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गोवा का 'चिखल कालो' मानसून फेस्टिवल, कीचड़ से सन कर मनाते हैं खुशियां, कब मनाया जाएगा?

मानसून की बारिश गोवा में शुरू होने ही वाली है। मौसम विभाग की ओर से गोवा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गयी है। इस समय समुद्रतटों पर घूमने के लिए बिल्कुल सही माना जाता है। काले घने बादलों से ढंका आसमान और नीचे गहरा समुद्र एक अलग तरह की सुन्दरता ही बिखेरता है लेकिन ऐसे समय में समुद्र में तैराकी या मछली पकड़ना खतरे से खाली नहीं होता है।

मानसून के इसी मौसम में गोवा में कई तरह के फेस्टिवल मनाएं जाते हैं, जिनमें से अधिकांश मानसून फेस्टिवल जून में ही मनाए जाते हैं। इनमें से ही एक मानसून फेस्टिवल है 'चिखल कालो' फेस्टिवल।

goa chikhal kalo mud festival

गोवा का 'चिखल कालो' फेस्टिवल एक मड फेस्टिवल है, जिसे किसानों के साथ प्रकृति और खासतौर पर मानसून के संबंध को गहरा बनाने के मनाया जाता है। इस फेस्टिवल को The Mud Festival भी कहा जाता है। इस फेस्टिवल को भगवान श्रीकृष्ण और उनकी मां देवकी के रिश्ते को भी समर्पित कर मनाया जाता है।

यह एक ऐसा फेस्टिवल है, जिसमें कीचड़ में लोटपोट होने के बावजूद मम्मी आपको डांटने वाली नहीं है। तो अगर आप जून में मानसून का लुत्फ उठाने के लिए गोवा जाने का प्लान बना रहे हैं तो चिखल कालो फेस्टिवल में शामिल होने की जरूर कोशिश करें।

आइए आपको इस फेस्टिवल के बारे में Details में बताते हैं :

क्या होता है 'चिखल कालो' फेस्टिवल

'चिखल कालो' फेस्टिवल मानसून के समय गोवा में मनाया जाने वाले प्रमुख लोकल फेस्टिवल्स में से एक है, जो मूल रूप से मड बाथ (Mud Bath) फेस्टिवल होता है। इसे गोवा के किसानों और धरती मां के बीच के आपसी रिश्ते की खासियतों को दर्शाने के लिए ही मनाया जाता है।

हर साल जून के महीने में 3 दिनों के लिए यह फेस्टिवल मनाया जाता है। भले ही इस फेस्टिवल को लोग मिट्टी और कीचड़ में लोटपोट कर मनाते हैं लेकिन इसे ही चिखल कालो की परंपरा मानते हुए स्थानीय लोग खुशी-खुशी इसमें शामिल होते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, चिखल-कालो फेस्टिवल में स्थानीय लोगों का उत्साह देखकर उस समय यहां मौजूद रहने वाले पर्यटक भी खुद को रोक नहीं पाते हैं।

the mud festival goa chikhal kalo

कहां मनाया जाता है 'चिखल कालो' फेस्टिवल

गोवा में चिखल कालो फेस्टिवल मार्सेल गांव, जो राजधानी पणजी से महज 20 किमी की दूरी पर मौजूद है, में मनाया जाता है। मार्सेल एक छोटा सा गांव है, जिसके देवकी-कृष्ण मंदिर के मैदान में चिखल कालो मनाया जाता है। 'चिखल कालो' फेस्टिवल हर साल हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने की 11वीं तारीख को मनाया जाता है, जब मानसून अपने पूरे शबाब पर होता है।

बारिश की वजह से मैदान पूरी तरह से कीचड़ से भर चुका होता है। भले ही किसी और फेस्टिवल की खुशियों में बारिश और कीचड़ खलल डालते हो लेकिन 'चिखल कालो' फेस्टिवल की खुशियों को कीचड़ और बारिश दोगुना बना देते हैं।

श्रीकृष्ण और मां देवकी से गहरा रिश्ता

'चिखल कालो' फेस्टिवल का केंद्र बिन्दू देवकी-कृष्ण मंदिर है। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जो श्रीकृष्ण और उनकी मां देवकी को समर्पित है। जिस तरह श्रीकृष्ण अपने बचपन में कीचड़ से सन कर कई तरह की लीलाएं किया करते थे, यह फेस्टिवल भी उन्हीं लीलाओं का ही प्रतिक माना जाता है। मुख्य दिन से एक दिन पहले इस फेस्टिवल की शुरुआत होती है। मंदिर को पारंपरिक तरीके से सजाया जाता है। मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीकृष्ण और माता देवकी की पूजा भजन के साथ शुरू करते हैं जिसके साथ ही इस फेस्टिवल का आगाज हो जाता है।

फेस्टिवल के दूसरे दिन मंदिर के मैदान में गांव के सभी पुरुष इकट्ठा होते हैं। उन्हें पवित्र तेल और प्रसाद दिया जाता है। जिसके बाद पारंपरिक नृत्य के साथ कीचड़ के साथ खेलना शुरू होता है। 'चिखल कालो' फेस्टिवल के दौरान कई तरह के खेल भी खेले जाते हैं, जैसे चेंदु फली (क्रिकेट की तरह का खेल) और गिल्ली डंडा आदि। इस फेस्टिवल में ऐसे खेल ज्यादा खेले जाते हैं, जिसमें कीचड़ और मिट्टी में लोटपोट होने का मौका मिल सकें। 'चिखल कालो' फेस्टिवल में हर उम्र के लोग हिस्सा लेते हैं।

कब मनाया जाएगा 'चिखल कालो' फेस्टिवल

इस साल 'चिखल कालो' फेस्टिवल गोवा के मार्सेल में स्थित देवकी-कृष्ण मंदिर के मैदान में 28 से 30 जून तक मनाया जाएगा। खास तौर पर 30 जून को मिट्टी से सन कर सभी खेल खेले जाएंगे जिसे इस फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण माना जाता है। अगर उस समय आप पणजी या मार्सेल गांव के आसपास मौजूद हो तो 30 जून की सुबह ठीक 11.30 बजे देवकी-कृष्ण मंदिर के मैदान में पहुंचना मत भूलें।

कब कौन सा है प्रोग्राम

तारीख समय कार्यक्रम
28 जून सुबह 7-7.15

दीप प्रज्जवलन

भक्ति संगीत (प्रियंका रायकर, नेशनल अवॉर्ड विजेता राहुत देशपांडे और ग्रुप)

29 जून सुबह 8 बजे से भक्तितरंग
30 जून

सुबह 11-1.30 बजे तक

दोपहर 2.30 बजे से

चिखल कालो (कीचड़ में पारंपरिक खेल)

मंदिर में आरती और पूजा

*Goa App से मिली जानकारी के आधार पर

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