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रहस्यमयी सुरंगों वाली बावड़ी, जहां छुपा है अरबों का खजाना

अब तक आपने राजस्थान और मध्यप्रदेश की अद्भुत बावड़ियों के बारे में ही सुना होगा, लेकिन आज हम आपको भारत के हरियाणा राज्य की एक ऐसी रहस्यमयी बावड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आज भी अरबों-खरबों का खजाना गढ़े होने की बात कही जाती है। रोहतक के पास (महम) मौजूद इस बावड़ी का नाम है 'चोरों की बावड़ी'। इसके अलावा इसे 'स्वर्ग का झरना' भी कहा जाता है।

इस बावड़ी का निर्माण मुगल काल के दौरान हुआ था, जिससे कई रहस्यमय किस्से जुड़े हैं। रहस्य की पड़ताल में हमारे साथ जानिए इस बावड़ी से जुड़ी ढ़ेर सारी दिलचस्प बातें।

रहस्यमयी सुरंगों का जाल

रहस्यमयी सुरंगों का जाल

मुगल काल के दौरान बनी यह बावड़ी सुरंगों के जाल के लिए भी जानी जाती है। माना जाता है यहां से शुरू होती कई रहस्यमयी सुरंगे दिल्ली, हिसार और लाहौर तक जाती हैं। लेकिन इस बात का कोई सटीक प्रमाण आज तक हाथ नहीं लग सका है। बावड़ी से प्राप्त अभिलेखों से पता चलता है कि इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां के सूबेदार सैद्यू कलाल ने करवाया था।

इस बावड़ी में एक कुआं है, जहां तक पहुंचने के लिए 101 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। इसके साथ ही इस बावड़ी में कई कमरे भी हैं जिनका निर्माण शायद राहगीरों के आराम के लिए करवाया गया था। लेकिन अब यह कुंआ किसी काम का नहीं। यहां का पानी अब काला पड़ चुका है।

 अरबों-खरबों का खजाना

अरबों-खरबों का खजाना

इस रहस्यमयी बावड़ी से एक शातिर चोर की दिलचस्प कहानी जुड़ी है। कहा जाता है इस इलाके में कभी कोई ज्ञानी नाम का एक चोर रहा करता था। जो अमीरों से लूटा हुआ धन इसी बावड़ी में छुपाकर रखता चोरी करने के बाद वो चोर इसी बावड़ी में छलांग लगाकर गायब हो जाता था।

जानकारों के मुताबिक आज भी ज्ञानी चोर का अरबों का धन इसी बावड़ी में गढ़ा है। लेकिन जो भी इस गुप्त खजाने की खोज में बावड़ी में गया वो खुद एक रहस्य बनकर रह गया। हालांकि इतिहासकार इस कहानी को सच नहीं मानते, इसलिए इतिहास के किसी भी पन्नों में ज्ञानी चोर का जिक्र नहीं मिलता।

गायब हो गई थी पूरी बारात

गायब हो गई थी पूरी बारात

ज्ञानी चोर की वजह से मशहूर यह बावड़ी जितनी जमीन से ऊपर दिखती थी उससे कहीं ज्यादा जमीन के नीचे तक बनी हुई है। जिसमें एक गहरा कुंआ भी था। जानकारों की मानें तो बावड़ी की गुफा से होते हुए एक बारात दिल्ली जाना चाहती थी। लेकिन बाराती सुरंग में तो उतरे मगर दिल्ली नहीं पहुंच पाए। उन बारातियों का आज तक कुछ पता नहीं चल सका। यह सारा मामला भारत में अंग्रेजों के समय का है।

कहा जाता है कि बारात गायब होने की अजीबोगरीब घटना के बाद अंग्रेजों ने उस गुफा को बंद करवा दिया था। जिसके बाद वो गुफा आजतक खोली नहीं गई।

 हो चुकी है बर्बाद

हो चुकी है बर्बाद

सरकार की अनदेखी के कारण अब यह ऐतिहासिक विरासत बदतर हालत में है। यहां का पानी अब मटमैला हो चुका है। यहां की सीढ़ियों पर अब चमगादड़ों का कब्जा है। बावड़ी जगह-जगह से टूट चुकी है। यहां बनाए गए बुर्ज व मंडेर गिर चुके हैं।

सोचने वाली बाता है कि भारतीय पुरातात्विक विभाग के अंतर्गत होने के बावजूद भी बावड़ी खस्ताहाल में दिन बसर कर रही है। जिसकी देखभाग न के बराबर है।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

चोरो की यह बावड़ी भारत के हरियाणा राज्य के रोहतक जिले के पास महम में स्थित है। जहां तक आप सड़क/रेल/हवाई मार्गों के द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन 'रोहतक जंक्शन' है। हवाई मार्ग के लिए आप दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का सहारा ले सकते हैं। आप चाहें तो सड़क मार्ग के द्वारा भी यहां तक का सफर तय कर सकते हैं। दिल्ली से रोहतक के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

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