दिवाली ऐसा पर्व है जो लोगों के मन में उम्मीदों की नयी किरण जगाता है। लोग त्योहारों के उत्साह में कुछ समय के लिए अपने सारे दुःख-दर्द भूल जाते हैं। दिवाली के ठीक बाद एक ओर बिहार में स्थानीय स्तर पर लोकआस्था के महापर्व छठ पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती हैं तो दूसरी तरफ बनारस देव दीपावली की तैयारियां करने लगता हैं। इस साल की देव दीपावली में काशीवासियों को कुछ ऐसा दिखेगा जो बहुत अनोखा होगा।

इसे देखकर सिर्फ काशीवासी ही नहीं बल्कि देश-विदेश से पहुंच रहे भक्त व सैलानी भी आस्था के समुद्र में गोते लगाने लगेंगे। बनारस के बारे में अगर कहा जाए तो दिवाली की तुलना में यह और भी अधिक भव्य देव दीपावली के समय ही लगता है। गंगा के किनारों पर बने हर एक घाट को हजारों दीयों से रोशन किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार देव दीपावली के दिन देवताएं धरती पर दिवाली मनाने के लिए उतर आते हैं।
इस दिन घाटों पर जलते दीयों की परछाई जब गंगा नदी के पानी में पड़ती है तब ऐसा लगता है मानों आसमान से तारे सीधे जमीन पर ही उतरकर आ गये हैं। इस साल प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में दीपोत्सव को काफी धुमधाम से मनाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ वाराणसी की देव दीपावली में भी भगवान श्रीराम की झलक लोगों को जरूर दिखेगी।
आइए आपको बताते हैं इस साल की देव दीपावली में क्या खास होने वाला है!
रिकॉर्ड दीयों से घाट होंगे रोशन

इस बनारस में विश्व प्रसिद्ध देव दीपावली 27 नवंबर को मनायी जाएगी। बनारस में देव दीपावली का आयोजन विभिन्न समितियां सम्मिलित रूप से करती हैं। इस साल देव दीपावली को खास बनाने के लिए सभी समितियां अपनी-अपनी तरफ से तैयारियों में जुट भी गयी हैं। देव दीपावली के दिन सिर्फ गंगा के घाटों पर ही नहीं बल्कि पूरे वाराणसी शहर के हर कुंड, पोखरे या फिर सरोवर के किनारों के साथ-साथ चौराहों को भी दीयों से सजाया जाएगा।
इसके साथ ही वरुणा नदी के घाटों पर भी बड़े ही भव्य अंदाज में देव दीपावली का आयोजन किया जाएगा। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस साल देव दीपावली में अस्सी घाट से लेकर नमो घाट, बनारस की अर्द्धचंद्राकार गंगा नदी के दोनों तरफ के तटों को करीब 13.5 लाख दीयों से रोशन किया जाएगा।
श्रीराम को समर्पित होगी देव दीपावली

मान्यताओं के अनुसार 14 वर्षों का वनवास काटकर घर लौटे भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की खुशी में दिवाली मनायी जाती है। इस वजह से दिवाली भगवान श्रीराम को समर्पित होती है। लेकिन इस साल बनारस की देव दीपावली भी प्रभु श्रीराम को समर्पित होगी। दरअसल, लंबे संघर्षों के बाद रामलला जल्द ही अपने मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होंगे।
इसकी खुशी में ही इस साल देव दीपावली के मौके पर गंगा के घाटों और गलियों को राम मंदिर के रूप में सजाया जाएगा। इस साल की देव दीपावली में काशीवासी को कुछ जो काफी अनोखा होगा। दरअसर, इस साल देव दीपावली पर भगवान शिव की नगरी काशी में भगवान श्रीराम को समर्पित आरती होगी। इतना ही नहीं बल्कि इस बार गंगा घाट पर राम मंदिर के तर्ज पर दीयों की सजावट के साथ-साथ भगवान श्रीराम को समर्पित रंगोली भी तैयार की जाएगी।
रिकॉर्ड तोड़ रही है होटल और नावों की बुकिंग

बनारस में होने वाली देव दीपावली में इस बार रिकॉर्ड पर्यटकों के शामिल होने की संभावना है। पहले दिवाली और उसके बाद देव दीपावली की भव्यता को अनुभव करने के लिए अभी से ही वाराणसी में विदेशी पर्यटकों की भीड़ जुटने लगी है। इस साल संभावना है कि करीब 10 लाख लोग इस भव्य उत्सव में शामिल होने वाले हैं। बताया जाता है कि करीब 1 महीना पहले से ही काशी के सभी होटल व लॉज की 90% बुकिंग फुल हो चुकी है।
इतना ही नहीं नावों की बुकिंग भी अब फुल होने लगी है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो नाव वाले देव दीपावली के दिन गंगा नदी की सैर करवाने के लिए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कोई 20-25 हजार रूपए मांग रहा है तो किसी के 1 लाख रूपए तक किराए में मांगने की बातें सामने आ रही है।
शिक्षा विभाग भी जलाएगी दीया

देव दीपावली के मौके पर सिर्फ गंगा के घाटों या तटों को ही नहीं बल्कि गंगा के उस पार रेत पर भी दीये जगमगाएं जाएंगे। इसके लिए उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग तेल, दीया और बाती का इंतजाम कर रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि देव दीपावली के मौके पर गंगा घाटों पर 13 लाख से अधिक दीयों को जलाया जाएगा।
वहीं लगभग साढ़े 3 लाख दीयों को गंगा के उस पार रेत पर जलाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी बुनियादी शिक्षा विभाग को सौंपी गयी है। बताया जाता है कि बनारस में दिवाली के साथ-साथ देव दीपावली की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।



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