पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिन स्थानों पर देवी सती के शरीर के 51 अंग गिरे थे, उन सभी स्थानों पर शक्तिपीठ की स्थापना की गयी थी, जिन्हें 51 शक्तिपीठ कहा जाता है। उन्हीं में से एक है गुजरात का अम्बाजी मंदिर। यह मंदिर गुजरात के बनासकांठा के दांता तालुका में स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां देवी की किसी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है, बल्कि यहां 'श्री वीजा यंत्र' को मंदिर की मुख्य देवी के रूप में पूजा जाता है।
लेकिन इस यंत्र को भी नंगी आंखों से देखने की अनुमति नहीं होती है। इसलिए जब भी मंदिर में पूजा की जाती है, तब पुजारी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है। अम्बाजी मंदिर में शुरू होने वाला है वार्षिक '51 शक्तिपीठ परिक्रमा महोत्सव'।
हर साल 3 दिनों के लिए यह महोत्सव मनाया जाता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु अम्बाजी मंदिर में देवी के दर्शन करने आते हैं। बताया जाता है कि इस महोत्सव की शुरुआत गुजरात के तत्कालिक मुख्यमंत्री व देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शुरू हुई थी।
बताया जाता है कि 51 शक्तिपीठ परिक्रमा महोत्सव से जुड़ी सभी तैयारियां गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड (GPYVB) और जिला प्रशासन ने साथ मिलकर की है। इस महोत्सव के दौरान 51 शक्तिपीठों में से एक अम्बाजी शक्तिपीठ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को बाकी के सभी शक्तिपीठों के दर्शन करने का भी मौका मिलता है। कैसे? आगे हम इस बारे में बताने वाले हैं -
कब से शुरू हो रहा महोत्सव?
इस साल अम्बाजी 51 शक्तिपीठ परिक्रमा महोत्सव की शुरुआत 9 फरवरी से हो रही है, जो 11 फरवरी को खत्म होगी। हर साल 3 दिनों के लिए इस परिक्रमा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि इस महोत्सव के शुरू होने के बाद से साल-दर-साल इसमें आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है।
Desh Gujarat की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल इस महोत्सव में करीब 13 लाख 15 हजार श्रद्धालु शामिल हुए थे। इस साल उम्मीद की जा रही है कि 15 लाख श्रद्धालु इस महोत्सव में हिस्सा ले सकते हैं।
सभी शक्तिपीठों के दर्शन एक साथ
अम्बाजी 51 शक्तिपीठ परिक्रमा महोत्सव को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य ही एक ही स्थान पर सभी शक्तिपीठों के दर्शन करना है। ऐसा इसलिए क्योंकि गुजरात के तत्कालिन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अम्बाजी मंदिर परिसर में सभी 51 शक्तिपीठों की प्रतिक्रियों की स्थापना करवायी थी।
सभी 51 शक्तिपीठों की स्थापना का कार्य वर्ष 2004 में शुरू हुआ था, जो साल 2014 में पूरा हो गया था। साल 2022 से राज्य सरकार, GPYVB और जिला प्रशासन साथ मिलकर राज्य स्तरीय 3 दिवसीय इस परिक्रमा महोत्सव का आयोजन कर रही है।

क्या-क्या होंगे कार्यक्रम?
9 फरवरी : 51 शक्तिपीठ परिक्रमा महोत्सव के सबसे पहले दिन पाल्की यात्रा, घंटी यात्रा और धजा यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न भजन मंडली सत्संग और आनंद गरबा करेंगे। इस दिन की परिक्रमा यात्रा में वन, पुलिस, स्वास्थ्य आदि विभाग भी शामिल होंगे।
10 फरवरी : परिक्रमा महोत्सव के दूसरे दिन पाल्की यात्रा, पादुका यात्रा और चामर यात्रा निकाली जाएगी। इस दिन रात के समय कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों व प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा।
11 फरवरी : यह परिक्रमा महोत्सव का आखिरी दिन होगा। इस दिन पाल्की यात्रा के साथ-साथ मशाल यात्रा, ज्योत यात्रा और त्रिशुल यात्रा भी निकाली जाएगी। शक्तिपीठ परिसर में मंत्रोत्सव, ड्रोन द्वारा पुष्प वर्षा, भजन सत्संग आदि के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम व रात के 12 बजे गब्बर पहाड़ की चोटी पर आरती की जाएगी।
कितने बजे होगी आरती?
- सुबह की आरती - सुबह 7.30 से 8 बजे तक।
- दर्शन शुरू - सुबह 9.30 से 11.30 बजे तक।
- दर्शन बंद - 11.30 से 12.30 बजे तक।
- दर्शन शुरू - 12.30 से 4.30 बजे तक।
- दर्शन बंद - 4.30 से 7 बजे तक।
- शाम की आरती - शाम 7 से 7.30 बजे तक।
- शाम को दर्शन - शाम 7 से रात 9 बजे तक।
महोत्सव के सभी 3 दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन अम्बाजी में खेडब्रह्मा रोड पर डी.के. त्रिवेदी बंगले के सामने शाम 7 से रात 10 बजे तक किया जाएगा। सभी 3 दिन गब्बर से शाम को 7 बजे 7.45 बजे तक लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होगा, जिसके साथ शाम की आरती भी होगी।
प्रसाद वितरण (निःशुल्क)
- अम्बाजी रेस्तरां, अम्बाजी
- GMDC मैदान - अम्बाजी
- मंगल्या वन के रास्ते में (शांति वन)
- न्यू कॉलेज
- दांता रोड
- आरटीओ चेकपोस्ट - अबु हाईवे
पार्किंग
निजी वाहनों के लिए - सर्वे नंबर 90, ओल्ड कॉलेज रोड (हदद रोड), दिवालीबा गुरु बचन, शक्ति द्वार के विपरित, कैलाश टेकरी के विपरित, अपेश्वर महादेव मंदिर के विपरित और सविता गोविंद सदन। पार्किंग से परिक्रमा महोत्सव परिसर तक के लिए मिनी बसों की व्यवस्था की गयी है।



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