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इन 8 राज्यों में बड़े ही अलग अंदाज में मनायी जाती है दीवाली, आपके राज्य में कैसे मनाया जाता है यह त्योहार?

हमारे देश में लगभग हर महीने कोई न कोई त्योहार जरूर मनाया जाता है। लेकिन देश के सभी हिस्सों में एक त्योहार को समान प्रकार से नहीं मनाया जाता बल्कि अलग-अलग राज्यों में त्योहारों को मनाने का अंदाज भी अलग-अलग ही होता है। अब दशहरा को ही अगर ले, तो कहीं इसे नवरात्रि के रूप में 9 दिनों तक मनाया जाता है तो कहीं 4 दिनों की दुर्गा पूजा और कहीं दशहरा के दिन रावण दहन की धूम मचती है।

ठीक उसी तरह से दीवाली का त्योहार भी हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने-अपने अंदाज में मनाया जाता है।

diwali varanasi

आज हम आपको प्रमुख राज्यों या शहरों में दीवाली को किस तरह से मनाया जाता है, इस बारे में जानकारी दे रहे हैं। इनमें से आपके राज्य या शहर में किस तरह से दीवाली मनायी हमें जरूर बताइएगा।

1. कोलकाता

दीवाली को अलग अंदाज में मनाने में सबसे पहला नाम पश्चिम बंगाल और कोलकाता का आता है। पश्चिम बंगाल में दीवाली की रात यानी अमावस्या की रात को श्यामा पूजा या काली पूजा की जाती है। इस दिन कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर और कालीघाट मंदिर में बड़े ही धूमधाम से मां काली की पूजा का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा दुर्गा पूजा के तर्ज पर ही पूरे कोलकाता शहर में अलग-अलग श्यामा पूजा कमेटियां पंडाल बनाकर मां काली की आराधना करती हैं।

कोलकाता के उपनगरीय शहर बारासात में मां काली की पूजा बतौर 'बोरो मां' (बड़ी मां) की जाती है। खास बात है कि काली पूजा के समय कई जगहों पर मां काली को मांसाहार का भोग भी लगाया जाता है। दीवाली से एक रात पहले पश्चिम बंगाल में भूत चतुर्दशी मनाया जाता है, जिस दिन पितरों के लिए 14 दीया जलाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन 14 साग भी खाया जाता है।

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2. वाराणसी

उत्तर भारतीय अन्य सभी राज्यों और शहरों की तरह ही वाराणसी में भी दीवाली के दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही पूरे वाराणसी शहर को दीयों से सजाया जाता है और लोग उत्सव मनाते हैं। लेकिन दीवाली से भी अधिक खास होता है बनारस की देव दीपावली। मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवता दीपावली का त्योहार मनाने के लिए धरती पर आते हैं। इस दिन वाराणसी के सभी घाटों को दीयों से सजा दिया जाता है।

3. ओडिशा

ओडिशा में भी दीवाली का त्योहार सामान्य तरीके से मनाया जाता है लेकिन इस दिन ओडिशा में पितरों को समर्पित कौरिया काठी की परंपरा का भी निर्वाह किया जाता है। यह परंपरा स्वर्गवासी परिजनों को पूजा करने की एक परंपरा है, जिसमें लोग जूट की लकड़ियों को जलाते और उनसे आर्शिवाद मांगते हैं। ओडिशा में भी दीवाली के दिन मां लक्ष्मी, प्रथम पूज्य गणेश और मां काली की पूजा की जाती है।

maharshtra diwali

4. महाराष्ट्र

दीवाली के मौके पर महाराष्ट्र में वासु बरस परंपरा मनायी जाती है, जो गौ माता को समर्पित है। महाराष्ट्र में धनतेरस पर धनवन्तरी की पूजा की जाती है। वहीं दीवाली को चा पाडवा के नाम से मनाया जाता है, जिस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। यह एक प्रकार से पति-पत्नी के आपसी रिश्ते को भी मनाने का त्योहार है। यहां दीवाली का त्योहार भाव बीज और तुलसी विवाह जैसी परंपराओं के साथ संपन्न होता है।

5. गोवा

गोवा में दीवाली के दिन को श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के दिन के रूप में मनाया जाता है। दीवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के दिन रावण दहन की तरह ही नरकासुर की आदमकद मूर्ति बनाकर उसका दहन किया जाता है। दीवाली के दिन गोवा में और दक्षिण भारतीय कुछ इलाकों में लोग नारियल का तेल शरीर पर मलते हैं। इसके पीछे की मान्यता है कि ऐसे करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

6. गुजरात

गुजरात में दीवाली पुराने साल के खत्म और नववर्ष के आगमन के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। दीवाली के अगले दिन गुजराती नववर्ष बेस्तु वरस मनाया जाता है। इस त्योहार की शुरूआत गुजरात में वाग बरस, उसके बाद धनतेरस, काली चौदश, दीवाली, बेस्तु बरस और भाई बिज के साथ होता है।

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7. पंजाब

पंजाब में हिंदू परिवार दीवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा तो करते हैं लेकिन सिख समूदाय इस दिन बंदी छोड़ दिवस के तौर पर मनाते हैं। इस सिख त्योहार में भी दीवाली की तरह ही घरों और गुरुद्वारों को दीयों से सजाया जाता है, लोग एक-दूसरे को दूसरे उपहारों के साथ-साथ पटाखे भी देते हैं। पंजाब में दीवाली का त्योहार सर्दियों के शुरुआत का प्रतीक है।

karnataka diwali

8. कर्नाटक

दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में दीवाली का त्योहार बाली प्रतिपदा के रूप में मनाया जाता है, जिसे बाली पद्यामी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के वामन अवतार द्वारा पाताल में भेजे जाने के बाद राजा बाली को एक दिन के लिए धरती पर वापस लौटने की अनुमति दी गयी थी और वह हर साल बाली प्रतिपदा के दिन धरती पर आते हैं। इस त्योहार को मुख्य रूप से किसानों द्वारा मनाया जाता है। खास बात है कि इस त्योहार में राजा बाली की जो प्रतिमा बनायी जाती है वह तिकोन होती है।

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