नॉर्थ या फिर साउथ गोवा की Beaches जहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। लोग समुद्री नजारों और कई तरह की वाटर एक्टिविटी को एंजॉय करते हैं। लेकिन अक्सर लोग गोवा के गलगीबागा बीच के बारे भूल जाते हैं या फिर ज्यादातर पर्यटकों को इस बीच के बारे में पता ही नहीं होता है।
गोवा का एक हिडेन जेम है गलगीबागा बीच, जिसकी प्राकृतिक सुन्दरता, वाइल्ड लाइफ और वातावरण पर्यटकों को रिलैक्स्ड फील तो करवाएगी ही, लेकिन और भी कुछ खास है जो इस बीच पर पर्यटकों को चौंका देती है।

गलगीबागा बीच ओलिव रिडले कछुओं के प्रजनन की प्रमुख जगह है। साल दर साल ये दुर्लभ समुद्री कछुए गलगीबागा बीच की नर्म रेतों में अपना घोंसला बनाते और उनमें अंडे देते हैं। पर्यटकों को इस बीच पर घूमने की अनुमति तो होती है लेकिन उनसे खासतौर पर अनुरोध किया जाता है वे कछुओं के घोसलों और घोसले बनाने के लिए जो जगह निर्धारित रहती है, उनसे सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। घोसला बनाने या अंडे देते समय कछुओं को किसी भी प्रकार से परेशान न करें।
कब आते हैं अंडा देने आते हैं कछुए

हर साल गोवा के समुद्रतटों पर दुर्लभ ओलिव रिडले कछुए अपनी प्रजनन प्रक्रिया को पूरा करने और घोसला बनाकर उसमें अंडे देने आते हैं। हर साल नवंबर से अप्रैल के महीने के बीच में बड़ी संख्या में ये दुर्लभ समुद्री कछुए समुद्रतट पर अपना घोसला बनाकर उसमें अंडे देने आते हैं। हर मादा कछुआ अपना अलग घोसला बनाती है और सैंकड़ों की संख्या में उसमें अंडे देती है।

अंडों से नन्हें-मुन्ने कछुओं की सेना को बाहर निकलने में लगभग 40-50 दिनों का समय लगता है। अंडों से बाहर निकलने के बाद ही इन नवजात कछुओं की समुद्र में वापस जाने की रेस शुरू होती है। लेकिन इस सफर को 100 में से महज 10 कछुए ही पूरा कर पाते हैं। वहीं समुद्र में पहुंचने वाले कछुओं में से भी काफी संख्या में ही कछुए ऐसे होते हैं जो वयस्क होने तक जीवित रह पाते हैं।
Also Read To Know More Abour Rare Olive Ridley Turtle :
कहां से गलगीबागा बीच
गलगीबागा बीच नॉर्थ गोवा में स्थित है। यह गोवा के एक प्रमुख शहर मडगांव से महज 1 घंटे की दूरी पर स्थित है। इस बीच तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क मौजूद है। इस बीच तक पहुंचने के लिए आपको गोवा में आसानी से स्कूटर या गाड़ी किराए पर मिल जाएगी। हर साल सूर्यास्त के बाद ही मादा ओलिव रिडले कछुए समुद्र से बाहर निकलकर गलगीबागा बीच पर रेंगती हुई कुछ आगे बढ़ती है।

इसके बाद वे अपने लिए एक घोसला तैयार करती हैं, जिसमें वह देर रात तक 100 से 150 अंडे देती है। इसके बाद मादा कछुए समुद्रतट की नर्म गीली रेत से अपने घोसलों को हल्का सा ढंक देती हैं और अहले सुबह इन मादा कछुओं का समुद्र में वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो जाता है। बता दें, अंडों से निकलने वाले कछुओं का लिंग इस बात पर निर्भर करता है कि अंडे गर्म वातावरण या फिर ठंडे वातावरण में थे।



Click it and Unblock the Notifications











