गंगटोक, सिक्किम की राजधानी होने के साथ-साथ राज्य का सबसे बड़ा व खूबसूरत शहर है, जो बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत ही पवित्र स्थान भी है। यहां आपको ऊंचे-ऊंचे पहाड़, बर्फ से ढकी चोटियां देखने को मिलेंगी, जो आपकी यात्रा को और भी शानदार और रोमांचक बना देती हैं। इसके अलावा आप यहां के प्राचीन मंदिर, महल और मठों का भी आनंद ले सकते हैं।
पूर्वी हिमालय रेंज में शिवालिक पहाड़ियों पर बसा ये शहर अपनी ताजी हवाओं, वनों, पहाड़ों, घाटियों और बर्फीली चोटियों के लिए जाना जाता है। सर्दी के मौसम में इसकी खूबसूरती देखने लायक बनती है। इसके लिए यह देश के सबसे अच्छे ट्रेकिंग स्पाट के लिए भी जाना जाता है। रानीपूल नदी के पश्चिम की ओर बसे इस शहर से कंचनजंघा शिखर की संपूर्ण शृंखला भी दिखाई देती है।
दो द्रूल चोर्टेन - Do Drul Chorten
दो द्रूल चोर्टेन, गंगटोक के मुख्य आकर्षणों में से एक है। इसे सिक्किम का सबसे महत्वपूर्ण स्तूप माना जाता है। इसकी स्थापना त्रुलुसी रिमपोचे ने 1945 ईस्वी में की थी, जो तिब्बतियन बौद्ध धर्म के नियंगमा सम्प्रदाय के प्रमुख थे। इस मठ का शिखर सोने का बना हुआ है। इसमें 108 प्रार्थना चक्र है, जहां गुरु रिमपोचे की दो प्रतिमाएं भी स्थापित है।

ताशिलिंग - Tashiling
ताशीलिंग, गंगटोक शहर से 6 किमी की दूरी पर स्थित है। इस प्राकृतिक स्थान से कंचनजंघा की पर्वतमाला काफी सुंदर व सुनहरी दिखाई देती है। यह मठ मुख्य रुप से एक पवित्र बर्तन बूमचू के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इस बर्तन में पवित्र जल रखा हुआ है, जो पिछले 300 सालों से इसमें रखा हुआ है और यह कभी सूखता नहीं है।
नाथुला दर्रा - Nathula Pass
भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथुला दर्रा 14,200 फीट की ऊंचाई पर है, यह सिक्किम को चीन के तिब्बत स्वशासी क्षेत्र से जोड़ता है। धुंध से ढंकी पहाड़ियां, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, गरजते झरने और यहां के रास्ते देखने लायक बनते हैं। मुख्य शहर से करीब 55 किमी की दूरी पर स्थित नाथुला दर्रा तक सभी नहीं जा सकते हैं। लेकिन अनुमति लेकर यहां भारतीय पर्यटकों को बुधवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को जाया जा सकता है।

रुमटेक मोनेस्ट्री - Rumtek Monastery
वैसे तो गंगटोक में कई मोनेस्ट्रीज हैं, इनमें से कुछ तो सैकड़ों साल पुराने है। इनमें सबसे पहले नंबर पर आता है यहां का रुमटेक मोनेस्ट्री, जो सबसे प्राचीन है। इसका निर्माण साल 1700 में किया गया था और देश का सबसे बड़ा बौद्ध धर्म सीखने का सेंटर भी है।
पमेयंगसे मोनिस्ट्री - Pamyangse Monastery
ये सिक्किम की दूसरी सबसे पुरानी मोनिस्ट्री है। इसे 1705 ईस्वी में लामा लहातसुन चैंपो ने डिजाइन किया था और इसकी अनुठी वास्तुकला के चलते ही पर्यटक इसे काफी दूर-दूर से देखने के लिए आते हैं।
एमजी मार्ग - MG Marg
गंगटोक गए और यहां के स्ट्रीट फूड का स्वाद नहीं चखा तो क्या चखा। ऐसे में आप यहां के एमजी मार्ग जा सकते हैं। यहां आपको कई तरह के व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका मिलेगा। खाने के साथ-साथ खिड़की से पहाड़ों की खूबसूरती का व्यू देखना कितना जबरदस्त होता है, इसका अंदाजा भी आप यहां से लगा सकते हैं।

सोमगो झील - Somgo Lake
सोमगो झील, गंगटोक से करीब 40 किमी की दूरी पर स्थित है। चारों ओर बर्फीली पहाड़ियों से घिरा हुआ यह झील करीब एक किमी लंबा और 50 फीट गहरा है। सर्दी के मौसम में यहां विभिन्न प्रजातियों के विदेशी पक्षी आते हैं, जो यहां के आकर्षण का केंद्र भी है। इस झील से आगे केवल एक सड़क जाती है। यही सड़क आगे नाथूला दर्रे तक जाती है। यह सड़क आम लोगों के लिए नहीं है। लेकिन सेना की अनुमति लेकर यहां तक जाया जा सकता है।
हिमालयन जूलॉजिकल पार्क - Himalayan Zoological Park
हिमालयन जूलॉजिकल पार्क, गंगटोक शहर से करीब 8 किमी की दूरी पर स्थित है। 205 एकड़ जमीन में फैले हुए इस पार्क में आप काकड़, पांडा, पैंथर्स, तिब्बती भेड़िये, कस्तूरी बिल्लियां और हिमालयी काले भालू जैसे जानवरों को देख सकते हैं। इसके अलावा यहां रहने वाले दो बहुत ही दिलचस्प प्राणी हैं- 'कुश' और 'उर्बशी'। ये राजसी बर्फ के तेंदुए की एक जोड़ी है, जो यहां के मुख्य आकर्षण का केंद्र है।
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