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द्रौपदी संग पांडव भी गये थे गोवा, गवाही देती हैं ये गुफाएं

अधिकांश समय हम गोवा के इतिहास को पुर्तगाली उपनिवेश के तौर पर ही देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, हिंदू धर्म के साथ भी गोवा का काफी गहरा जुड़ाव रहा है। महाभारतकाल में पांडव भी अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ गोवा में आए थे। उत्तर गोवा में मौजूद गुफाएं इसकी गवाही भी देती हैं। अरे जरा रुक जाइए।

इतनी तेजी से अपने दिमाग के घोड़े मत दौड़ाइए। पांडव द्रौपदी के साथ गोवा में समुद्रतट के मनोरम दृष्यों का लुत्फ उठाने नहीं बल्कि अपने वनवासकाल के दौरान आए थे। अगर आप गोवा के समुद्रतट से कुछ अलग इतिहास के झरोखे में झांकना चाहते हैं तो सीधे चले आइए नॉर्थ गोवा के अर्वालेम गुफाओं में। ये गुफाएं ऐसी जगह हैं, जो गोवा की बीच और नाइट लाइफ से अलग काफी कुछ बताती हैं।

goa arvalem caves

अर्वालेम गुफाओं को स्थानीय लोग पांडवों की गुफा नाम से भी पुकारते हैं। कहा जाता है कि अपने वनवास के दौरान पांडव इन गुफाओं में रहा करते थे। हालांकि इस बात को साबित करते हुए कोई पुख्ता सबूत यहां अभी तक नहीं मिल पाएं हैं। ये गुफाएं उत्तर गोवा के संक्लिम गांव में मौजूद हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पहाड़ी चट्टानों को काटकर इन गुफाओं का निर्माण 6वीं या 7वीं शताब्दी के दौरान किया गया था। हालांकि वास्तुकला के दृष्टिकोण से इन गुफाओं की अजंता और एलोरा की गुफाओं से समानता होने की वजह से यह भी माना जाता है कि इनका निर्माण बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने किया होगा।

बताया जाता है कि एक ही लेटराइट चट्टान को काटकर उससे 5 अलग-अलग गुफाएं बनायी गयी हैं। इनमें से सबसे बीच वाली गुफा आकार में सबसे बड़ी है, जिसके मध्य में एक शिवलिंग स्थापित है। इससे पता चलता है कि इन गुफाओं के निर्माता भगवान शिव के उपासक थे। इसी की वजह से इन गुफाओं का काफी धार्मिक महत्व भी है।

shivlingam in arvalem caves goa

गोवा के ग्रामीण इलाके में स्थित होने के बावजूद श्रद्धालु यहां स्थापित शिवलिंग के दर्शन करने आते रहते हैं। हालांकि लंबे समय से मौसम की मार झेलने के कारण इन गुफाओं को थोड़ी सी क्षति भी पहुंची है।

अर्वालेम गुफाओं से थोड़ी दूरी पर मौजूद है गोवा का प्रसिद्ध अर्वालेम झरना। मानसून के मौसम में इस झरने पर घूमने काफी संख्या में पर्यटक आते रहते हैं। खासतौर पर जून से सितंबर के महीने में यह झरना अपने पूरे शबाब पर होता है। अगर आपको रोमांचक जगहों पर जाना या ट्रेकिंग करना पसंद है तो इस झरने के पास ही स्थिति रुद्रेश्वर महादेव के मंदिर में जा सकते हैं।

caves in goa offbeat place

हालांकि इस मंदिर तक जाने का रास्ता कई बार खतरनाक भी बन जाता है। इसलिए हमारी सलाह है कि अधिक जोखिम न उठाएं। खासतौर पर जब झरने में पानी का बहाव तेज होता है, तब पत्थर पर फिसलन भी ज्यादा होने लगती है और झरने के मुहाने पर स्थित पत्थरों पर फिसलने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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