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रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ता देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल ब्रिज 'पंबन ब्रिज' बनकर तैयार

तमिलनाडु में रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ता पंबन ब्रिज बनकर आखिरकार तैयार हो गया है। इस ब्रिज का निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) द्वारा किया गया है। लेकिन यह कोई आम ब्रिज नहीं है। यह भारत का पहला रेल ब्रिज है, जो बीच में से दो हिस्सों में खुल जाता है। जी हां, पंबन ब्रिज (Pumban Bridge) भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल ब्रिज है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में RVNL ने इस ब्रिज पर पहला टेस्ट लिफ्ट किया जो सफल रहा।

दक्षिण रेलवे ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए टेस्ट लिफ्ट का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। अब अगले 10 दिनों तक इस ब्रिज पर ट्रायल किया जाएगा, जिसके बाद इसे ट्रेनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।

new pamban bridge

10 दिनों तक होगा ट्रायल

पंबन ब्रिज का निर्माण RVNL द्वारा किया गया है। दक्षिण रेलवे की तरफ से RVNL ने ही पिछले मंगलवार (1 अक्तूबर) को पंबन ब्रिज का टेस्ट लिफ्ट किया। इस दौरान 2.07 किमी लंबा यह ब्रिज अपनी पूरी ऊंचाई 17 मीटर पर उठाया गया था। Deccan Herald की एक रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार से अगले 10 दिनों तक लगातार इस ब्रिज का ट्रायल किया जाएगा। उसके बाद ही आम लोगों की आवाजाही के लिए पंबन और रामेश्वरम के बीच तैयार हुए इस ब्रिज को रेलवे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

क्यों बीच में खुलना वाला ब्रिज बनाया गया

समुद्र पर बनाया गया पंबन ब्रिज को बीच में ऊपर उठा कर खुलने वाला आधुनिक ब्रिज बनाया गया है। इस ब्रिज के निर्माण में करीब ₹550 करोड़ की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। साल 2019 में इस नये ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था जो अब जाकर पूरा हो गया है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस रेल ब्रिज का डिजाइन बीच में से उठने और खुलने वाला बनाया गया है, ताकि बड़े-बड़े जहाज आसानी से ब्रिज के नीचे से पार हो सकें।

कब बंद किया गया था पुराना ब्रिज

दिसंबर 2022 में पुराने पंबन ब्रिज पर दरार दिखाई देने के बाद उसे बंद कर दिया गया है। यह ब्रिटिश काल में बने 110 साल पुराना कैंटिलिवर ब्रिज था। पुराना पंबन ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत थी कि इस ब्रिज पर कोई रेलिंग नहीं थी। इसके साथ ही इसे दोनों किनारों से ऊपर उठाया जा सकता था, ताकि बड़ी नावें और जहाज पंबन तट से गुजर सकें।

इस वजह से यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी था। लेकिन समुद्री हवाओं के कारण बार-बार जंग लगने और ब्रिज के रखरखाव में दिन-प्रतिदिन बढ़ती लागत जैसी समस्याएं सामने आने लगी थी। इस वजह से ब्रिज को आखिरकार बंद करने का ही फैसला ले लिया गया।

Old Pamban bridge

रामेश्वरम तक जाने वाली ट्रेनों को 20 किमी पहले मंडपम रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया जाता है। जो पर्यटक और तीर्थ यात्री रामेश्वरम तक जाना चाहते हैं, उन्हें बस अथवा कैब लेकर रामेश्वरम द्वीप तक जाना पड़ता है। बता दें, इससे पहले वर्ष 1964 में एक गंभीर चक्रवाती तूफान, जिसने छोटे से द्वीप धनुषकोडी को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था, की वजह से पुराने पंबन ब्रिज को काफी नुकसान पहुंचा था। लेकिन 'मेट्रो मैन' के नाम से मशहूर युवा इंजीनियर ई श्रीधरन और उनकी टीम ने रिकॉर्ड 46 दिनों में इस ब्रिज की मरम्मत का काम पूरा कर दिया था।

pamban bridge old

नयी पंबन ब्रिज की खासियतें

  • देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल ब्रिज है जिसका निर्माण समुद्र पर किया गया है।
  • नए पंबन ब्रिज की लंबाई करीब 6790 मीटर है।
  • इसमें 100 स्पैन लगाए गये हैं जिसमें से 99 स्पैन की लंबाई 18.3 मीटर लंबाई और समुद्र के पार 72.5 मीटर लंबाई का एक नेविगेशनल स्पैन है।
  • यह पास के सबसे पुराने रेलवे ब्रिज से 3 मीटर ऊंचा है।
  • साथ में ही एक अतिरिक्त संरचना का भी निर्माण किया गया है ताकि जरूरत होने पर भविष्य में रेलवे ट्रैक की दोहरीकरण की जा सकें।
  • नये पंबन ब्रिज का निर्माण समुद्र तट से दूर किया गया है।
  • इसके डिजाइन को अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) ने अनुमोदन दिया है।
  • रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ सप्ताह में इस ब्रिज पर ट्रेन सेवाओं को शुरू करने की अनुमति दे दी जाएगी।

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