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पुणे के इन 6 गणपति मंदिरों में जरूर करें दर्शन, मन को मिलेगी शांति-पूरी होगी हर मनोकामना

पुणे को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। यहां की समृद्ध संस्कृति और परंपराएं अक्सर पर्यटकों को आकर्षित भी करती है और मराठी संस्कृति के साथ उनका परिचय भी करवाती है। लेकिन सबसे ज्यादा इस शहर में आने के बाद पर्यटक जिस चीज के प्रति आकर्षित होते हैं, वो हैं पुणे के विभिन्न गणेश मंदिर।

अगले सप्ताह से महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव शुरू होने वाला है। तो क्यों एक बार पुणे के उन सभी गणेश मंदिरों के बारे में और उनका इतिहास थोड़ा जान लिया जाए, जहां दर्शन करने के लिए दुनिया के हर कोने से लोग यहां आते हैं।

ganesh chaturthi 2024

1. श्रीमंत दगड़ु सेठ हलवाई गणपति मंदिर

यह भगवान गणेश को समर्पित शायद दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां भगवान को अपने भक्त से पहचान मिलती है। यह मंदिर निःस्वार्थ भक्ति का एक शानदार उदाहरण है। दगड़ु सेठ हलवाई मंदिर की स्थापना वर्ष 1893 में हुई थी। यह वह समय था जब भारत में प्लेग का प्रकोप फैला था।

प्लेग महामारी में अपने बेटे को खोने के बाद कोलकाता के रहने वाले दगड़ु सेठ हलवाई ने पुणे में इस मंदिर की स्थापना की थी। दगड़ु सेठ हलवाई के नाम पर ही इस मंदिर में भगवान का नाम पड़ा था। गणेश चतुर्थी के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने आते हैं।

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2. चिंतामणी मंदिर

पुणे से करीब 25 किमी की दूरी पर मौजूद चिंतामणी मंदिर अष्टविनायक मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान गणेश ने अपनी चिंतामणी को एक असुर से छिनकर उसे ऋषि कपिल को सौंप दिया था। मंदिर का वातावरण बहुत ही अध्यात्मिक है। यहां सिर्फ गणेशोत्सव ही नहीं बल्कि साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती हैं।

3. तम्बडी जोगेश्वरी गणपति मंदिर

पुणे के ऐतिहासिक शनिवार वाड़ा के पास ही तम्बडी जोगेश्वरी गणपति मंदिर स्थित है। यह मंदिर पुणे के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना मराठा साम्राज्य के पहले पेशवा बालाजी विश्वनाथ ने की थी। यह मंदिर भगवान गणेश के साथ-साथ जोगेश्वरी देवी को भी समर्पित है। यहां भगवान गणेश की मूर्ति लाल रंग की है, जिसे मराठी में तम्बडी (यानी लाल) कहा जाता है। मंदिर का अध्यात्मिक महत्व होने के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी काफी ज्यादा है। इस वजह से यहां भक्तों की भीड़ भी हमेशा उमड़ती रहती है।

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4. श्री महागणपति मंदिर

पुणे से लगभग 50 किमी की दूरी पर मौजूद राजनगांव में स्थित है श्रीमहागणपति मंदिर। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति स्वयंभू है। इस वजह से कहा जाता है कि इस मंदिर में मांगी जाने वाली हर मनोकामना भी पूरी होती है। मंदिर की वास्तुकला दूसरे मंदिरों की तुलना में काफी अलग है, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करता है।

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5. श्री मोर्या गोसावी गणपति मंदिर

पुणे के उपनगरीय शहर चिंचवाड़ा में मौजूद है 14वीं सदी में बना मोर्या गोसावी गणपति मंदिर। मान्यता है कि भगवान गणेश के भक्त मोर्या गोसावी को इसी स्थान पर ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मंदिर में एक छोटा सा तालाब है, जिसे काफी पवित्र माना जाता है। मंदिर के अंदर काफी ठंडक मिलती है, जिस वजह से मंदिर में प्रवेश करते ही जहां मन को सुकून मिलता है वहीं यहां अध्यात्मिक शांति भी बहुत मिलती है।

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6. श्री गणेश मंदिर, फुले मार्केट

पुणे के ऐतिहासिक फुले मार्केट में मौजूद है श्री गणेश मंदिर। यह इस शहर को एक पहचान दिलाता है। मंदिर में हर वक्त दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है। इस मंदिर की एक बड़ी खासिय इसका लोकेशन है, जहां पहुंचना बहुत आसान है। इस मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति की अपनी अलग ही विशेषता ही है। मंदिर प्रशासन की तरफ से अक्सर यहां विभिन्न तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। गणेश चतुर्थी के समय भी ऐसे आयोजन जरूर होंगे, जिनका भरपूर आनंद उठाने से मत चुकिएगा।

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