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भारत के इन राज्यों के बीच स्थित है ज्वालामुखी का पठार!

उत्तर भारत के मध्‍य में स्थित मालवा का पठार ज्‍वालामुखी मूल का एक पठार है। ये पठार मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है।

By Namrata Shatsri

मालवा का नाम मलाव से लिया गया है जिसका मतलब होता है देवी लक्ष्‍मी। ऐतिहासिक रूप से ये पठार मौर्य, गुप्‍ता और परामरा राजवंश के अधीन रह चुका है। 1390 में मालवा का पठार मुस्लिमों के अधीन और फिर 1817 में मराठाओं से इस पर ब्रिटिशों का शासन हुआ करता था।

मालवा का पठार समुद्रतट से 1650 से लेकर 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मालवा की खोज सातवीं शताब्‍दी में चीनी यात्री सुआनजैंग द्वारा की गई थी। इस पठार पर गुजराती, मराठी और राजस्‍थानी संस्‍कृति का प्रभाव है।

मालवा में अधिकतर कृषि की जाती है। यहां पर तिलहल, कपास, फलियां और अनाज की मुख्‍य फसलों की खेती की जाती है। मालवा में सूती कपड़े, कपास, चीनी, तेल और कागज़ के उद्योग भी हैं। महान लेखक कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञानशकुंतल मालवा क्षेत्र में स्‍थापित है। कहा जाता है कि कालिदास इसी क्षेत्र से थे।

मालवा पठार घूमने का सबसे सही समय
पूरे साल यहां का मौसम बदलता रहता है। गर्मियों के मौसम में यहां पर तपमी हुई गर्मी पड़ती है एवं इस समय यहां का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। मॉनसून के दौरान मौसम फिर भी ठीक रहता है। मॉनसून में मौसम लगभग 30 डिग्री सेल्‍सियस रहता है। वहीं मालवा के पठार में सबसे लंबा मौसम सर्दी का होता है जोकि अक्‍टूबर से मध्‍य मार्च तक चलता है। इस समय यहां का तापमान 6 डिग्री से भी कम होता है।

मालवा का पठार बहुत विशाल है और इसके अंतर्गत काफी बड़ा क्षेत्रफल आता है। ये जगह सड़क, वायु और रेल मार्ग से अच्‍छी तरह से जुड़ी हुई है। इस क्षेत्र में दो हवाईअड्डे इंदौर और भोपाल में स्थित हैं।मालवा में ज्‍यादातर शाकाहारी भोजन ही किया जाता है। भुट्टे का कीस, चक्‍की री शाक, दाल बाटी, अमली री कढ़ी, ठुल्‍ली, श्रीखंड, मालपुआ, मावा बाटी जैसे कुछ स्‍वाइिष्‍ट व्‍यंजन यहां प्रसिद्ध हैं। मालवा का पठार ऐतिहासिक और धार्मिक महत्‍व रखता है। मालवा पठार के कुछ मुख्‍य आकर्षण हैं :

उज्‍जैन

उज्‍जैन

उज्‍जैन हिंदू धर्म का केंद्र माना जाता है। इस जगह पर 100 से अधिक प्राचीन मंदिर है जिनकी वास्‍तुकलों श्रद्धालुओं को हतप्रभ कर देती है। उज्‍जैन का महाकाल मंदिर भगवान शिव के बारह ज्‍योर्तिलिंगों में से एक है। उज्‍जैन को भारत का ग्रीनविच भी कहा जाता है और इसे भारतीय भूगोलियों द्वारा प्रमुख मेरिडियन कहा गया है। 12 साल में एक बार लगने वाला सिंहस्‍थ मेला भी उज्‍जैन का मुख्‍य आकर्षण है।
PC: Gyanendra_Singh_Chau

मांडु

मांडु

परमार राजवंश की राजधानी मांडु किला हुआ करता था। मांडु का मांडु किला भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इसके अलावा मांडु में अफगान वास्‍तुकला का नमूना जहाज़ महल भी देख सकते हैं। मांड के महल आज भी इसके इतिहास और प्रेम कहानियों को बयां करते हैं। हिंडोला महल, रूपमती महल, होशांग शाक का मकबरा, जामा मस्जिद और बाज बहादुर जैसे कुछ किले दर्शनीय हैं।PC: Sheerazwiki

चंदेरी और महेश्‍वरी साडियां

चंदेरी और महेश्‍वरी साडियां

भारत के दो सबसे महत्‍वपूर्ण हथकरघा मालवा क्षेत्र में चलाए जाते हैं। चंदेरी, सूती चंदेरी और सिल्‍क कॉटन से बनी पारंपरिक चंदेरी साड़ी है। चंदेरी के कुछ प्रसिद्ध डिज़ाइन हैं - सिक्‍के, मोर, रूपांकन और ज्यामितीय। सूती कपड़े को बुनाई कर अलग-अलग डिज़ाइन में महेश्‍वरी साड़ी आती है।PC:McKay Savage

वन्‍य जीव

वन्‍य जीव

मालवा के पठार में वन्‍यजीव भी रहते हैं। बांधवबढ़, पेंच, रणथंबौर, कान्‍हा नेशनल पार्क और रेवा जैसी कुछ जगहों पर आप वन्‍यजीवों को देख सकते हैं। पूरे भारत में बांधवगढ़ में सबसे ज्‍यादा रॉयल बंगाल टाइगर मिलते हैं। रेवा, मायावी और दुर्लभ सफेद बाघों के लिए जाना जाता है। रणथंबौर को टाइगर के लिए जाना जाता है।PC: Akshaygn

खजुराहो

खजुराहो

खजुराहो में अनके हिंदू और जैन स्‍मारक हैं जिन्‍हें नागर शैली में बनाया गया है। खजुराहो को अपने समय से काफी आगे है क्‍योंकि यहां अनके कामुक मूर्तियां है। चंदेला राजवंश के शासकों द्वारा खजुराहो के मंदिरों को बनवाया गया था। इन पर की गई नक्‍काशी काफी कामुक है।

PC: Marcin Białek

भीमबेटका

भीमबेटका

पत्‍थरों से ढके भीमबेटका को भोपाल की विश्‍व धरोहर के रूप में जाना जाता है। 30,000 सालों पहले पत्‍थर से बनी इन गुफाओं में नक्‍काशी की खो की गई थी। इस तरह के पत्‍थर स्‍पेन और फ्रांस में मिलते हैं। भीमबेटका में 243 आश्रय स्‍थल हैं।PC: Vijay Tiwari

सांची स्‍तूप

सांची स्‍तूप

सम्राट अशोक द्वारा 3 ईस्‍वीं में सांची के स्‍तूपों को बनवाया गया था। इन स्‍तूपों पर बुद्ध के जीवन का चित्रण किया गया है जैसे कि जातका की कथा में बताया गया है। सबसे पहले 1818 में ब्रिटिशों ने सांची के स्‍तूप की खोज की थी। इस स्‍मारक को संरक्षित रखने के लिए यहां पर मरम्‍मत कार्य चल रहा है। पर्यटकों के लिए ये जगह सूर्योदय से लेकर सूर्यास्‍त तक खुली रहती है।PC:Patrick J. Finn

भोपाल

भोपाल

भोपाल शहर में अनेक झीलें हैं और इसी कारण इस शहर को सिटी ऑफ लेक यानि झीलों का शहर कहा जाता है। यहां पर कई प्राकृतिक और कृत्रिम झीलें हैं। भोपाल के उत्तर में मस्जिद, चौक, हवेली और बाज़ार हैं वहीं इसके दक्षिण में बड़ी-बड़ी सड़कें, मॉल और रेस्‍टोरेंट है। भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक ताज-उल-मस्जिद भी भोपाल में ही स्थित है।PC:Ajitkumar.bhopal

ग्‍वालियर

ग्‍वालियर

भारतीय संगीत में ग्‍वालियर शहर का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है। भारत के कई प्रसिद्ध संगीतकार जैसे तानसेन और बज्‍जु बावरा ग्‍वालियर शहर से ही थे। हर साल ग्‍वालियर में तानसेन के मकबरे में तानसेन म्‍यूजिक फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। ग्‍वालियर किले के परिसर में विष्‍णु मंदिर भी स्थित है।PC: Dan

चित्तौढ़गढ़

चित्तौढ़गढ़

पांच पांडवों में से एक भीम द्वारा चित्तौढ़गढ का खूबसूरत किला बनाया गया था। इस किल की दीवारों पर वीरता की अद्भुत कहानियां बताई गईं हैं। राजपूताना इतिहास में चित्तौढ़गढ़ के रानी पद्मावती किले की अहम भूमिका है। ऐसा माना जाता है कि दिल्‍ली की सल्‍तनत के अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती की परछाई देखी थी और उनके सौंदर्य पर मोहित हो गया था। खिलजी ने रानी पद्मावती को हासिल करने के लिए सेना भेजी थी।PC:lensnmatter

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