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क्या सच में है दिल्ली के इस किले में जिन्नों का वास, आखिर क्यों कहा जाता है इसे 'जिन्नों का किला'

दिल्ली ऐतिहासिक स्थलों का गण माना जाता है। यहां एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों ऐतिहासिक स्मारक हैं, जो आज भी पर्यटकों को अपनी सुंदरता व वास्तुकला से अचंभित करते हैं। लेकिन यहां आज भी कुछ ऐसे स्थान है, जो रहस्यों से भरे हैं। इनमें से ही एक स्थान है- फिरोज शाह कोटला किला।

यह किला दिल्ली के पांचवें शहर फिरोज शाह कोटला में स्थित है, जो फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बसाया था। लेकिन वर्तमान समय में इसका काफी कम ही हिस्सा बचा हुआ है। देखने पर महल परिसर और किले का कुछ ही हिस्सा दिखाई देता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय का फिरोजाबाद हौज खास से लेकर हिंदूराव अस्पताल तक फैला हुआ था।

Feroz Shah Kotla Fort

क्या सच में फिरोज शाह कोटला किला में जिन्न का वास है?

समय के साथ साथ-साथ लोगों में बात फैलनी शुरू हो गई कि किले में जिन्न रहता है और उससे जो भी मांगों, वह पूरा करता है। बस क्या था... भारत तो है ही अंधविश्वासों का देश..। लोग पहुंच गए धूप-अगरबत्ती लेकर..। लेकिन एक सवाल आज भी मन में खटकता है कि क्या सच में इस किले में जिन्न रहता है? या ये सब महज एक अफवाह है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इस इमारत को संरक्षित किया जा रहा है। एएसआई की ओर से बताया गया कि काफी सालों से यहां गुरुवार को लोगों को जमावड़ा लगने लगा था, लोग यहां आते थे और अंधविश्वास को बढ़ावा देने लगे थे। यहां अगरबत्ती सुलगाने और दीये जलाने से इमारत गंदी हो रही थी। और तो और अनाज चढ़ाए जाने से चूहे भी बढ़ रहे थे। यह सिलसिला पिछले 50 साल से चला आ रहा था, जिस पर एएसआई ने ताला लगा दिया है।

Feroz Shah Kotla Fort

तुगलक वंश का शासन

दिल्ली में 1321-1414 तक तुगलक वंश का शासन रहा। कुल 93 वर्षों के शासनकाल के दौरान 11 शासकों ने दिल्ली की सल्तनत संभाला। इसी वंश का तीसरा शासक था- फिरोजशाह तुगलक...। इतिहासकार की मानें तो दिल्ली में उसके द्वारा बसाया गया शहर फिरोजाबाद को दिल्ली का पांचवां शहर माना जाता है। यहां कई महल बने हुए थे, जिनके अब अवशेष ही देखने को मिलते हैं।

फिरोज शाह कोटला किला के अंदर मस्जिद भी

इस किले के अंदर एक मस्जिद भी बनाई गई थी, जिसे जामी मस्जिद के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब इसकी सिर्फ एक ही दीवार बची है। तुगलक वंश के शासन के दौरान यह दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद हुआ करती थी। इतिहासकार बताते हैं कि तैमूर इस मस्जिद से इतना प्रभावित हुआ था कि समरकंद में इसकी जैसी ही मस्जिद बनवाई।

फिरोज शाह कोटला किला के अंदर बावली भी

इस किले के अंदर एक गोलाकार आकृति में बनी बावली भी है, जिसमें आज भी पानी मौजूद है। इसका उपयोग नहाने और गर्मी से बचने के लिए किया जाता था। फिरोजशाह इतिहास का एक ऐसा शासक था, जिसे इतिहास और वास्तुकला में काफी रुचि थी। उसने कई शिकारगाह बनवाए और कई शहरों की नींव डाली। हौज खास के तालाब, कुतुब मीनार और सूरज कुंड की मरम्मत भी इस शासक ने करवाई थी।

अंधविश्वास को मिला बढ़ावा

समय के साथ यह शहर वीरान होता चला गया। फिर क्या था.. धीरे-धीरे बात फैलनी शुरू हुई कि अब लोग यहां नहीं रहते हैं, इसीलिए जिन्नों ने इस किले को अपने कब्जे में ले लिया है। अब भारतीय लोग अंधविश्वासी तो होते ही है, फिर क्या था...आसपास रहने वाले लोगों के साथ कुछ घटनाएं घटी, जिसे जिन्न से जोड़कर देखा जाने लगा और धीरे-धीरे इस किले को 'जिन्नों का किला' कहा जाने लगा।

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