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अहमदाबाद का झुलता मीनार जिसके रहस्य से आज भी लोग हैं बेखबर, जानिए क्यों कहा जाता है इसे अजूबा

दुनिया में कौन सी मीनार सबसे ज्यादा मशहूर है? इस सवाल का सीधा सा जवाब होगा इटली में पीसा की झुकी हुई मीनार। इसके अलावा भारत में कई मीनारें हैं जो काफी प्रसिद्ध हैं जैसे कुतुब मीनार, हैदराबाद का चार मीनार, कोलकाता का शहीद मीनार इत्यादि। ये सभी मीनारें स्थापत्य और वास्तुकला का शानदार उदाहरण जरूर हो सकती हैं लेकिन रहस्यमयी नहीं।

आज हम जिस मीनार की बात करने वाले हैं वह रहस्यमयी है यह तो सभी जानते हैं लेकिन इसका रहस्य आज तक कोई भी उजागर नहीं कर पाया है। हम बात कर रहे हैं अहमदाबाद के झुलते मीनार की।

क्या है अहमदाबाद का झुलता मीनार?

अहमदाबाद में झुलता मीनार जिसे Shaking Minarets भी कहा जाता है, वास्तव में सीदी बशिर मस्जिद का हिस्सा है। कहा जाता है कि यह मस्जिद भूकंप के झटके भी झेल चुकी है लेकिन उसमें इसे कोई नुकसान नहीं हुआ था। झुलता मीनार अहमदाबाद शहर की सबसे बड़ी मीनार है। Gujarat Tourism के आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार अहमदाबाद में दो जोड़ी ऐसी 3 मंजीला मीनारों का निर्माण करवाया गया था, जिसमें से एक सारंगपुर दरवाजा के सामने और दूसरा कलुपुर रेलवे स्टेशन के पास मौजूद है।

सारंगपुर दरवाजा के सामने वाली मीनारों की जोड़ी सीदी बशीर मस्जिद परिसर के अंदर है जिसका निर्माण वर्ष 1452 में अहमदाबाद के सुल्तान अहमद शाह के नौकर सीदी बशीर ने करवाया था। रेलवे स्टेशन के पास वाली मीनारों की जोड़ी दूसरी जोड़ी से थोड़ी ज्यादा लंबी है।

क्या है झुलता मीनार का रहस्य

दोनों मीनारें एक दूसरे से मेहराब के जरिए जुड़ी हुई हैं। तीन मंजीला इन मीनारों में किसी समय पहली मंजील तक लोगों को जाने की इजाजत थी। कहा जाता है कि जब एक मीनार की पहली मंजील पर खड़ा कोई व्यक्ति इन मीनारों को हिलाता या जोर-जोर से थपथपाता है, तो वह थपथपाहट या वाइब्रेशन दूसरी मीनार में भी महसूस होने लगती है।

लेकिन आश्चर्य की बात है कि यह थपथपाहट या वाइब्रेशन दोनों मीनारों को जोड़ने वाले मेहराब में महसूस नहीं होती है। ऐसा क्यों होता है, इसका पता लगाने की खूब कोशिशें तो की गयी लेकिन आज तक यह रहस्य उजागर नहीं हो सका है।

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खराब हो चुकी है मीनारों की हालत

इन मीनारों की हालत पहले के मुकाबले अब काफी ज्यादा खराब हो चुकी है। बताया जाता है कि झुलते मीनार का रहस्य जानने के लिए अंग्रेज अधिकारियों ने इन मीनारों की बनावट और इंजीनियरिंग को समझने का प्रयास किया था। इसी क्रम में मीनार को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसे फिर से पुरानी स्थिति में नहीं लाया जा सका।

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 1753 में अहमदाबाद में मराठा और गुजरात सल्तनत के बीच हुए युद्ध में झुलता मीनार का पिछले वाला हिस्सा टूट गया था।

कैसे पहुंचे झुलता मीनार

झुलता मीनार अहमदाबाद का एक लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। अहमदाबाद के किसी भी हिस्से से कैब, ऑटो या टैक्सी लेकर झुलता मीनार तक पहुंचा जा सकता है। यूं तो झुलता मीनार हर दिन सुबह 5.30 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मीनार में पर्यटकों को कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता है। यहां बिना किसी प्रवेश शुल्क के आराम से पर्यटक प्रवेश कर इस अद्भूत मीनार को अनुभव कर सकते हैं।

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