त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र समेत तमाम दूसरे शहरों में बड़े ही धूमधाम के साथ भगवान गणेश की आराधना का उत्सव गणेशोत्सव को मनाया गया। अब इंतजार हो रहा है त्योहारों के इस सीजन के दूसरे सबसे बड़े त्योहार यानी नवरात्रि का। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्तूबर को होगी। उससे पहले 2 अक्तूबर को महालया होगा, जिसे पितृपक्ष का समापन और देवी पक्ष के शुरुआत के तौर पर जाना जाता है।
नवरात्रि 3 अक्तूबर से 12 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। लेकिन हमारे देश में त्योहारों का सीजन इतनी जल्दी कहां खत्म होने वाला है। अभी तो दीवाली से लेकर छठ पूजा तक न जाने कितने त्योहार आने बाकी हैं।

तो चलिए एक-एक कर जान लेते हैं दीवाली से लेकर छठ पूजा कर कौन सा त्योहार कब आने वाला है और उसका शुभ मुहूर्त क्या है?
Karva Chauth 2024 - करवा चौथ कब है?
अपने पति की लंबी आयु की कामना से विवाहित महिलाएं करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन पूरे साजोश्रृंगार के साथ महिलाएं पूरा दिन उपवास रखने के बाद शाम को चांद निकलने पर उसे अर्घ्य अर्पित करती हैं। जिसके बाद अपने पति के हाथों से पानी पीकर वे अपना व्रत खोलती हैं।
इस साल करवा चौथ का व्रत 20 अक्तूबर 2024 को रखा जाएगा। 20 अक्तूबर की सुबह 6.46 बजे कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत होगी, जो 21 अक्तूबर को सुबह 4.16 बजे तक रहेगी। इसलिए उदया तिथि में होने के कारण 20 अक्तूबर को ही करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा।

Ahoi Ashtami kab hai - अहोई अष्टमी कब है?
अपने संतान की सुख-समृद्धि, उनकी लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना से माताएं अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत रखती हैं। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इसमें भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा का विधान है। पूरा दिन उपवास रखने के बाद माताएं रात को आकाश में तारे देखने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्तूबर को रखा जाएगा।
Dhanteras kab hai - धनतेरस कब है?
कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाई जाती है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, नए बर्तन आदि खरीदने की परंपरा सालों से चली आ रही है। धनतेरस को भगवान धनवंतरी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस साल धनतेरस 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन नया झाड़ू खरीदने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है। धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ-साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा होती है।
Chhoti Diwali/Narak Chaturdashi kab hai - छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी कब है?
कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के आधार पर इस दिन दक्षिण दिशा में यम के नाम का दीया भी जलाया जाता है। इस साल नरक चतुर्दशी 30 अक्टूबर को मनायी जाएगी। कई जगहों पर इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर स्नान करने का नियम है। वहीं पश्चिम बंगाल में इस दिन 14 किस्म का साग पकाकर खाने का प्रचलन भी है।

Diwali/Laxmi Poojan date in 2024 - दीवाली/लक्ष्मी पूजा/काली पूजा कब है?
इस साल सर्वसम्मत से दीवाली 31 अक्तूबर को मनायी जाएगी। दीवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस साल 31 अक्तूबर को दोपहर 3.52 बजे से अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी, जो 1 नवंबर तक रहेगी। 31 अक्तूबर की रात को अमावस्या तिथि रहने के कारण इसी दिन दीवाली मनायी जाएगी। देश भर में इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का प्रचलन है।
इसके साथ ही दीवाली की रात यानी अमावस्या तिथि में देवी काली की पूजा करने का भी विधान है, जिसे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। दीवाली को भगवान श्रीराम के अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी देवी सीता के साथ अयोध्या वापसी के तौर पर मनाया जाता है। इस साल लगभग 450 सालों बाद पहली बार रामजन्मभूमि मंदिर में रामलला के साथ श्रद्धालु दीवाली मनाएंगे।
Govardhan Pooja Date in 2024 - गोवर्धन पूजा कब है?
दीवाली के अगले दिन ही गोवर्धन पूजा होती है। इस साल 1 नवंबर को भी उदया तिथि में अमावस्या होने के कारण 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी ऊंगली पर उठाकर भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरावासियों की भगवान इंद्र के प्रकोप और भारी बारिश से रक्षा की थी। तब से लेकर अब तक गोवर्धन पूजा करने की परंपरा जारी है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ-साथ अन्नकूट का भोग भी लगाया जाता है।
Bhaiya dooj kab hai - भैया दूज कब है?
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस साल भाई दूज 3 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। कहा जाता है कि सबसे पहले यमुना ने अपने भाई यम को तिलक लगाया था। उसके बाद से ही हर साल बहने अपने भाई की लंबी आयु के लिए उन्हें तिलक लगाती हैं और उनके दीर्घायु होने की कामना करती हैं। कई जगहों पर इस दिन बहनें भाईयों को अपशब्द भी कहती हैं और बाद में इसके लिए प्रायश्चित भी करती हैं। वहीं कई जगहों पर इसे रक्षाबंधन के उत्सव की तरह ही पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है।

Chhath Pooja Kab se hai - छठ पूजा कब से है?
दीवाली के त्योहारों के सीजन का आखिरी त्योहार है छठ पूजा। यह सूर्योपासना का त्योहार है जिसे लोक आस्था का महापर्व भी कहा जाता है। छठ पूजा 4 दिनों तक मनाया जाने का पर्व है। इस साल छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर को होगी और 7 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ यह पर्व संपन्न हो जाएगा।
5 नवंबर को नहाय खाए, 6 नवंबर को खरना, 7 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य और 7 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व छठ और त्योहारों का सीजन भी खत्म हो जाएगा।



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