सलमान खान की फिल्म 'बजरंगी भाईजान' याद है। फिल्म की कहानी एक पाकिस्तानी बच्ची मुन्नी के इर्द-गिर्द घुमती है। जो बोल नहीं पाती है। उसकी मां (मेहर विज), से कुछ लोग कहते हैं कि दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन दरगाह में ले जाकर अपनी बच्ची के साथ वह माथा टेके। उसकी दुआ जरूर कुबुल की जाएगी। और ऐसा होता भी है...

दिल्ली से वापस लौटकर जैसे ही मुन्नी पाकिस्तान पहुंचती, उसकी आवाज वापस लौट आती है। सरहद की तारों के बीच से झांकते हुए वह पहली बार सलमान खान को मामा कहकर जोर से पुकारती है। ऐसा सिर्फ फिल्मी पर्दे पर ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी होता है। हजरत निजामुद्दीन के साथ ही दिल्ली में कई और भी दरगाहें हैं, जहां दिल से मांगी गयी हर दुआ कुबुल होती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पूरे दिल्ली शहर में 100 से भी ज्यादा दरगाहें हैं। इनमें कुछ दरगाहें ऐसी हैं, जिनका काफी ज्यादा महत्व हैं।
| दरगाह का नाम | कहां है | |
| 1. | हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी | मेहरौली |
| 2. | हजरत शेख शहाबुद्दीन 'आशिक अल्लाह' | संजय वन, IIMC के विपरित |
| 3. | हजरत शेख इमादुद्दी इस्माइल फिरदौसी | अमीर खुसरो पार्क के पास, लोधी रोड |
| 4. | हजरत निजामुद्दी औलिया | निजामुद्दीन |
| 5. | हजरत अमीर खुसरो | निजामुद्दीन वेस्ट |
| 6. | हजरत शेख सलाहुद्दीन | वेस्ट सावित्री नगर, शेख सराई |
| 7. | हजरत शेख अलामा कमालुद्दीन | चिराग दिल्ली |
| 8. | हजरत शेख नसीरुद्दीन चिराग दहल्वी | चिराग दिल्ली |
| 9. | हजरत सैयद महमूद 'बहार' | किलोखरी, महारानीबाग |
| 10. | हजरत शेख जलालुद्दीन चिश्ती | ग्रेटर कैलाश |
| 11. | हजरत मौलाना शेख जमाली | मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क |
| 12. | हजरत शेख अलाउद्दीन | बावली गेट, लोधी रोड |
| 13. | हजरत ख्वाज़ा बाक़ी बिल्लानबी करीम | पहाड़गंज |
| 14. | हजरत शेख अब्दुल हक मुहधीस देहल्वी | मेहरौली |
| 15. | बीबी फातिमा साम | काका नगर |
| 16. | हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी | तुर्कमान गेट, शाहजहांबाद |
| 17. | हजरत काजी हमीदुद्दीन नागोरी | मेहरौली |
| 18. | हजरत शेख अबु बकर तुसी हैदरी (मटका पीर) | प्रगति मैदान |
| 19. | हजरत शेख नजीबुद्दी मुत्वाकिल चिश्ती | किलोखरी, महारानीबाग |
| 20. | हजरत सैयद बदरुद्दीन शाह समरकंदी | फिरोज शाह कोटला |
| 21. | हजरत शेख शमशुद्दीन अत्तादुल्लाह 'पत्ते शाह' | किलोखरी, महारानीबाग |
| 22. | हजरत शेख इमादुद्दीन इस्माइल फिरदौसी | किलोखरी, महारानीबाग |
हजरत निजामुद्दीन के दरगाह के अलावा जिन दरगाहों पर सबसे ज्यादा लोग दुआएं मांगने जाते हैं और विश्वास करते हैं कि उनकी दुआएं कुबुल भी होती हैं, वो निम्न हैं :
हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह

हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी एक लोकप्रिय संत थे। वह मोइनुद्दीन चिश्ती के पहले आध्यात्मिक उत्तराधिकारियों में से एक थे। उन्हें दिल्ली के सुल्तान और लोदी राजवंश ने सम्मानित किया था। मेहरौली में उनकी दरगाह पर आने वाले हर फरियादी को काफी सुकुन मिलता है। देखने में काफी सुन्दर लेकिन सिम्पल उनके दरगाह पर माथा टेकने के लिए काफी लोग आते रहते हैं। हर गुरुवार और शुक्रवार को यहां कव्वाली का आयोजन किया जाता है।
हजरत शेख नसीरुद्दीन चिराग दहल्वी

ये 14वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध सूफी संत थे। हजरत निजामुद्दीन औलिया के 5वें आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे हजरत शेख नसीरुद्दीन चिराग दहल्वी। उनकी मृत्यु के बाद दिल्ली में सूफी चिश्ती आदेश टूट गया था। इनका मकबरा फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था। कई बार इनके मकबरे का पूनर्निर्माण किया जा चुका है। 12 स्तंभों वाला वर्गाकार कक्षा जैसे इस मकबरे पर आज भी लोगों को भरोसा है कि यहां दुआएं जरूर कुबुल होती हैं।
हजरत शेख अबु बकर तुसी हैदरी (मटका पीर)

दिल्ली के पुराने किले के पास मौजूद है हजरत शेख अबु बकर तुसी हैदरी (मटका पीर) का दरगाह। कहा जाता है कि वह 750 साल पहले ईरान से भारत आए थे और अपनी चमत्कारी उपचार शक्ति के बल पर उन्होंने काफी संख्या में अनुयायी बना लिये थे। मटका पीर की दरगाह पर सभी धर्मों को मानने वाले लोग आते हैं। यहां आने वाले लोग पीर बाबा को भुने हुए चने, दूध और गुड़ को मिट्टी के मटके में रखकर चढ़ाते हैं। दरगाह के आसपास आपको ऐसे मटकों की भरमार दिख जाएगी।
हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी
दिल्ली के सबसे पुराने तीर्थ स्थानों में एक है तुर्कमान बयाबानी दरगाह। हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी, बयाबानी संप्रदाय से थे। कहा जाता है कि उन्हें एकांत रहना काफी पसंद था। जिस स्थान पर उनका दरगाह बना हुआ है, वहां कभी घना जंगल हुआ करता था। लेकिन जनसंख्या वृद्धि और शहरों के विकास के साथ यह जगह अब पूरी तरह से विकसित हो चुका है। लोग यहां आध्यात्मिक शांति ढूंढने के लिए आते हैं।



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