मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलीपुत्र जो आज बिहार राज्य की राजधानी पटना कहलाता है। समय के साथ-साथ पटना भी विकसित हो चुका है। आधुनिक पटना को दर्शाता यहां गंगा किनारे मौजूद मरीन ड्राईव और बिहार की संस्कृति को दर्शाता सभ्यता द्वार है। वहीं दूसरी तरफ बिहार के इतिहास को दर्शाता गोलघर और गुरुद्वारा पटना साहिब भी मौजूद है।
अपने पटना दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गुरुद्वारा में रोटियां बेली, रसोई में लंगर पकाया और सच्चे दिल से लंगर परोसा भी। इस दौरान पीएम मोदी ने सिख धर्म को मानने वालों की तरह ही पगड़ी पहन कर सेवा की और दरबार साहिब में माथा टेक कर आर्शिवाद लिया।
क्या आप जानते हैं, गुरुद्वारा पटना साहिब सिख धर्म के 10वें और आखिरी गुरु - गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म स्थान है? गुरुद्वारा पटना साहिब को श्री हरिमंदिर जी साहिब के नाम से भी जाना जाता है। आइए इस गुरुद्वारा की वास्तुकला और इतिहास के बारे में आपको बताते हैं।
गुरु गोविंद सिंह का हुआ जन्म
सिख धर्म के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना में सिखों के 9वें गुरु श्री तेग बहादुर और माता गुजरी के घर हुआ। जिस घर में उनका जन्म हुआ, वहीं पर तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब को बनाया गया। गुरु गोविंद सिंह जी का बचपन पटना में ही बीता था। पटना में ही उन्होंने धार्मिक शिक्षा, धनुष-बाण, घुड़सवारी और तलवारबाजी करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पटना में गंगा नदी के किनारे जहां तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब मौजूद है, किसी समय उसे पटना साहिब कहा जाता था। पहले इस जगह को कूचा फारुख खान भी कहा जाता था। 18वीं सदी में सिख श्रद्धालुओं ने पटना साहिब में इस इमारत का निर्माण करवाया जिसे तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब कहा जाता है। बता दें, यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तख्त है। यहां सिर्फ सिख धर्म ही नहीं बल्कि संगमरमर से बनी इस इमारत में सिख धर्म के अलावा अन्य सभी धर्मों को मानने वाले लोग भी आते रहते हैं।

75 साल पहले 20 लाख की लागत से बनी थी
जानकारी के अनुसार पटना के तख्त श्री हरिमंदिर साहिब की 5 मंजिला इमारत की नींव 10 नवंबर 1948 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन रखी गयी थी। इस इमारत को तैयार होने में करीब 10 सालों का समय लग गया था। 1957 को सिख धर्म के 10वें गुरु के प्रकाश पर्व के दिन यह काम खत्म हुआ था। इस 5 मंजिला इमारत में गुरुद्वारे के गुंबद की जमीन से ऊंचाई 108 फीट है।
बताया जाता है कि 5 मंजिला इस इमारत को बनाने में उस वक्त लागत करीब 20 लाख रुपए आयी थी। गुरुद्वारा पटना साहिब के परिसर में दो निशान साहिब दिखेंगे। बताया जाता है कि इनमें से एक निशान साहिब का निर्माण 17 साल पहले किया गया था।

इमारत की हर मंजिल है खास
तख्त श्री हरमंदिर साहिब एक 5 मंजिला इमारत है, जिसके नीचे तहखाना है। इमारत की हर मंजिल बहुत खास है -
पहली मंजिल - जन्मस्थान (सुबह 3 से 9 बजे धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होता है)
दूसरी मंजिल - अखंड पाठ
तीसरी मंजिल - अमृतपान
चौथी मंजिल - पुरातन हस्तलिपि

कैसे पहुंचे गुरुद्वारा पटना साहिब
- विमान द्वारा - सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पटना का जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। पटना एयरपोर्ट से बस, टैक्सी या फिर ऑटो के माध्यम से आप गुरुद्वारा पहुंच सकते हैं।
- ट्रेन द्वारा - पटना रेलवे स्टेशन से गुरुद्वारा पटना साहिब करीब 10-12 किमी की दूरी पर मौजूद है। स्टेशन से भी आपको टैक्सी, ऑटो या परिवहन के सार्वजनिक वाहन मिल जाएंगे।
- सड़क द्वारा - पटना साहिब शहर के बीचों बीच स्थित है। पटना साहिब गुरुद्वारा तक पहुंचने के लिए आप स्थानीय लोगों की मदद अथवा परिवार-दोस्तों की मदद तो ले ही सकते हैं। इसके अलावा पटना में गूगल मैप या जीपीएस सेवा भी अच्छी तरह से काम करती है। आप इनकी मदद भी ले सकते हैं।



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