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मनाली का एक ऐसा उत्सव, जो शायद ही कभी देखा होगा

प्राचीन काल से ही मानव सभ्यता में त्यौहार-समारोह जीवन का एक बहुत ही अभिन्न हिस्सा रहा है। यह एक प्रथा है, जिसे हम कई सदियों से निभाते हुए चले आ रहे हैं, जिसके जरिये हम एक दूसरे को जान और समझ पाते हैं। जैसे कि, भारत विवधतायों से परिपूर्ण देश है, जिसमे हर तरह के लोग रहते हैं, जिनके अपने त्यौहार और उत्सव है। खास बात यह है कि, हम सभी किसी ना किसी धर्म जाति, धार्मिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं, जिनके अपने अलग रीति-रिवाज, परंपरा और प्रथायें हैं। जिनमे से कुछ पर्व पूरे उत्साह के साथ सम्पूर्ण देश मनाता है। ऐसा ही एक पर्व हिमाचल प्रदेश की गोद में बसे मनाली में मनाया जाता है, जिसे धुंगरी मेला कहते हैं। यह एक तीन दिवसयी त्यौहार होता है, जिसे सभी आसपास के गांव के लोग मिलकर मनाते हैं।

आखिर क्या है धूंगरी मेला?

आखिर क्या है धूंगरी मेला?

Pc:PabloEvans
धूंगरी मेला एक तीन दिवसयी उत्सव है, जो हर साल हिडिम्बा देवी के जन्मोत्सव पर मनाया जाता है। यह तीन दिवसीय मेला हिमाचल प्रदेश में मनाली में 14 मई से 16 मई तक आयोजित किया जाता है। इसलिए, यदि आप मई के महीने के दौरान हिमाचल प्रदेश जाने की योजना बना रहे हैं, तो इस शानदार उत्सव को देखना कतई ना भूलें।

इस क्षेत्र में हिडिम्बा देवी का एक बेहद ही महत्वपूर्ण मंदिर स्थापित है, माना जाता है कि , उनके जन्मदिन पर सभी देव देवता उपस्थित रहते हैं, इसीलिए जुलुस के दौरान सभी देवी देवतायों की मूर्तियों को इस जुलुस में ले जाया जाता है।

आखिर कौन थी हिडिम्बा देवी?

आखिर कौन थी हिडिम्बा देवी?

Pc:Ashwin Kumar
अगर आपने महाभारत पढ़ी या सुनी होगी, तो ये नाम आपके लिए बिल्कुल भी नया नहीं होगा। महाभारत में बताया जाता है कि,हिडिम्बा पांडू पुत्र भीम की पत्नी थी और बलशाली घाटोतकाचा की मां। बताया जता है कि, निर्वासन के दौरान जब पांडव जंगल में भटक रहे थे, तो हिडिम्बा और भीम की मुलाकात हुई थी, जहां हिडिम्बा के भाई हिडिम्ब उसे पांडवों को रिझाने का आदेश दिया, ताकि वह उन्हें अपना शिकार बना सके।

हिडिम्बा भीम पर फ़िदा हो गयी और उसने भीम को अपने भाई के इरादों के बारे में बता दिया, जिसके बाद युद्ध के दौरान भीम ने हिडिम्ब को मौत के घाट उतार दिया। जिसके बाद भीम ने हिडिम्बा से विवाह कर लिया और हिडिम्बा उनकी पत्नी बन गयीं।

माना जाता है कि, भीम और उनकी पत्नी धुंगरी की पहाड़ियों में कुछ समय तक रहे थे। आज, हिडिम्बा मंदिर धुंधरी पहाड़ियों में धुंगरी वान विहार नामक एक जंगल में स्थित है।

इस मंदिर में हिडिम्बा का जन्मदिन बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, हिडिम्बा की मृत्यु के बाद उनका जन्मदिन एक वार्षिक मेला में बदल गया जिसे अब तीन दिवसयी समारोह के तौर पर मनाया जाता है।

हिडिम्बा देवी मंदिर?

हिडिम्बा देवी मंदिर?

Pc:Ashish3724
हिडिम्बा देवी मंदिर मनाली में सबसे फेमस जगह है। यह मंदिर एक गुफा में बना हुआ है जो देवी हिडम्‍बा को समर्पित है। यह मंदिर हिमालय की तलहटी पर स्थित है जिसके आसपास हरियाली है और ि‍ सडार के जंगल हैं। इस मंदिर का निर्माण 1553 ई. में एक पत्‍थर में किया गया था। पत्‍थर को इस प्रकार काटा गया कि उसका आकर गुफानुमा हो गया। इस पत्‍थर के अंदर जाकर श्रद्धालु दर्शन कर सकते है और विशेष पूजा का आयोजन कर सकते हैं।

मंदिर के भीतर ही माता की पालकी है जिसे समय-समय पर रंगीन वस्त्र एवं आभूषणों से सुसज्जित करके बाहर निकाला जाता है। मंदिर का प्रवेश द्वार अपने आप में कलात्मक है। अन्य देवालयों के ही समान द्वार पर बेल-बूटे, फूल व पत्ते तो उकेरे ही गये हैं, साथ ही पौराणिक पात्रों का चित्रण भी किया गया है। हिडिम्बा को काली का अवतार का अवतार कहा गया है। इसी कारण इस मंदिर के अन्दर दुर्गा की मूर्ति भी है।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही बड़ी शांति व आनंद की अनुभूति होती है। होगी भी क्यों नहीं? इस परिसर को देवदार के विशाल वृक्ष अपनी लम्बी-लम्बी शाखाओं से ढके हुए हैं। ये इस स्थल को और भी रमणीक बना देते हैं। इस मंदिर में कोई शोरशराबा नहीं है, कोई लाउड स्पीकर नहीं बजता जिससे यहाँ का वातावरण बड़ा शांत और सुरम्य बना रहता है।

आपको क्यों धूंगरी मेला मेला का हिस्सा बनना चाहिए?

आपको क्यों धूंगरी मेला मेला का हिस्सा बनना चाहिए?

Pc:hermesmarana
धुंगरी मेला सिर्फ एक गांव का मेला नहीं है,बल्कि यह आसपास मौजूद गांव वालों का भी मेला है, जिसमें कई आस-पास के गांवों के लोग हिडिंब देवी के जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए इकट्ठे होते हैं। इस मेले के दौरान स्थानीय निवासी हिडिंब देवी की पूजा कर नाचते गाते हुए उनका जन्मदिन मनाते हैं। इस मेले के दौरान किए गए नृत्य का सबसे आम रूप कुल्लू नती लोक नृत्य है।

धुंगरी मेला विभिन्न संस्कृतियों को सीखने का एक शानदार अवसर है और देखें कि मनाली के लोग अपने त्योहारों और उनके अनुष्ठानों का जश्न कितने उत्साह से मनाते हैं।

 कैसे पहुंचे मनाली?

कैसे पहुंचे मनाली?

पर्यटक मनाली हवाई यात्रा, रेल यात्रा या सड़क यात्रा करते हुए आ सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा भुन्तार हवाई अड्डा है जोकि मंदिर से करीबन 50 किमी. की दूरी पर स्थित है। विदेशों से आने वाले पर्यटक दिल्‍ली के रास्‍ते से आ सकते हैं। दिल्‍ली से मनाली के लिए भी उड़ान भरी जाती है। अन्‍य साधनों से भी दिल्‍ली से मनाली तक आया जा सकता है। मनाली की नजदीकी रेलवे स्‍टेशन जोगिंदर नगर है जो शहर से 165 किमी. की दूरी पर स्थित है। यहां से देश के बड़े-बड़े शहरों जैसे - चंडीगढ़, शिमला, नई दिल्‍ली और पठानकोट के लिए ट्रेन मिल जाती हैं। वही राज्‍य में आने वाले पर्यटकों के लिए घूमने और भ्रमण के लिए राज्‍य सरकार व हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा कई बसें चलाई गई हैं जो राज्‍य के अंदर ही नहीं बल्कि नजदीकी शहरों में भी जाती हैं। मनाली का मौसम साल भर काफी सुखद रहता है लेकिन पर्यटक यहां मार्च से जून के दौरान आना ज्‍यादा पसंद करते है।

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