Search
  • Follow NativePlanet
Share
» » पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, जुड़ी हैं दिलचस्प मान्यताएं

पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, जुड़ी हैं दिलचस्प मान्यताएं

भारत विभिन्न संस्कृती, परंपराओं और जाति-धर्मों का देश है। जो पूरे विश्व में अपनी अखंडता और एकता के लिए जाना जाता है। यहां लोग विभिन्न रूपों में परमात्मा की पूजा की जाती है। जो इस बात को भलीभांति स्पष्ट करता है कि अगल-अलग धार्मिक मार्गों से भी परमात्मा तक पहुंचा जा सकता है। इसलिए भारत में आस्था की पकड़ सबसे मजबूत मानी जाती है। 

भारतीय भूमि पर असंख्य देवी-देवताओं के प्रतीक और उनके मंदिर स्थापित हैं, जिनकी पूजा पौराणिक विधि विधानों के द्वारा की जाती है। धार्मिक पर्यटन में आज हमारे साथ जानिए पूर्वोत्तर भारत के उन प्रसिद्ध पौराणिक मंदिरों और स्थलों में बारे में जिनके दर्शन आप इस दौरान कर सकते हैं। साथ में जानिए इसने जुड़ी ढेर सारी दिलचप्स बातें।   

परशुराम कुंड, अरुणाचल प्रदेश

परशुराम कुंड, अरुणाचल प्रदेश

PC- rhinoji

अरुणाचल प्रदेश की लोहित नदी के निचले किनारे पर स्थित 'परशुराम कुंड' एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जिससे श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी है। यह स्थल राज्य के लोहित जिले के अंतर्गत आता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार अपनी माता की हत्या करने के बाद भगवान परशुराम ने इसी कुंड में स्नान कर अपने पापों को धोया था। इस पौराणिक घटना की वजह से यह स्थान एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है।

श्रद्धालु यहां आकर प्रवित्र स्नान करते हैं। प्राकृतिक दृष्टि से देखें तो यह कुंड चारों तरफ से पहाड़ी हरियाली से भरा है। जहां श्रद्धालुओं के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की सैर पर निकले सैलानी भी यहां आना पसंद करते हैं।

अघोरियों की रहस्यमयी दुनिया, इन स्थानों को बनाते हैं अपना अड्डा



आकाशगंगा मंदिर, अरुणाचल प्रदेश

आकाशगंगा मंदिर, अरुणाचल प्रदेश

PC- lensnmatter

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले में सियांग हिल्स की तलहटी पर स्थित 'आकाशगंगा मंदिर' एक लोकप्रिय हिंदू तीर्थ स्थल है। जिसे मालिनीथान के नाम से भी जाना जाता है। यह ऐतिहासिक मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है, जिसका निर्माण कुछ क्लासिकल ओडिशा शैली में करवाया गया था। मंदिर के अंदरूनी हिस्सों को आकर्षक चित्रकारी से सजाया गया है, जहां आप विभिन्न जानवरों और फूल-पत्तियों की तस्वीरें देख सकते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी स्थान पर द्वारका की तरफ बढ़ते हुए भगवान कृष्ण और पत्नी रुक्मणी ने थोड़ी देर विश्राम किया था, जिनका स्वागत स्वयं माता पार्वती किया था। माता पार्वती देवी रूकमणी को मालीनी के नाम से पुकारती थीं, इसलिए इस स्थान का नाम 'मालिनीथान' भी पड़ा। 'आकाशगंगा मंदिर' कई पुरातत्वविदों और इतिहासकारों को भी आकर्षित करता है।

गंगा किनारे रहकर बिहार के इन उद्यानों को न देखा तो क्या देखा



त्रिपुर सुंदरी मंदिर, त्रिपुरा

त्रिपुर सुंदरी मंदिर, त्रिपुरा

PC- Bodhisattwa

त्रिपुरा के उदयपुर शहर में स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर शहर का प्रमुख तीर्थ स्थान है। जहां रोजाना दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है। यह मंदिर भारत में प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां देवी सती के सीधे पैर की उंगलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। उदयपुर शहर को त्रिपुरा की प्राचीन राजधानी बताया जाता है। जो कभी माणिक साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था।

राजा माणिक ने द्वारा ही इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। इसके अलावा भी राजा माणिक के शासनकाल के दौरान कई धार्मिक स्थलों का निर्माण करवाया गया । उदयपुर शहर अपने मंदिरों के अलावा अपनी कृत्रिम झीलों लिए भी जाना जाता है।

रहस्य : भारत के सबसे डरावने होटल, जुड़ी हैं रहस्यमयी कहानियां

श्री गोविंद मंदिर, मणिपुर

श्री गोविंद मंदिर, मणिपुर

PC- kknila

भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित यह मंदिर मणिपुर राज्य का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इसके साथ ही यह इम्फाल का सबसे बड़ा हिंदू वैष्णव मंदिर भी माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण सन् 1846 में मणिपुर के तत्कालीन शासक द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर को खूबसूरत वास्तुकला से सजाया गया है, जहां आप दीवारों पर अंकित आकर्षक नक्काशी और बनाए गए दो स्वर्ण गुंबदों को देख सकते हैं।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान गोविंदजी राधा के साथ विराजमान हैं। इसके अलावा आप यहां भगवान जगन्नाथ, बालभद्रा और देवी सुभद्रा की मूर्तियों को भी देख सकते हैं। यहां का पूरा प्रांगण शांत वातावरण से भरा है।

रहस्य : दुर्गापुर की वो सड़कें जहां रात में इंसान नहीं, चलते हैं शैतान

कामाख्या मंदिर, असम

कामाख्या मंदिर, असम

PC- Chanakya kumar das

असम के गुवाहाटी शहर में स्थित कामाख्या मंदिर नॉर्थ ईस्ट के चुनिंदा सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों में गिना जाता है। जहां रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं की कतार लगती है। इस मंदिर का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव देवी सती के मृत शरीर को लेकर जा रहे थे, तब सती के शरीर का एक अंग(योनी) इसी स्थान पर गिरा था।

इसलिए यह मंदिर भारत के चुनिंदा सबसे खास शक्तिपीठों में गिना जाता है। यह मंदिर नीलांचल पर्वत पर स्थित है, दर्शन के लिए लंबी कतार में लगकर अंदर गुफा में जाना पड़ता है, जहां माता की पूजा योनी रूप की जाती है।

नैनीताल : समर वेकेशन प्लान बनाने से पहले जानें बेहद जरूरी बातें

श्री सूर्य पहर, असम

श्री सूर्य पहर, असम

PC- SdSAGARDEEP

उपरोक्त स्थानों के अलावा असम के गोलपाड़ा स्थित 'श्री सूर्य पहाड़' एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह एक विशेष ऐतिहासिक स्थल है जो भारत के तीन धर्मों (हिन्दु,जैन और बौद्ध) को प्रदर्शित करता है। एक धार्मिक स्थान होने से साथ यह एक पुरातात्विक स्थल भी बन चुका है, जो गुवाहाटी शहर से लगभग 140 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक स्थल दर्शन के लिए आते हैं।

पहाड़ी जंगलों की पृष्ठभूमि वाला यह स्थान किसी आकर्षक आर्ट गैलरी से कम नहीं। यहां खूबसूरत पत्थरों की बनी मूर्तियां, शिवलिंग, हिन्दु, जैन और बौद्ध धर्म से जुड़ी प्रतिमाएं मौजूद हैं। इसलिए यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है।Holiday : अप्रैल में घूमने लायक शानदार जगहें, अभी बनाएं प्लान

भारत का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पोल. क्या आपने भाग लिया?

यात्रा पर पाएं भारी छूट, ट्रैवल स्टोरी के साथ तुरंत पाएं जरूरी टिप्स

We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Nativeplanet sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Nativeplanet website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more