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जरा बचकें! बेहद खतरनाक है गुमला के जंगलों से गुजरना

कभी सोचा नहीं था कि कोई ट्रिप इतनी भी खतरनाक साबित हो सकती है। लेकिन कहा जाता है न कि होनी को भला कौन टाल सकता है तो वही हम लोगों के साथ भी हुआ। बात कुछ दिनों पहले की है, जब हम लोगों का किसी काम से कटक (Cuttack) जाना हुआ था। वाराणसी से करीब 1000 किमी. दूर बसे कटक शहर में जाने के लिए हम लोगों ने सड़क मार्ग चुना और निकल पड़े अपनी कार से, कि चलो सफर थोड़ा रोमांचक रहेगा।

शेरघाटी का रोमांचक नजारा

शेरघाटी का रोमांचक नजारा

जैसे ही हम बिहार के औरंगाबाद जिले में प्रवेश किए तो आगे बढ़ने पर शेरघाटी नाम का एक स्थान आता है। यहां आपको रास्तों के दोनों ओर जंगल और ऊंचे पहाड़ दिखाई देंगे, जहां की हवा भी बेहद ठंडी बहती है। दिल्ली-कोलकाता हाईवे होने के नाते इस रास्ते पर लोगों की आवाजाही बराबर बनी रहती है। लेकिन फिर भी रात के समय इस रास्ते से गुजरने आप थोड़े से तो सहम जाएंगे ही और हां सबसे खास बात... इस रास्ते पर अगर कोई लिफ्ट मांगे तो बिल्कुल ना दें, क्योंकि कभी-कभी यहां लुटेरे भी होते है। जब हमने आसपास के लोगों से बात की तो उन्होंने इस बात की जानकारी दी।

गलत रास्ता और गुमला का जंगल

गलत रास्ता और गुमला का जंगल

आगे बढ़ने पर दो हाईवे थे एक कोलकाता की ओर जाता था और दूसरा रांची। ऐसे में सोचा गया कि पहुंचते-पहुंचते रात ज्यादा हो जाएगी तो कोलकाता जाना सेफ नहीं है, क्योंकि वहां के जंगली इलाकों से रात के समय जितना बचो, उतना अच्छा है। तो हमने रांची वाला मार्ग चुन लिया। रात के करीब 11 के आसपास हम रांची शहर में पहुंचें, वहां एक ढाबा पर खाना खाया और थोड़ा वही आराम करने के लिए रुक गए।

गुमला के खौफ से रात में बंद रहता है पुलिस हेडक्वॉर्टर

गुमला के खौफ से रात में बंद रहता है पुलिस हेडक्वॉर्टर

कुछ देर बाद ढाबे वाले से पूछा गया कि ये रास्ता आगे जाने के लिए सेफ है या नहीं तो उसने बोला सुबह जाईएगा। फिर एक पुलिस की गाड़ी आकर रूकी तो मैंने उनके पास जाकर पूछा कि "सर आगे का रास्ता ठीक है न...इस वक्त हम लोग जा सकते हैं न" तो पुलिस वाले ने रिप्लाई दिया कि "ज्यादा इमरजेंसी ना हो तो सुबह जाना, नहीं तो ज्यादा दिक्कत वाली बात नहीं है.. जा सकते हैं।" फिर हम लोग वही रुक गए और आराम करने लगे, उस वक्त करीब रात के 12:30 बज रहे थे। फिर अचानक से रात के 2:30 बजे नींद खुली तो लगा जैसे सुबह हो गई है और उस वक्त ना किसी ने मोबाइल देखा और ना किसी घड़ी।

बस चल दिए आगे पहुंचे तो पुलिस हेडक्वॉर्टर दिखा, जिसमें लोग तो अंदर दिखाई दिए पर उसका गेट बंद था। आगे पहुंचे तो जिलाधिकारी का कार्यालय दिखा, जहां भी कोई दिखाई नहीं दिया तो मन में थोड़ा सा अजीब लगा कि ऐसी क्या बात है कि जहां पुलिस रहनी चाहिए, वही नहीं है। पर फिर हुआ कि कोई नहीं डर के आगे जीत है और गाड़ी आगे बढ़ाया गया, उस वक्त बारिश हो रही थी।

अब शूरू हुआ खतरनाक रास्ते का खेल

अब शूरू हुआ खतरनाक रास्ते का खेल

रात के 3:00 बज चुके थे और हम लोग जंगल की ओर प्रवेश कर चुके थे। रास्ते में हम लोगों को काफी लोग दिखाई दिए, जो साइकिल के सहारे जंगल से लकड़ियां काटकर ले जा रहे थे और टॉर्च से आगे का रास्ता देख रहे थे। उस वक्त पुरानी गांव वाली जिंदगी देखकर थोड़ी अच्छी फीलिंग आई थी कि फिर कुछ 5-7 किमी. आगे जाने पर शुरू उस रास्ते का खेल, जिसके बारे में मैं आपको बताने वाला हूं... गुमला वाला खतरनाक रास्ता।

गुमला वाला रास्ता जैसे ही आया, वैसे ही बारिश काफी तेज हो गई। इस दौरान पहाड़ी पर बसे गुमला का रास्ता एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ खाई वाला दिखा और ऊपर से ये बारिश। डर था कही पहाड़ी से गाड़ी नीचे ना चली जाए, क्योंकि रास्ता भी सिर्फ 7-10 फीट ही था, वो भी बेहद खराब, एक-एक फीट तक के गड्ढे थे। लेकिन कहते है ना कि जब ऊपर वाला साथ हो तो कोई क्या बिगाड़ेगा।

शायद बारिश ने बचा लिया हमें

शायद बारिश ने बचा लिया हमें

उसी झमाझम बारिश में करीब 50-70 के बीच गाड़ी की स्पीड पर हम लोग आगे बढ़े। रास्ते में किसी के ना दिखने के चलते डर और भी बढ़ता ही जा रहा था और साथ में एक व्यक्ति थे, जिन्होंने पहले ही गुमला की कहानी सुना दी थी कि गुमला का जंगलों पर डाकूओं का कब्जा रहता है और लोगों को पकड़कर उनसे लूटपाट करते हैं और कभी-कभी तो लोगों को जान से भी मार देते हैं। अब ऐसे में भाई डरना तो बनता है। ये रास्ता करीब 50 किमी. का था, जिसने जिंदगी और मौत के बीच के अंतर को समझाया था कि जब दोनों एकसाथ हो तो कैसा लगता है।

लेकिन भगवान का नाम लेते हुए हम लोग गुमला के जंगलों को पार किए और जब हम लोग पूरी तरीके से जंगल के क्षेत्र से बाहर निकल चुके थे तो आगे का रास्ता उससे भी ज्यादा खराब था। फिर एक गांव के रास्ते को पकड़कर हम लोग आगे बढ़े और फिर सुबह के 8:30 बजे के आसपास हम लोगों ने झारखंड-उड़ीसा के बॉर्डर को क्रॉस किया और फिर जान में जान आई। इसके बाद का रास्ता काफी अच्छा था जैसे किसी नर्क से निकलकर हम लोग स्वर्ग में पहुंच गए हो। रास्ते के दोनों तरफ पहाड़ और बीच में रास्ता काफी सुंदर लग रहा था। फिर 1 बजे के आसपास हम लोग कटक (उड़ीसा) पहुंचे और चैन की सांस ली गई।

यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

सबसे खास बात तो बताना भूल ही गया। ये जो रांची से गुमला होते हुए रास्ता जंगल के बाहर निकल रहा था न कि 8 फीट चौड़ा रास्ता नेशनल हाईवे था। जी हां, मोबाइल के मैप में चेक करने पर वो रास्ता नेशनल हाईवे-43 दिख रहा था। अब ऐसे-ऐसे हाईवे रहेंगे तो कोई कही भी पहुंच सकता है। ऐसे में आप जब भी यात्रा कर रहे हो तो ज्यादा मैप के चक्कर में ना पड़े, खुद से रास्ता पता हो तो तभी आगे बढ़ें और ज्यादा जोखिम भरे रास्ते का चयन ना करें। कोशिश करें कि अगर रास्ता काफी लंबा हो तो फ्लाइट या ट्रेन ले लें।

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