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गुजरात में खुला देश का पहला पुरातत्व अनुभव म्यूजियम, पीएम मोदी से गहरा रिश्ता - लोकेशन व लागत

गुजरात में खुला देश का पहला पुरातत्व अनुभव संग्रहालय (Archaeological Experience Museum)। इस म्यूजियम का उद्घाटन 16 जनवरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की लेकिन इस म्यूजियम की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसका बड़ा ही गहरा रिश्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। बता दें, उत्तरायण के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह 3 दिनों के गुजरात दौरे पर गये हुए हैं।

इस म्यूजियम के साथ ही गृहमंत्री ने और भी कई परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। पर कहां खुला है पुरातत्व अनुभव संग्रहालय जिसे बनाने की लागत करीब ₹298 करोड़ बतायी जाती है? क्या है इस आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम की खासियतें? कौन सी ऐसी विशेषता है जो इसे दूसरे आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम से अलग बनाती है?

vadnagar museum gujarat

गुजरात में कहां खुला है नया आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम?

गुजरात के वडनगर में नया आर्कियोलॉजिकल अनुभव संग्रहालय खुला है जो अपनी तरह का देशभर में पहला म्यूजियम है। गुरुवार (16 जनवरी) को गृहमंत्री अमित शाह ने इस म्यूजियम का उद्घाटन किया, जिसके बाद आम नागरिकों के लिए इस म्यूजियम को खोल दिया गया। लगबग 12,500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैले इस शानदार म्यूजियम को बनाने का आनुमानिक खर्च ₹298 करोड़ बताया जाता है।

पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस म्यूजियम का क्या रिश्ता है? दरअसल, वडनगर पीएम मोदी का पैतृक गांव है, जहां इस म्यूजियम को बनाया गया है। पीएम मोदी ने अपने सफर की शुरुआत इसी गांव से की थी। वडनगर आर्कियोलॉजिकल अनुभव संग्रहालय में आने वाले दर्शकों को पीएम मोदी के इस सफर की एक झलक भी देखने को मिलेगी, जहां उनपर आधारित एक फिल्म भी दिखाई जाएगी।

क्या-क्या देख सकेंगे म्यूजियम में?

Deccan Herald की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार वडनगर आर्कियोलॉजिकल अनुभव संग्रहालय में 5000 से अधिक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस म्यूजियम में दर्शक वडनगर के 2500 सालों का इतिहास भी देख सकेंगे जहां खुदाई के दौरान कई संरचनाएं सामने आयी थी। यह म्यूजियम 9 थीम आधारित गैलरी में बंटा हुआ है, जहां वडनगर के इतिहास से लेकर आधुनिक शहर बनने की पूरी कहानी को प्रदर्शित किया गया है।

Archaeological Museum Gujarat vadnagar

यहां इस शहर में अलग-अलग काल में बनी कलाकृतियां, भाषाओं आदि के बारे में भी लोगों को जानने का मौका मिलेगा। यह म्यूजियम सिर्फ वडनगर के इतिहास में गोते लगाने वाले लोगों के लिए ही नहीं बल्कि इतिहास की गलियों में भटकने वाले छात्रों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।

कैसे वडनगर म्यूजियम दूसरे संग्रहालयों से है अलग?

आप जरूर यह सोच रहे होंगे कि वडनगर के इस आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में भी तो वहीं सब देखने को मिलेगा, जो देश के दूसरे किसी भी आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में देख सकते हैं। फिर वडनगर म्यूजियम देश में पहला कैसे हुआ? आप देश के किसी भी आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में वहां खुदाई से निकली वस्तुओं को जरूर देख सकते हैं लेकिन क्या आपको खुदाई वाली जगह पर जाने की अनुमति होती है?

नहीं, लेकिन वडनगर आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में दर्शकों को एक ब्रिज के माध्यम से खुदाई स्थल तक जाने का मौका दिया जाएगा जहां 4000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में भूमि में लगभग 1618 मीटर की गहराई में हुई खुदाई और वहां मिले अवशेषों को दर्शक देख सकेंगे। बता दें, गुजरात के मेहसाणा जिले में मौजूद वडनगर पर हिंदू, बौद्ध, जैन और इस्लाम धर्म का प्रभाव रहा है।

पिछले कई हजारों सालों के दौरान इस शहर में न सिर्फ धार्मिक बल्कि शैक्षणिक संस्थाओं का भी केंद्र रहा है, जिनकी धरोहर व समृद्ध इतिहास को इस म्यूजियम में दिखाया जाएगा। यहां कई ऐतिहासिक लैंडमार्क जैसे कीर्ति तोरण, हटकेश्वर महादेव का मंदिर और शर्मिष्ठा झील आदि व्यापारिक मार्ग भी मौजूद हैं।

Archaeological Museum vadnagar

म्यूजियम के साथ होगा, इनका भी उद्घाटन

गृहमंत्री अमित शाह सिर्फ वडनगर आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम ही नहीं बल्कि कई अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें शामिल है -

1. वडनगर में 34,235 वर्ग मीटर के क्षेत्र में ₹33.50 करोड़ की लागत से बना तालुका स्तर का स्पोर्स्ट्स कॉम्प्लेक्स। यह मल्टीपर्पस इंडोर हॉल है जहां बैडमिंटन, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस, जुडो खेला जा सकता है। इसके साथ ही यहां एक जिम और 200 बिस्तर वाला होस्टल भी होगा जिसमें 100 लड़के और 100 लड़कियों के रहने की व्यवस्था है।

2. वडनगर में प्रेरणा कॉम्प्लेक्स - यह एक प्राथमिक स्कूल है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी। इस स्कूल को ₹72 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है। 1888 में पहली बार इस स्कूल का निर्माण किया गया था, यहां आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया अब एक आधुनिक शैक्षणिक संस्थान तैयार करने वाला है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से शिक्षकों व छात्रों को 1 सप्ताह के शैक्षणिक टूर पर लाया जाता है।

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