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चेन्नई में खुला सिंगापेरुमल कोईल फ्लाईओवर का एक हिस्सा, क्या मिलेगी इससे सुविधा?

निर्माण के 16 सालों का बाद आखिरकार चेन्नई के सिंगापेरुमल कोईल (Singaperumal Koil) के रेलवे फ्लाईओवर को खोल दिया गया है। यह फ्लाईओवर चेंगलपट्टु में मौजूद है। हालांकि इस फ्लाईओवर को अभी पूरी तरह से नहीं खोला गया है, बल्कि फ्लाईओवर के एक हिस्से को ही अभी आम नागरिकों के लिए खोला गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस फ्लाईओवर के खुलने से चेन्नई के प्रमुख जंक्शन, जहां ग्रैंड साउदर्न ट्रंक (GST) रोड सिंगापेरुमल कोईल-श्रीपेरुम्बुदुर राज्य हाईवे से जुड़ता है, वहां ट्रैफिक जाम की परेशानी काफी ह तक कम हो जाएगी।

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Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह फ्लाईओवर श्रीपेरुम्बुदुर की ओर जाने वाले वाहनों को रेलवे लेवल क्रॉसिंग को बाईपास कर आगे बढ़ने की सुविधा देता है, जो लंबे समय से बॉटलनेक की तरह ट्रैफिक जाम की वजह बन गया था। ओरागंदम-श्रीपेरुम्बुदुर को GST रोड से जोड़ने वाला यह दो लेन का हाईवे प्रमुख ऑटोमोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों, विद्यार्थियों और दैनिक मजदूरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

अब तक GST रोड से बाएं मुड़कर आम तौर पर वाहनों को रेलवे गेट नंबर 47 से होकर गुजरना पड़ता था, दिन भर के दौरान कम से कम 20 से भी ज्यादा बार बंद होता है। बताया जाता है कि इस वजह से कभी-कभी गेट बंद होने के बाद कई बार 2 किमी से भी अधिक लंबा ट्रैफिक जाम भी लग जाता है। ट्रैफिक का अधिक बहाव होने की वजह से चेन्नई को चेंगलपट्टी से जोड़ने वाले GST रोड को पहले ही 8 लेन वाले कॉरिडोर में बदला जा चुका है।

हालांकि पिक आवर के दौरान श्रीपेरुम्बुदुर की ओर जाने वाले वाहन अधिकांश समय चेंगलपेट-ताम्ब्रम (चेन्नई की ओर जाने वाले) वाले लेन में फंस जाते है, जो बाएं मुड़कर राज्य हाईवे की ओर जाने की कोशिश करते हैं। यह हालत तब और भी खराब हो जाती है, जब हजारों बस, प्रवासी मजदूर, शैक्षणिक संस्थान और आईटी पार्क में काम करने वाले लोगों की गाड़ियां GST रोड के दो लेन को जाम कर देते हैं।

बताया जाता है कि इस वजह से न सिर्फ लोगों को आने-जाने में बल्कि मराईमलाई नगर, सिंगापेरुमल कोईल और चेंगलपेट के विभिन्न अस्पतालों में आने वाले गंभीर रूप से बीमार रोगियों के एंबुलेंस को भी आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। रेलवे क्रॉसिंग पर गाड़ियों को करने वाले लंबे इंतजार को कम करने के लिए ही हाईवे विभाग ने सबसे पहले साल 2006 में रेलवे ओवरब्रिज की घोषणा की थी। लेकिन साल 2014 में इसका निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से क्लीयरेंस न मिलने की वजह से रोक देना पड़ा था।

इसके बाद यह परियोजना फिर से तब जीवित हुई जब चेन्नई पेरिफेरल रोड (महाबलीपुरम-एन्नोर पोर्ट कॉरिडोर) की घोषणा की गयी। आखिरकार ₹138.27 करोड़ की लागत से इस परियोजना को मंजूरी मिल गयी। हाल ही में तमिलनाडु के हाईवे मंत्री ई.वी. वेलु ने इस फ्लाईओवर के उस हिस्से का उद्घाटन किया, जो रेलवे गेट को बिना पार किये ही (ऊपर से) गाड़ियों को आने-जाने की सुविधा प्रदान करेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस फ्लाईओवर का दूसरा हिस्सा जो चेन्नई से सिंगापेरुमल कोईल और चेंगलपेट की ओर जाता है, उसका निर्माण करीब 60% पूरा हो चुका है। संभावना जतायी जा रही है कि अगले साल तक फ्लाईओवर के उस हिस्से को भी खोल दिया जाएगा।

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