वास्तुकला के दृष्टिकोण से गुजरात संभवतः सबसे अधिक समृद्ध राज्य है। गुजरात के वरोदरा में स्थित लक्ष्मी विलास पैलेस ऐसा ही एक महल है, जो अपनी शानदार वास्तुकला की वजह से सैलानियों को आकर्षित करता है। आकार में ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस से करीब 4 गुना अधिक बड़ा लक्ष्मी विलास पैलेस गायकवाड़ राजाओं का निजी आवास है। गुजरात व वरोदरा आने वाले पर्यटकों के लिए यह पैलेस Must Visit है।

लक्ष्मी विलास पैलेस आज के समय में दुनिया के सबसे बड़े और शानदार निजी आवासों में से एक है।
क्या है इसका इतिहास?
लक्ष्मी विलास पैलेस का निर्माण 1890 में महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ 3 ने शुरू करवाया था। करीब 700 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस पैलेस का निर्माण कार्य 1896 में खत्म हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार उस समय इस पैलेस के निर्माण में करीब 1 करोड़ 87 लाख 14 हजार रुपए (1,80,000 GPB) की लागत आयी थी। लक्ष्मी विलास पैलेस इंडो-मुगल, हिंदू और गॉथिक स्थापत्य कला का शानदार मिश्रण है। इसका डिजाइन ब्रिटिश आर्किटेक्चर चार्ल्स मैंट ने किया था। इसमें भारतीय शैली के साथ-साथ पाश्चात शैली की स्थापत्य कला की भी झलक दिखाई देती है।

पैलेस की वास्तुकला!
दूर से देखने पर ही लक्ष्मी विलास पैलेस काफी भव्य नजर आता है। पैलेस के ठीक बीच में एक केंद्रीय गुंबद है जिसकी ऊंचाई करीब 160 फीट है। महल की दिवारों, दरवाजों और विभिन्न हिस्सों पर की गयी जटिल नक्काशी को देखकर इसकी शानदार वास्तुकला को देखकर ही इसकी सुन्दरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। महल के बाहरी हिस्से को सोनगढ़ खदानों से निकले सुनहरे पत्थरों से बनाया गया है, जिससे इस महल को आज भी सुनहरी चमक मिलती है। गायकवाड़ राजाओं की भव्य जीवन शैली की झलक प्रस्तुत करता लक्ष्मी विलास पैलेस चारों तरफ से बेहद सुन्दर व हरे-भरे बगीचों, फव्वारों और बहुत सी सुन्दर तरीके से सजाए हुए आंगन से घिरा हुआ है।

महल की खास जगहों में इसका दरबार भी शामिल हैं, जिसमें बेल्जियम ग्लास की खिड़कियां, मोजेक के फर्श और छत पर भगवान सूर्य के विभिन्न रूपों को बड़ी ही सफाई के साथ उकेरा गया है। महल में कुल 170 कमरे हैं। वर्तमान समय में लक्ष्मी विलास पैलेस में समरजीतसिंह गायकवाड़, उनकी पत्नी राधिकाराजे गायकवाड़ और उनकी दो बेटियां यहां रहती हैं।
प्रमुख आकर्षण है महाराजा फतेह सिंह म्यूजियम
लक्ष्मी विलास पैलेस का प्रमुख आकर्षण पैलेस के अंदर बनाया गया महाराजा फतेह सिंह म्यूजियम है। यहां कई शानदार शिल्पकारियां, मूर्तियां और कलाकृतियों को बड़े ही आकर्षक तरीके से सजाकर रखा गया है। यह गुजरात की शानदार वास्तुकला का जीता-जागता उदाहरण है। लक्ष्मी विलास पैलेस के मैदान में त्योहारों के समय विशेष आयोजन होते हैं, जो उस समय गुजरात की समृद्ध संस्कृति को दर्शाने का Hub बन जाता है।

अगर आप गुजरात की समृद्ध संस्कृति और शानदार कलाकारी का साक्षात नमूना देखना चाहते हैं, तो एक बार वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में जरूर आएं। इसके अलावा लक्ष्मी विलास पैलेस में राजा रवि वर्मा की कला, हथियार और पेंटिंग का शानदार संग्रह भी मौजूद है।
पुस्तकालय में बंद है इतिहास
लक्ष्मी विलास पैलेस के अंदरूनी भागों का दौरा करने पर पता चलता है कि इस महल को तैयार करने में कलाकारों ने कितनी मेहनत की होगी। एक शाही निवास स्थल के तौर पर लक्ष्मी विलास पैलेस गायकवाड़ परिवार की विलासिता को दर्शाने में बिल्कुल नहीं चुकता है। जो लोग गायकवाड़ परिवार और इस महल के इतिहास के बारे में अधिक गहराई से जानना चाहते हैं, उन्हें एक बार महल के पुस्तकालय में जरूर जाना चाहिए।

यहां पुस्तकों और पांडुलिपियों का समृद्ध संकलन है, जहां आप इनके बारे में पढ़ सकते हैं। किसी जमाने में महल के अंदर एक छोटा चिड़ियाघर हुआ करता था। यह महल इतना विशाल है कि महल परिसर में एक रेलवे ट्रैक भी था जो शाही बच्चों को महल के चारों तरफ ले जाता था।
कैसे पहुंचे लक्ष्मी विलास पैलेस
वडोदरा देश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह पैलेस वडोदरा स्टेशन से करीब 4 किमी दूर है। स्टेशन से महल तक जाने के लिए आपको ई-रिक्शा आसानी से मिल जाएगी। पैलेस का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट वडोदरा है, जो यहां से करीब 7 किमी दूर है। एयरपोर्ट से पैलेस तक के लिए आप किराए पर टैक्सी ले सकते हैं। मिली जानकारी के अनुसार इस पैलेस में प्रवेश शुल्क 150 रुपए और संग्रहालय शुल्क 60 रुपए है।



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