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19 अगस्त को क्यों बदली गयी ओडिशा की राजधानी? भुवनेश्वर से पहले कहां थी राजधानी

अगर इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए तो 19 अगस्त का दिन काफी महत्वपूर्ण नजर आएगा। दरअसल, 19 अगस्त ही वह दिन है जब ओडिशा अपनी राजधानी (भुवनेश्वर) का स्थापना दिवस मनाता है। जी हां, राजधानी का स्थापना दिवस यानी वह दिन जब भुवनेश्वर को ओडिशा की राजधानी घोषित की गयी।

Odisha Assembly

भुवनेश्वर से पहले (स्वतंत्रता से भी पहले) कटक ओडिशा की राजधानी हुआ करती थी। लेकिन कटक, जो आज भी ओडिशा का व्यापारिक केंद्र है, से हटाकर क्यों भुवनेश्वर को ओडिशा की राजधानी बनायी गयी। भुवनेश्वर कब बनी ओडिशा की राजधानी? भुवनेश्वर में ऐसा क्या खास था, जिसकी वजह से कटक के बजाए इसे बतौर राजधानी चुना गया? इस आर्टिकल में हम इन्हीं सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे।

क्यों स्थानांतरित हुई राजधानी

bhubaneshawar

भुवनेश्वर से पहले ओडिशा की राजधानी कटक हुआ करती थी। लेकिन जैसा हर राज्य की राजधानी के साथ होता है, दूसरे शहरों के मुकाबले कटक की जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। समय के साथ बतौर राजधानी कटक को विकसित करने की आवश्यकता भी महसूस होने लगी। लेकिन नदियों से घिरे कटक शहर में विकास की संभावनाएं काफी कम दिखायी दे रही थी। इसके बाद ही राजधानी को कटक से स्थानांतरित कर किसी दूसरे शहर में लाने के बारे में सोच-विचार किया जाने लगा।

भुवनेश्वर को राजधानी बनाने का हुआ विरोध

काफी सोच-विचार, भौगोलिक संरचनाओं और भविष्य में विस्तार के आसारों को ध्यान में रखते हुए भुवनेश्वर को राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया। लेकिन इस बात का राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध भी होने लगा। राजधानी बनने की दौड़ में भुवनेश्वर के साथ दो और जगहें भी थी, जिनमें गंजाम जिला का छत्रपुर और अनुगुल जिला शामिल था।

lingraj temple

दूसरे विश्व युद्ध के समय बनायी गयी एक कमेटी ने कटक के स्थान पर भुवनेश्वर को राजधानी बनाने पर अपनी सहमति दे दी। ओडिशा (तत्कालिन उड़िसा) विधानसभा में 30 सितंबर 1946 को प्रस्ताव पारित कर भुवनेश्वर को नयी राजधानी बनाने पर मुहर लगा दी गयी। इस निर्णय में तत्कालिन मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। उन्होंने इन जगहों के स्थान पर भुवनेश्वर को अधिक तर्कसंगत बताया।

भुवनेश्वर में क्या थी खासियत

Bhubaneshwar Airport

भुवनेश्वर को ओडिशा की नयी राजधानी बनाने में यहां की भौगोलिक संरचना, ऐतिहासिक महत्व और भविष्य में विस्तार की संभावनाओं में महत्वपूर्ण किरदार अदा की। इस शहर के आसपास काफी पथरीली जमीन और मांकड़ा पत्थरों की उपलब्धता थी, जिससे यहां नये भवनों का निर्माण काफी आसान था। बंजर जमीन अधिक होने के कारण जमीन अधिग्रहण में कोई समस्या नहीं होने वाली थी। इसके साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकन फौज द्वारा यहां भवन और एयरपोर्ट का निर्माण किया गया था, जिसके भविष्य में विस्तार की संभावनाएं भी ज्यादा थी।

भुवनेश्वर कब बनी राजधानी

भुवनेश्वर के पक्ष में सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आखिरकार 13 अप्रैल 1948 को भुवनेश्वर को नयी राजधानी के तौर पर राज्य में पहचान मिली। उसी दिन देश के तत्कालिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने इसकी आधारशिला रखी। जब भुवनेश्वर को राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया तो प्रसिद्ध वास्तुकार ओट्टो कोजिनबर्गर को टाउनप्लान बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। पूरी तरह से नये रंग रुप में तैयार हो जाने के बाद 19 अगस्त 1949 को कटक से पूर्ण रूप से नयी राजधानी भुवनेश्वर में स्थानांतरित हो गयी।

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