'नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की', आज देश समेत दुनिया भर के मंदिरों और घरों में यहीं गूंज रहा है। हो भी क्यों न...आज नटखट बालगोपाल श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जो है। इसकी क्रम में बिहार की राजधानी पटना के विशाल इस्कॉन मंदिर में भी खास तैयारियां की गयी हैं। पटना का भव्य इस्कॉन मंदिर लगभग 2 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है।
इस मंदिर को श्रीराधा बांके बिहारी जी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन किसी भी और इस्कॉन मंदिर की तुलना में पटना का इस्कॉन मंदिर काफी खास और अलग है। क्या आप जानते हैं, पटना के इस्कॉन मंदिर का आधार जीवन की 84 योनियां हैं!
आइए आपको इस्कॉन मंदिर, पटना की खासियतों से रू-ब-रू करवाते हैं :
ताजमहल से है इस मंदिर का रिश्ता
पटना के बुद्धामार्ग पर लगभग ₹100 करोड़ की लागत से भव्य और विशाल इस्कॉन मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर का उद्घाटन मई 2022 को आधिकारिक रूप से किया गया लेकिन इसकी नींव 1984 में ही रखी गयी थी। दूसरे इस्कॉन मंदिरों की शैली में ही इस मंदिर का भी निर्माण किया गया है। क्या आप जानते हैं, पटना के इस्कॉन मंदिर का आगरा के ताजमहल से एक खास रिश्ता है!
जी हां, पटना के इस्कॉन मंदिर में उन्हीं मकराना संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है, जिनसे आगरा का ताजमहल बना है। सिर्फ इतना ही नहीं, पटना के इस्कॉन मंदिर का निर्माण उन्हीं मजदूरों ने किया है जिनके पूर्वजों ने कभी मुगल बादशाह शाहजहां के कहने पर ताजमहल का निर्माण किया था। है न बड़ी हैरत की बात।
84 योनियां हैं इसका आधार
इस्कॉन मंदिर, पटना के निर्माण का आधार जीवन की 84 योनियां हैं, ठीक उसी तरह जैसे गुजरात के द्वारकाधिश मंदिर का है। पटना का इस्कॉन मंदिर 84 खंभों पर टिका हुआ है, जो जीवन की उन 84 योनियों का प्रतीक है जिनसे गुजरकर ही मनुष्य जीवन प्राप्त होता है।
कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन 84 खंभों की परिक्रमा कर लेता है, यानी 2 एकड़ में फैले पूरे इस्कॉन मंदिर की परिक्रमा कर लेता है, उसे योनियों के इस चक्कर से मुक्ति मिल जाती है। इस मंदिर में मौजूद कमरों की संख्या भी 84 है। मंदिर का डिजाइन पीयूष वी सोमपुरा ने तैयार किया है। दावा किया जाता है कि मथुरा और गुजरात के बाद यह देश का तीसरा मंदिर है, जिसमें इस 84 योनि की पद्धति का इस्तेमाल किया गया है।
क्या-क्या है इस मंदिर की विशेषताएं
- पटना का इस्कॉन मंदिर 108 फीट ऊंचा है।
- मंदिर कुल 84 खंभों पर टिका हुआ है।
- इस मंदिर की लंबाई और चौड़ाई भी 84 फीट ही है।
- यह मंदिर कई तल का है, जिसका पहला तल प्रसादम हॉल है। इस हॉल में एक बार में 1000 से अधिक लोग बैठ सकते हैं।
- दूसरे तल में तीन दरबार हैं, जिसमें राम, कृष्ण और चैतन्य महाप्रभु का दरबार है।
- मंदिर के गर्भगृह में एक बार में लगभग 5000 लोग बैठकर बांके बिहारी और श्री राधा के दर्शन व पूजा कर सकते हैं।
- मंदिर परिसर में ही मॉडर्न किचन की व्यवस्था है, जहां शुद्ध शाकाहारी व्यंजन पकाए जाते हैं।
- मंदिर के गोविंदा रेस्तरां में 56 प्रकार के शाकाहारी व्यंजन मिलते हैं, जिन्हें कोई भी भक्त प्राप्त कर सकता है।

जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन
जन्माष्टमी के दिन इस्कॉन मंदिर, पटना में सुबह 7.30 बजे से लेकर मध्य रात्रि को 1 बजे तक भक्तों के लिए दिव्य कीर्तन और भव्य आरती का आयोजन किया गया है। मंदिर में रात को 12 बजे चांदी के 151 कलशों से भगवान का महाभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही महाप्रसाद का भी वितरण किया जाएगा। 26 अगस्त (सोमवार) को शाम 7.15 बजे जन्माष्टमी महामहोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
वृंदावन की थीम पर इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी की पूजा की जाएगी। मंदिर को सजाने के लिए फूल थाईलैंड और बैंकॉक से मंगवाये गये हैं। इसके अलावा मंदिर में फूलों के काफी स्टॉल भी लगाए गये हैं जिसमें अलग-अलग राज्यों से काफी मात्रा में फूल मंगाए गये हैं ताकि भक्तों के लिए फूलों की कमी नहीं हो।



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