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मानसून ट्रिप पर जाना चाहते हैं गोवा तो इन फेस्टिवल्स के आसपास बनाएं अपना प्लान

मानसून की शुरुआत के साथ ही गोवा में खासतौर पर मानसून के समय मनाये जाने वाले फेस्टिवल्स की शुरुआत भी हो जाती है। इन फेस्टिवल्स के माध्यम से पार्टी डेस्टिनेशन गोवा की संस्कृति और धार्मिक अनुष्ठानों के बारे में जानने का मौका मिलता है। कई बार पर्यटक मानसून के समय गोवा जाने का प्लान बनाते हैं। मानसून में गोवा तुलनात्मक रूप से खाली और थोड़ा सस्ता होता है, इस वजह से पर्यटक मानसून में गोवा जाने का प्लान बनाते हैं।

लेकिन हमारी मानें तो अगर आपने भी मानसून में गोवा जाने का मन बना लिया है तो अपना प्लान इन मानसून स्पेशल फेस्टिवल के आसपास के समय बनाएं। यह Once in a lifetime अनुभव होगा। गोवा में अधिकांश मानसून फेस्टिवल जून के महीने में ही मनाएं जाते हैं।

Sao Joao Festival

गोवा के मानसून फेस्टिवल्स :

साओ जोआओ फेस्टिवल (Sao Joao Festival)

गोवा का यह मानसून फेस्टिवल पूरे राज्य में मनाया जाता है। इस फेस्टिवल को सेंट जॉन द बैपटिस्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह फेस्टिवल वाटर एक्टिविटी से जुड़ा हुआ है, जिसमें लोग कुंओं, नदियों और तालाबों में कूद कर ढेर सारी मस्ती करते हैं। इस फेस्टिवल में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी समान रूप से हिस्सा लेते हैं। हर साल साओ जोआओ फेस्टिवल गोवा में 24 जून को मनाया जाता है। यह फेस्टिवल नॉर्थ गोवा के सिओलीम में शाम को 3.30 से 5.30 बजे के बीच मनाया जाएगा।

chikhal kalo festival

चिखल कालो फेस्टिवल (Chikhal Kalo Festival)

यह एक धार्मिक फेस्टिवल है, जिसे 'The Mud Festival' के नाम से भी जाना जाता है। इस फेस्टिवल का केंद्र गोवा के मार्सेल गांव का श्रीकृष्ण-देवकी मंदिर होता है, जिसके परिसर में इसका आयोजन किया जाता है। 3 दिनों तक मनाये जाने वाले इस फेस्टिवल में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी हिस्सा लेते हैं। फेस्टिवल की शुरुआत श्रीकृष्ण और मां देवकी की पूजा और भजन के साथ होती है।

उसके बाद मंदिर के मैदान में लोग कीचड़ में लोटपोट कर श्रीकृष्ण के बचपन की लीलाओं का आनंद उठाते हैं। इसके बाद बारिश और कीचड़ के बीच ही मैदान में पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है। इस साल चिखल कालो फेस्टिवल 28 से 30 जून तक मनाया जाएगा।

Sangodd Festival

सांगोड फेस्टिवल (Sangodd Festival)

साल में एक बार मनाया जाने वाला सांगोड फेस्टिवल गोवा के मछली पकड़ने वाले समुदाय का पारंपरिक फेस्टिवल है, जिसे नाव उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस फेस्टिवल को रैंपन मछली पकड़ने के मौसम के शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। इस फेस्टिवल में नावों को जोड़कर समुद्र पर एक स्टेज जैसा बनाया जाता है। उसे नारियल के पत्तों, फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया जाता है। इसके बाद पारंपरिक कपड़ों में मछुआरे लोक नृत्य, गाने, नाटक आदि से खुद का और दर्शको का मनोरंजन करते हैं। यह फेस्टिवल हर साल 29 जून को मनाया जाता है।

टौक्सेचेम फेस्टिवल (Toxecheam Festival)

गोवा में मानसून के समय मनाया जाने वाला यह फेस्टिवल मूल रूप से खीरे का फेस्टिवल होता है। दरअसल, मानसून के मौसम में खीरे की बहुतायत को दर्शाने वाले इस फेस्टिवल में सेंट ऑन को खीरे चढ़ाये जाते हैं। इसमें लोग दो खीरे लेकर आते हैं और एक खीरे को अवर लेडी के चरणों में रख दिया जाता है जबकि दूसरे खीरे को पवित्र प्रतिमा से स्पर्श करवाया जाता है।

इसके बाद खीरे को स्थानीय लोगों, पुजारियों और आसपास के गांवों में वितरित कर दिया जाता है। इस साल टौक्सेचेम फेस्टिवल 31 जुलाई को संताना चर्च, टालैउम में सुबह 8 बजे से मनाया जाएगा।

Bonderam Festival

बोंडेरम फेस्टिवल (Bonderam Festival)

यह फेस्टिवल अगस्त महीने के चौथे शनिवार को आयोजित होता है। इसमें एक रंगीन परेड निकाली जाती है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच नकली लड़ाई होती है। हर समूह जीतने की होड़ में रहता है। इस उत्सव में बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल होते हैं। जो इसके समापन संगीत, नृत्य और स्वादिष्ट भोजन के साथ गोवा के इस फेस्टिवल को और भी उत्साही बना देते हैं।

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