीम के बीच घोर युद्ध हुआ, जिसमें भीम की मृत्यु हो गई। फिर देवताओं ने भगवान शिव से हमेशा के लिए उसी स्थान पर रहने की प्रार्थना की।देवताओं के कहने पर शिव लिंग के रूप में उसी स्थान पर स्थापित हो गए। इस स्थान पर भीम से युद्ध करने की वजह से इस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमशंकर पड़ गया
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मंदिर की वास्तुकला
भीमशंकर मंदिर बहुत ही प्राचीन है, लेकिन यहां के कुछ भाग का निर्माण नया भी है। इस मंदिर के शिखर का निर्माण कई प्रकार के पत्थरों से किया गया है। यह मंदिर मुख्यतः नागर शैली में बना हुआ है। मंदिर में कहीं-कहीं इंडो-आर्यन शैली भी देखी जा सकती है।PC: Udaykumar PR

पूजा का समय
मंदिर में प्रतिदिन तीन बार ज्योतिर्लिंग की पूजा होती है।महाशिवरात्री यहां मनाया जाने वाला सवसे बड़ा उत्सव है उस दौरान यहां दूर देश के भक्तगण शिव ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं।
मंदिर खुलने का समय-सुबह- 4:30 बजे
आरती- सुबह 5 बजे
ज्योतिर्लिंग के दर्शन- सुबह 5 से 5:30 बजे तक।
सामन्य दर्शन- सुबह 5:30 से दोपहर 2:30 बजे तक।
आरती 3 बजे 3:30 बजे शाम।
आरती- शाम 7:30 से रात 8 बजे तक।PC: INDU

देवी पार्वती का मंदिर
भीमशंकर मंदिर से पहले ही शिखर पर देवी पार्वती का एक मंदिर है। इसे कमलजा मंदिर कहा जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर देवी ने राक्षस त्रिपुरासुर से युद्ध में भगवान शिव की सहायता की थी। युद्ध के बाद भगवान ब्रह्मा ने देवी पार्वती की कमलों से पूजा की थी।
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कुंड
यहां के मुख्य मंदिर के पास मोक्ष कुंड, सर्वतीर्थ कुंड, ज्ञान कुंड, और कुषारण्य कुंड भी स्थित है। इनमें से मोक्ष नामक कुंड को महर्षि कौशिक से जुड़ा हुआ माना जाता है और कुशारण्य कुंड से भीम नदी का उद्गम माना जाता है।PC:Udaykumar PR

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के आस-पास घूमने के स्थान
हनुमान तालाब- भीमशंकर मंदिर से कुछ दूरी पर हनुमान तालाब नामक स्थान है।

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के आस-पास घूमने के स्थान
गुप्त भीमशंकर- भीमशंकर मंदिर से कुछ दूरी पर गुप्त भीमशंकर स्थित है।

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के आस-पास घूमने के स्थान
कमलजा देवी- भीमशंकर मंदिर से पहले देवी पार्वती का कमलजा नामक एक मंदिर है।PC:Udaykumar PR

कब जाएं
भीमशंकर ज्योतिर्लिंग जाने के लिए साल का कोई भी समय चुना जा सकता है। महाशिवरात्रि के समय यहां पर विशेष मेला लगता है।
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कहां रुके
यहां श्रद्धालुओं के लिए रुकने के लिए हर तरह की व्यवस्था की गई है। भीमशंकर से कुछ ही दूरी पर शिनोली और घोड़गांव है जहां आपको हर तरह की सुविधा मिलेगी। PC: wikimedia.org

कैसे पहुंचें
आप यहां सड़क और रेल मार्ग के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। पुणे से एमआरटीसी की सरकारी बसें रोजाना सुबह 5 बजे से शाम 4 बजे तक चलती हैं, जिसे पकड़कर आप आसानी से भीमशंकर मंदिर तक पहुंच सकते हैं।महाशिवरात्रि या प्रत्येक माह में आने वाली शिवरात्रि को यहां पहुंचने के लिए विशेष बसों का प्रबन्ध भी किया जाता है।
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