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एक टूरिस्ट या ट्रैवलर के लिए है क्या ख़ास है 2000 से भी ज्यादा मंदिरें वाले भुवनेश्वर में

Written By: Staff

भारत में कुछ ही जगहें ऐसी हैं, जो अपनी संस्कृति और विरासत के मामले में अद्वितीय हैं। ओडिशा राज्य भी उन्हीं में से एक है।अपनी समृद्ध परंपरा एवं अपार प्राकृतिक संपदा से युक्त ओडिशा को प्यार में 'भारत की आत्मा' कहा जाता है। यूं तो यहां घूमने के लिए बहुत कुछ है, मगर आज इस लेख में हम आपको ओडिशा के जिस डेस्टिनेशन से अवगत करा रहे हैं उसे मंदिरों से भरा शहर कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं भुवनेश्वर की। भारत के पूर्वी हिस्से में बसा भुवनेश्वर ओडिशा की राजधानी है।

यह शहर महानदी के किनारे पर स्थित है और यहां कलिंगा के समय की कई भव्य इमारतें हैं। यह प्रचीन शहर अपने दामन में 3000 साल का समृद्ध इतिहास समेटे हुआ है। कहा जाता है कि एक समय भुवनेश्वर में 2000 से भी ज्यादा मंदिरें थीं। भुवनेश्वर पर्यटन के तहत आप प्रचीन समय में ओडिशा में मंदिर निर्माण की कला की झलक देख सकते हैं। भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क आपस में मिलकर स्वर्ण त्रिभुज का निर्माण करते हैं।

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बात अगर भुवनेश्वर और आसपास के पर्यटन स्थलों कि हो तो भुवनेश्वर में ऐसे ढेरों पर्यटन स्थल हैं जो पर्यटकों को बांधे रखते हैं। ओडिशा के सबसे बड़े शहर भुवनेश्वर में मंदिर, झील, गुफा, म्यूजियम, पार्क और बांध का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। लिंगराज मंदिर, मुक्तेश्वर मंदिर, राजारानी मंदिर, इस्कोन मंदिर, राम मंदिर, शिरडी साई बाबा मंदिर, हीरापुर स्थित योगिनी मंदिर और विशाल संख्या में यहां के अन्य मंदिर ओडिशा मंदिर वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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तो आइये इस आर्टिकल के जरिये जरा गहराई से जानें कि ऐसा क्या है जो आपको अपनी भुवनेश्वर की यात्रा पर अवश्य करना चाहिए।

राजारानी मंदिर

राजारानी मंदिर

राजारानी मंदिर प्रचीन समय की उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का बेहतरीन उदाहरण है। लिंगराज मंदिर के उत्तर-पूर्व में स्थित इस मंदिर को 11वीं शताब्दी के मध्य में बनवाया गया था। यह भुवनेश्वर के सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले मंदिरों में से एक है। रोचक बात यह है कि मंदिर के गर्भ-गृह में कोई प्रतिमा नहीं है। पहले हिंदू मंदिर को प्रेम मंदिर माना जाता था, शायद इसी लिए यहां कोई प्रतिमा नहीं हैं। मंदिर के दीवार पर स्त्री और पुरुषों की कुछ कामोत्तेजक नक्काशी की गई है। निर्माण में पीले बलुआ पत्थर के इस्तेमाल के कारण इस मंदिर का नाम राजारानी पड़ा।

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धौली गिरि

धौली गिरि

धौली गिरि पर्यटकों के बीच काफी चर्चित है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां चट्टान का एक राजाज्ञा है, जिसे मौर्य वंश के शासक अशोक ने बनवाया था। इस राजाज्ञा को तीसरी शताब्दी में लगाया गया था। सबसे खास बात यह है कि यह आज भी ज्यों की त्यों है। इतिहासप्रेमियों के लिए धौला गिरि एक आदर्श स्थान है। इस सुंदर स्थान का वातावरण भी काफी खुशनुमा है। इस जगह पर आराम फरमाते हुए आप घंटों बिता सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि धौली पहाड़ियों में कलिंगा की लड़ाई भी लड़ी गई थी।

लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर है। कई कारणों से मंदिर का विशेष महत्व है। यह शहर का सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और इसे 10वीं या 11वीं शताब्दी में बनवाया गया था। यह मंदिर भगवना शिव के एक रूप हरिहारा को समर्पित है और शहर का एक प्रमुख लैंडमार्क है। इसकी वास्तुशिल्पीय बनावट भी बेहद उत्कृष्ट है और यह भारत के कुछ बेहतरीन गिने चुने हिंदू मंदिर में एक है। इस मंदिर की ऊंचाई 55 मीटर है और पूरे मंदिर में बेहद उत्कृष्ट नक्काशी की गई है। लिंगराज मंदिर कुछ कठोर परंपराओं का अनुसरण करता है और गैर-हिंदू को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है।

नंदनकानन जू

नंदनकानन जू

400 हेक्टियर में फैला नंदनकानन जू के साथ-साथ बॉटनिकल गार्डन भी है। इसे 1979 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया था। यह भुवनेश्वर के सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में एक है। अगर आप बच्चों के साथ भुवनेश्वर घूमने जा रहे हैं तो फिर आपको यह जू अवश्य जाना चाहिए। कंजिया झील और चंदका-दंपारा वन्यजीव अभ्यारण्य के हरे-भरे जंगलों के बीच बीच स्थित नंदनकानन जू की प्राकृतिक सुंदरता बेजोड़ है। यहां विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर और कुछ दुर्लभ पेड़-पौधों देखे जा सकते हैं। यहां करीब 126 प्रजाति के जानवर रहते हैं, जिनका अच्छे से ध्यान रखा जाता है।

 उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं

उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं

उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं भुवनेश्वर के प्रमुख आकर्षण हैं। भुवनेश्वर से 8 किमी दूर स्थित इन दो पहाड़ियों का वातावरण काफी निर्मल है। उदयगिरि और खंडगिरि में कभी प्रसिद्ध जैन मठ हुआ करते थे। इन मठों को पहाड़ी की चोटी पर चट्टानों को काट कर बनाए गए कक्ष में चलाया जाता था। इन्हीं कक्षों को आज आप गुफा के रूप में देख सकते हैं। ये मठ काफी प्रचीन थे और इसका निर्माण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में किया गया था। इन में से कुछ गुफाओं में नक्काशी भी की गई है। यहां एक दो तल्ला गुफा भी है जिसे रानी गुंफा के नाम से जाना जाता है।

मुक्‍तेश्‍वर मन्दिर

मुक्‍तेश्‍वर मन्दिर

मुक्‍तेश्‍वर मन्दिर भुवनेश्वर के ख़ुर्द ज़िले में स्थित है। मुक्‍तेश्‍वर मन्दिर दो मन्दिरों का समूह है: परमेश्‍वर मन्दिर तथा मुक्‍तेश्‍वर मन्दिर। मुक्तेश्वर मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है और यह मन्दिर एक छोटी पहाड़ी पर बना हुआ है इस मन्दिर तक पहुंचने के लिए लगभग 100 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यहाँ भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, हनुमान और नंदी जी भी विराजमान हैं। मन्दिर के बाहर लंगूरों का जमावड़ा लगा रहता है।

चंदका वन्यजीव अभ्यारण्य

चंदका वन्यजीव अभ्यारण्य

करीब 176 वर्ग किमी में फैला चंदका वन्यजीव अभ्यारण्य भुवनेश्वर से उत्तर-पश्चिम में स्थित है। पेड़-पौधे और जीव जंतुओं से भरे इस अभ्यारण्य को दिसंबर 1982 में हाथी रिजर्व के तौर पर बनाया गया था। यहां आपको कई दुर्लभ पेड़ भी देखने को मिल जाएंगे। अगर जानवरों की बात करें तो हाथी यहां का सबसे प्रसिद्ध जानवर है।

शिशुपालगढ़

शिशुपालगढ़

बताया जाता है कि ये स्थान 2500 साल पुरानी जगह है। ये स्थान उनके लिए है जिनको इतिहास में रूचि और वास्तु को समझने का ज्ञान हो। साथ ही ये स्थान फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हमारा सुझाव है कि यदि आप भुवनेश्वर में हों तो इस खूबसूरत स्थान की यात्रा करना न भूलें।

शॉपिंग

शॉपिंग

भुवनेश्वर में शॉपिंग करना काफी मजेदार होता है। अगर इसे खरीदारों का स्वर्ग कहा जाए तो गलत नहीं होगा। चाहे आपको निशानियां खरीदनी हो या फिर सजावट के लिए सामना, भुवनेश्वर में आपको तमाम चीजें मिल जाएंगी। ओडिशा के स्थानीय हस्तशिल्प की यहां विस्तृत श्रृंखला देखने को मिलती है। इनमें शिल्पकारिता का बेहतरीन नमूना देखने को मिलता है। अगर आप ने भुवनेश्वर में नीचे बताई गई चीजें नहीं खरीदी तो आपकी शॉपिंग अधूरी ही मानी जाएगी।

कैसे जाएं भुवनेश्वर

कैसे जाएं भुवनेश्वर

फ्लाइट द्वारा - शहर में स्थित बीजू पटनायक एयरपोर्ट के जरिए भुवनेश्वर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह एयरपोर्ट भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। शहर से यह एयरपोर्ट 4 किमी दूर है। शहर पहुंचने के लिए आप एयरपोर्ट से टैक्सी का सहारा ले सकते हैं।

रेल द्वारा - भारत के प्रमुख शहरों से भुवनेश्वर सुपरफास्ट ट्रेनों से जुड़ा हुआ है। रेल्वे स्टेशन शहर के बीचों बीच स्थित है।

सड़क मार्ग द्वारा - ओडिशा और आसपास के शहरों से भुवनेश्वर सड़क मार्ग के जरिए अच्छे से जुड़ा है। ओडिशा के दूसरे जगह जैसे कोणार्क और पुरी के लिए हर 10-15 मिनट में बसें चलती हैं। भुवनेश्वर से कोलकाता जैसी लंबी दूरी की यात्रा के लिए वोल्वो जैसी लक्जरी बसें भी उपलब्ध है।

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