मानसून के शुरू होने के साथ ही जंगल, वन्यजीव अभयारण्य और नेशनल पार्क के बंद होने की खबरें आने लगती हैं। लेकिन गोवा का भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी (Bhagwan Mahaveer Wildlife Sanctuary) और मोल्लम नेशनल पार्क (Mollem Nation Park) ऐसी जगह है जो मानसून में बारिश की बूंदों के साथ ही जिंदादिल हो उठता है।
मानसून में जब बारिश होती है तो यह वाइल्डलाइफ सेंचुरी एक अलग ही Magical दुनिया में बदल जाता है। मानसून के समय वाइल्डलाइफ सेंचुरी अपने दोनों बाहें फैलाकर पर्यटकों का अपनी जादुई दुनिया में स्वागत करता है।

पश्चिमी घाट में स्थित यह वन्यजीव अभयारण्य मानसून के समय हरियाली से भर जाता है। अगर वन्य प्राणियों की बात की जाए तो भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी तेंदुआ, हाथियों, चित्तिदार हिरण, माउस हिरण, बाघ, पैंथर, टोड्डी कैट और कई प्रजातियों के पक्षियों का घर है।
इसी अभयारण्य से होकर दुधसागर वाटरफॉल तक के लिए जीप राइड भी मिलती है। हालांकि मानसून के शुरू होने के साथ ही दुधसागर वाटरफॉल पर पर्यटकों के प्रवेश को भी बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा तांबडी फॉल, डेविल्स कनयोन आदि हैं, जिन्हें मानसून के समय अभयारण्य में एक्सप्लोर किया जा सकता है।
साल 1969 में गोवा-कर्नाटक बॉर्डर पर स्थित लगभग 240 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले इस जंगल का नाम मोल्लेम गेम्स सेंचुरी रखा गया था। लेकिन बाद में वर्ष 1978 में घने जंगल वाला लगभग 107 वर्ग किमी के हिस्से को मोल्लम नेशनल पार्क का नाम दिया गया और जो भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा बना। मिली जानकारी के अनुसार इस अभयारण्य में करीब 700 प्रकार के फूलों और लगभग 128 प्रजातियों के विलुप्तप्राय पौधे पाए जाते हैं।

वन्यजीव अभयारण्य की जादुई दुनिया
मानसून के समय हर जंगल और अभयारण्य में हरियाली बढ़ जाती है। लेकिन भगवान महावीर अभयारण्य में वास्तव में कुछ ऐसा होता है जो मानसून के समय इसे न सिर्फ सुन्दर बल्कि जादुई दुनिया बना देती है। एक ऐसी दुनिया जो शाम को सूरज ढलने के साथ ही चमकने लगती है।
भगवान महावीर अभयारण्य का एक हिस्से में शाम को सूरज ढलने के बाद ही पेड़ों के झुरमुट से आपको कुछ चमकता दिखाई देगा। नहीं, यह जुगनू नहीं बल्कि कुछ और ही होता है। कुछ ऐसा जिसे आप या हम बड़ी आसानी से पहचान लेते हैं।
क्यों चमकने लगता है जंगल
भगवान महावीर अभयारण्य में माइसेना नाम के छोटे-छोटे मशरुम पाए जाते हैं। इन मशरुम की सबसे बड़ी खासियत होती है कि जब भी वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ती है तो ये मशरुम चमकने लगते हैं। दिन के समय में तो इनकी चमक उतनी ज्यादा दिखाई नहीं देती है लेकिन जैसे ही शाम को सूरज ढ़लता है माइसेना मशरुम की चमक भी दिखाई देने लगती है। तब यह जंगल एक जादुई दुनिया की तरह लगने लगती है।

कहां है भगवान महावीर अभयारण्य
भगवान महावीर अभयारण्य गोवा के धारबंदोरा तालुका में स्थित है। यह गोवा की राजधानी पणजी से लगभग 57 किमी पर स्थित है। वहीं इसी अभयारण्य का एक हिस्सा, जिसे मोल्लेम नेशनल पार्क कहा जाता है वह पणजी से लगभग 70 किमी की दूरी पर मौजूद है। इस नेशनल पार्क या अभयारण्य तक पहुंचने के लिए आपको किराए पर निजी गाड़ियां भी मिल जाएंगी।
कैसे पहुंचे वन्यजीव अभयारण्य
- ट्रेन द्वारा यहां पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन कोल्लम रेलवे स्टेशन है, जहां से आपको नेशनल पार्क तक का सफर किराए पर गाड़ी लेकर ही तय करनी पड़ेगी। इस स्टेशन पर गोवा एक्सप्रेस, अमरावती एक्सप्रेस, पूर्णा एक्सप्रेस आदि ट्रेन रुकती हैं।
- गोवा का दाबोलिम एयरपोर्ट मोल्लम नेशनल पार्क से करीब 65-70 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां से भी आपको गाड़ियां मिल जाएंगी जिनसे आप कोल्लम नेशनल पार्क बड़ी आसानी से पहुंच सकेंगे।



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