देवियों का हमारे देश में सबसे उँचा स्थान है। शक्ति की देवी काली माँ से लेकर विद्या की देवी सरस्वती माँ, सभी देवियों को श्रद्धा पूर्वक हिंदू धर्म के सारे लोग सबसे पहले सर नवाते हैं। देवताओं के साथ देश में देवियों के कई मंदिर भी लोकप्रिय हैं, जिनकी अपनी महत्वपूर्ण मान्यताएँ हैं। चाहे वह जम्म-कशमीर में वैष्णो देवी का मंदिर हो या कन्याकुमारी का अम्मन मंदिर।
चलिए आज हम आपको महाराष्ट्र में ऐसी ही कुछ देवियों की मंदिर लिए चलते हैं जहाँ की भव्यता और मान्यता देख आप दंग रह जाएँगे।

मुंबा देवी मंदिर
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1. मुंबा देवी मंदिर, मुंबई
मुंबा देवी मंदिर मुंबई के भूलेश्वर में स्थित है, जिसके नाम पर ही मुंबई शहर का नाम पड़ा। मुंबा देवी यहाँ रहने वाले मछुआरों की जाति कोली की कुलदेवी है। 400 साल पुराने इस मंदिर की मुंबई में बहुत मान्यता है।

वज्रेश्वरि मंदिर
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2. वज्रेश्वरि मंदिर, मुंबई
वज्रेश्वरि योगिनी देवी मंदिर मुंबई से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर बसा, वज्रेशवरी देवी को समर्पित है। नवरात्रि का पावन उत्सव यहाँ धूमधाम से मनाया जाता है। पूरे नौ दिन, देवियों को धूमधाम से पूजा जाता है और बड़े मेले का आयोजन होता है।

सप्तश्रृंगी देवी मंदिर
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3. सप्तश्रृंगी देवी मंदिर, नासिक
महाराष्ट्र में देवी के साढ़े तीन शक्तिपीठ में से अर्धशक्तिपीठ वाली सप्तश्रृंगी देवी नासिक (सप्तश्रृंगी देवी टेंपल वाणी नासिक) से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊँचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं। सह्याद्री की पर्वत श्रृंखला के सात शिखर का प्रदेश यानी सप्तश्रृंग पर्वत, जहाँ एक तरफ गहरी खाई और दूसरी ओर ऊँचे पहाड़ पर हरियाली के सौंदर्यं के बीच विराजित देवी माँ प्रकृति से हमारी पहचान कराती प्रतीत होती हैं।

एकवीरा देवी मंदिर
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4. एकवीरा देवी मंदिर, लोनावला
सूर्यकन्या ताप्ति नदी की उपनदी पांझर नदी के तट पर स्थित अति प्राचीन मंदिर, एकवीरा देवी मंदिर जहाँ आदिमाया एकवीरा देवी की पूजा की जाती है। महाराष्ट्र के धुलिया शहर के देवपुर उपनगर में विराजित यह स्वयंभू देवी महाराष्ट्र सहित मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात के कई घरानों में श्रद्धालुओं द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं।

रेणुका देवी मंदिर में रेणुका देवी की प्रतिमा
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5. रेणुका देवी मंदिर, महुर
महाराष्ट्र का महुर क्षेत्र ख़ासतौर पर रेणुका देवी मंदिर के लिए ही प्रसिद्ध है। यह महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है। इस मंदिर के साथ यहाँ अन्य देवियों जैसे अन्सुय्या मंदिर और कालका मंदिर भी हैं।
6. मन्धारदेवी कालुबाई मंदिर, सतारा
मन्धारदेवी कालुबाई मंदिर, पर्वत के 4650 फीट उँचाई पर सतारा जिले के वाइ क्षेत्र में स्थापित है। हिंदू धर्म में यह काफ़ी प्रसिद्ध मंदिर है और हर साल जनवरी महीने में कालुबाई जात्रा, तीर्थयात्रा निकाली जाती है।

तुलजा भवानी मंदिर
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7. तुलजा भवानी मंदिर, सोलापुर
सोलापुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर बसा तुलजा भवानी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर सह्याद्री नदी पर स्थित यमुनांचल पर्वत की ढलान पर स्थापित है।

महालक्ष्मी मंदिर
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8. महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर
महालक्ष्मी मंदिर, 51 शक्ति पीठों मैं से एक है और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। कोल्हापुर के इस महालक्ष्मी देवी मंदिर को दक्षिण का काशी भी कहते हैं। इसी मंदिर के अन्दर नवग्रहों, भगवान सूर्य, महिषासुर मर्धिनी, विट्टल रखमाई, शिवजी, विष्णु, तुलजा भवानी आदि देवी देवताओं को भीपूजा जाता है।

चतुर्श्रृन्गि मंदिर
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9. चतुर्श्रृन्गि मंदिर, पुणे
पुणे का प्रसिद्ध चतुर्श्रृन्गि मंदिर, सेनापति बापत रोड में पर्वत की ढलान पर स्थापित है, जो 90 फीट उँचा और 125 फीट चौड़ा है। इस मंदिर को शक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
अपने महाराष्ट्र की यात्रा में देवियों के इन मंदिरों के दर्शन करिए और आस्था भाव के अनुभव को महसूस करिए।
अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।
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