
छत्तीसगढ़ भारत का एक खूबसूरत राज्य है, जो अपनी लोक कला-संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। वन्य जीव, वनस्पति और खनिज संपदा के लिए यह राज्य काफी समृद्ध है। छत्तीसगढ़ में कई वन्यजीव अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान हैं जो प्रकृति प्रेमियों का अपनी ओर खींचते हैं।
ऐसे तो छत्तीसगढ़ में असंख्य जीव जन्तुओं की प्रजातियां पाई जाती हैं लेकिन इस समय दो खास दुर्लभ जीव प्रजातियों ने छत्तीसगढ़ को नई पहचान देने का काम किया है। ये दो दुर्लभ प्रजातियां छत्तीसगढ़ के गांवों में देखी गई हैं। आइए जानते हैं इन खास जीव प्रजातियों के बारे में, जिसको लेकर जीव तस्कर मुंह से लार टकपा रहे हैं।

गिरगिट की खास प्रजाति
अपने शरीर का रंग बदलने वाले गिरगिट के बारे में तो आपने सुना ही होगा, जिसे अंग्रेजी में 'चमिलीअन' कहा जाता है। काफी फुर्तीला यह जीव कई मायनों पर इंसान के लिए घातक भी हो जाता है। कुछ समय अंतराल के दौरान छत्तीसगढ़ में गिरगिट की हरे रंग की दुर्लभ प्रजाती देखी जा चुकी है।
राज्य के जशनपुरनगर में दुर्लभ 'ग्रीन चमिलीअन' देखी गई थी। जो जिले के तस्करों ने पकड़ लिया था, लेकिन वो उनके हाथ से छूट गई थी। और अब राज्य के दुलदुला क्षेत्र के पतरोटोली में यह जीव फिर से देखा गया है।

जंगल में छोड़ा गया जीव
पहली बार यह जीव गायब हो गया था लेकिन दूसरी बार मिलने के बाद इसे सुरक्षा के साथ जंगल में छोड़ दिया गया है। जीव को सुरक्षित जगह छोड़ने का काम राज्य में पर्यावरण को लेकर काम कर रही एक स्वयंसेवी संस्था ने किया है।
अगर यह जीव तस्करों के हाथ लग जाता तो वे उसे अतंरराष्ट्रीय बाजार में बेच डालते । जानकारी से पता चला है इस दुर्लभ जीव की कीमत बहुत ज्यादा है। आगे जानिए इस जीव से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।

एक चमत्कारी जीव
वन्य जीव से जुड़े जानकारों की मानें तो यह ग्रीन चमिलीअन एक चमत्कारी जीव है, जिसकी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लाखों में कीमत है। अकसर देखा गया है कि तस्कर इस तरह के दुर्लभ जीवों को अपना शिकार बनाते हैं।
ग्रीन चमिलीअन की इसलिए ज्यादा मांग है क्योंकि इसका इस्तेमाल औषधी बनाने के लिए किया जाता है। कई तरह की लाइलाज बीमारियों के लिए इस खास गिरगिट का इस्तेमाल किया जाता है।

जीव की खास विशेषता
विशेषज्ञों की मानें तो तो ग्रीन चमिलीअन एक खास जीव है, जो बिलकुल भी तनाव बर्दाश्त नहीं कर सकता है। अगर इसे कैद करने की कोशिश की गई तो यह मर जाता है। इसलिए गिरगिट की यह खास प्रजाति को दुर्लभ श्रेणी में रखा गया है। इस ग्रीन गिरगिट की एक और खास बात यह है कि यह अपनी दोनों आंखों का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग दिशाओं को देख सकता है।
दुश्मनों पर नजर रखने के लिए यह प्रकृति द्वारा मिला एक वरदान है। और यह तो सब जानते हैं कि गिरगिट अपना रंग बदलने की विशेषता के लिए ही ज्यादा जाना जाता है।

गिरगिट के साथ दुर्लभ छिपकली
बता दें कि ग्रीन चमिलीअन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के जशपुर में एक दूसरी दुर्लभ प्रजाती मिली है, यह है 'पर्ड गेको छिपकली'। यह सामान्य छिपकली की सबसे दुर्लभ प्रजाति है, जो जिले के किसी गांव में देखी गयी थी। जिसके बाद वन्य जीव और पर्यावरण सुरक्षा के लिए काम कर रही एक संस्था द्वारा इसे जंगल में छोड़ दिया गया था।
इस खास छिपकली की विशेषता यह कि इसमें बिलकुल भी जहर नहीं होता। लेकिन अगर आप इसके करीब जाएंगे तो यह अजीब सी आवाज निकालती है।



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