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चर्चाओं में छाया हुआ है कोलकाता के इस दुर्गा पूजा पंडाल का थीम, क्यों इतना खास है यह Theme?

कोलकाता में हजारों की संख्या में छोटे-बड़े दुर्गा पूजा पंडाल बनते हैं, जिनमें से अधिकांश पंडाल किसी ना किसी थीम पर ही बनाए जाते हैं। लेकिन सोशल मीडिया से लेकर दुर्गा पूजा पर घूमने वाले सभी लोगों की जुबान पर एक ही दुर्गा पूजा पंडाल का नाम और उसका थीम छाया हुआ है। लोग तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि इस साल कोलकाता का बेस्ट थीम पंडाल यहीं है।

kashi bose lane durga puja

कौन सा थीम है, जो कोलकाता में लोगों को इतना ज्यादा प्रभावित किया है? जब भी कहीं से महिला तस्करी, बाल तस्करी या फिर बलात्कार जैसी घटानाओं की खबरें सामने आती हैं, हम सोशल मीडिया एक के बाद एक कई पोस्ट देखते हैं और हर लगभग हर पोस्ट में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

सोशल मीडिया पर होने वाले उन हजारों पोस्ट की भीड़ में हमें कुछ पोस्ट ऐसे भी दिखाई देते हैं, जिनमें यह कहा जाता है कि किसी भी पर्व-त्योहार के समय हम मातृ शक्ति के रूप में दुर्गा, काली, लक्ष्मी या फिर सरस्वती को देवी मानकर उनकी पूजा तो करते हैं लेकिन क्या वास्तव में महिलाएं आज के समाज में इतनी ही सुरक्षित हैं? इसी सवाल को इस बार कोलकाता के काशी बोस लेन दुर्गा पूजा कमेटी ने अपनी थीम के जरिए एक बार फिर से पूछने की कोशिश की है।

girl child

काशी बोस लेन सार्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी का इस साल का थीम 'चाई ना होते उमा' (नहीं चाहती उमा बनना)। बता दें, उमा देवी पार्वती/दुर्गा का ही एक उपनाम है। इस थीम के बारे में दुर्गा पूजा कमेटी के एक सदस्य का कहना है कि आज के समाज में महिलाओं की तस्करी एक मारक बीमारी बनकर उभर रही है।

girl child trafficking

दुर्गा पूजा के माध्यम से हम समाज को जागरुक करने का ही प्रयास कर रहे हैं। यह एक ऐसी घटना है जिसने ना जाने कितनों का जीवन तबाह कर दिया है। आयोजकों का कहना है कि हम समाज कल्याण के लिए महिलाओं को उनका योग्य सम्मान प्रदान करने का आह्वान कर रहे हैं।

क्या खास है इस दुर्गा पूजा पंडाल में?

goddess durga
  • दुर्गा पूजा पंडाल में एक जगह पर घुमते हुए टेबल के चारों तरफ छोटी बच्चियों के पुतलों को सजाया गया है। सांकेतिक रूप से बच्चियों के शरीर में उनकी कमर से नीचे के कुछ हिस्सों को फलों के रूप में दिखाया गया है, जिसपर गिद्ध अपनी निगाहें जमाए हुए हैं।
  • थोड़ा आगे बढ़ने पर एक ड्रेसिंग टेबल के सामने बलात्कार की शिकार एक छोटी बच्ची की मूर्ति दिखाई देती है, जो अपने-आप की तुलना मां दुर्गा से कर रही है। (महिलाओं को शक्ति का स्वरूप ही तो माना जाता है।)
big khidki
  • मां दुर्गा की मूर्ति के ठीक ऊपर छत का एक हिस्सा खिड़की की तरह खुला हुआ है, जिससे होकर एक बच्ची अपनी बांहे फैलाये आसमान की तरफ बढ़ने की कोशिश करती नजर आ रही है।
  • इस पंडाल में उन महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरों को भी आकर्षक रूप से सजाया गया है जिनकी Missing Report स्थानीय थाने में दर्ज करवायी गयी है।
  • इस पंडाल की सबसे खास बात मां दुर्गा की साड़ी है। यहां सरस्वती और लक्ष्मी की साड़ियां तो रंगीन है, लेकिन मां दुर्गा की बिल्कुल उदास और बेरंग है।

कैसे पहुंचे यहां?

श्याम बाजार 5 प्वाएंट्स से पैदल चलकर काशी बोस लेन सार्वजनिन दुर्गा पूजा आसानी से पहुंचा जा सकता है। श्यामबाजार के हाथी बगान मोड़ से यह पूजा पंडाल बेहद नजदीक है। इसके अलावा खन्ना में उतरकर आसानी से पहुंच सकते हैं। मेट्रो से आने पर श्यामबाजार या फिर शोभाबाजार सुतानूटी स्टेशन पर उतरना होगा। वहां से पैदल जा सकते हैं।

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