त्योहारों का सीजन अब शुरू होने ही वाला है। लोग त्योहारों पर घूमने जाने का प्लान भी बना रहे हैं। इसी सप्ताह में शुरू होगा गणेश चतुर्थी का उत्सव। तो क्यों इस मौके पर गोवा का प्लान बना लें। जी हां, गणेश चतुर्थी का त्योहार पर गोवा में एक अलग ही धूम मची होती है। यहां इसे 'चोवोथ' के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र के बाहर थोड़े अनोखे अंदाज में अगर गणेश चतुर्थी का उत्सव एंजॉय करना चाहते हैं तो गोवा का रूख कर सकते हैं।
छुट्टियों में घूमने के लिए यह हमेशा से ही पर्यटकों का फेवरेट डेस्टिनेशन भी रहा है और गोवा के फेस्टिवल्स में पर्यटक बड़े ही उत्साह के साथ हमेशा से ही शामिल भी होते रहे हैं।

तो क्यों न इस साल गणेश चतुर्थी पर गोवा में 'चोवोथ' फेस्टिवल का हिस्सा बनें :
कितने दिनों का होता है त्योहार?
आमतौर पर महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाता है। गोवा में भी अधिकांश घरों में गणेश चतुर्थी यानी 'चोवोथ' फेस्टिवल एक से डेढ़ दिन ही मनाया जाता है लेकिन कुछ गोवा के कुछ गांवों में यह 11 और कुछ गांवों या समुदायों में तो 9 से 21 दिनों तक भगवान गणेश की विशालाकार मूर्तियां स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है।
अगर गोवा में सबसे बड़े आकार के भगवान गणेश की मूर्तियां देखना चाहते हैं तो कम्भर्जुआ, मार्सेल और सेंट एस्तेवान गांवों की ओर निकल पड़े। ये सभी गांव पूरे गोवा में 'चोवोथ' फेस्टिवल के दौरान विशाल आकार की भगवान गणेश की मूर्तियों के लिए ही प्रसिद्ध हैं।
कैसे मनाया जाता है 'चोवोथ' फेस्टिवल?
मटोव (Matov) बनाना : गोवा में भी गणेश चतुर्थी के त्योहार की शुरुआत भगवान गणेश की मूर्ति के स्थापना के लिए पंडाल बनाने से ही होता है। लेकिन दूसरे राज्यों की तुलना में गोवा में पंडालों का निर्माण थोड़ा हटके होता है। चोवोथ के दिन सुबह में मूर्ति की स्थापना के लिए जिस पंडाल को तैयार किया जाता है, उसमें पान के पत्तों, नारियल, केला और आम के पेड़ की शाखाओं का इस्तेमाल करना अनिवार्य होता है। इसके बाद मिट्टी से बनी भगवान गणेश की आकर्षक मूर्तियों को इन पंडालों में स्थापित किया जाता है।
देखावा : गोवा के मार्सेल और कम्भर्जुआ गांवों में देखावा का भी परंपरागत रूप से आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न परिवारों और अलग-अलग समूहों द्वारा आकर्षक टैब्लो बनाया जाता है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त अलग-अलग टैब्लो पर जाते हैं और अपने प्रिय भगवान के दर्शन करते हैं।
सांगोड की परंपरा : कम्भर्जुआ गांव में चोवोथ के 7वें दिन सांगोड का आयोजन किया जाता है। यह भगवान गणेश का विसर्जन होता है, जिसे बड़े ही भव्य जुलूस के साथ किया गया है। गोवा के पर्यटन विभाग के आधिकारिक वेबसाइट पर स्थानीय व्यक्ति विनोद फाडते के हवाले से इस परंपरा के बारे में जानकारी दी गयी है कि पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा के श्री शांतादुर्गा कम्भर्जुवेकरीन मंदिर को कोर्लिम से पहले कम्भर्जुआ और फिर मार्सेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।
उस समय कम्भर्जुआ का एक व्यापारी, जो आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, ने भगवान गणेश की मूर्ति को मंदिर में ही छोड़ दिया था। कहा जाता है कि इसके बाद चोवोथ के 7वें दिन देवीचो सांगोड का आयोजन कर भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जित किया गया था। बाद में इस परंपरा को कम्भर्जुआ सांगोड फेस्टिवल के तौर पर मनाया जाने लगा।
इस फेस्टिवल में नावों को बहुत ही आकर्षक तरीके से विभिन्न मुद्दों पर सजाया जाता है, जिसमें कभी पौराणिक गाथाएं तो कभी ऐतिहासिक कथाएं और कभी सामाजिक या राजनीतिक घटनाओं की झलक मिलती है। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग भी इन किरदारों की तरह ही सजकर नाचते-गाते इसे एक जुलूस की तरह निकालते हैं। अगर आप इस जुलूस को देखना चाहते हैं तो कम्भर्जुआ कैनल पर जा सकते हैं, जहां से यह स्पष्ट नजर आता है।
मातोली (Matoli) : गोवा के गणेश चतुर्थी यानी चोवोथ का एक प्रमुख हिस्सा मातोली को माना जाता है। यह कोई वस्तु नहीं बल्कि परंपरागत तरीके से की गयी सजावट होती है। इसमें 100 से भी अधिक प्रकार की प्राकृतिक वस्तुओं से भगवान गणेश की मूर्तियों के आसपास की सजावट की जाती है।
पान के पत्ते, नारियल, स्थानीय विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे, फल, फूल, स्थानीय खीरे, तरबूज और भी कई तरह की चीजों का इस्तेमाल भगवान की मूर्ति के आसपास को सजाने के लिए किया जाता है। इस सजावट में कई बार कई जंगली फलों का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें स्थानीय लोग खाते भी हैं।



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