पंजाब के अमृतसर में भारत-पाकिस्तान की सीमा वाघा बॉर्डर एक पर्यटन स्थल है। लेकिन क्या आपने कभी भारत के साथ पाकिस्तान की समुद्री सीमाओं पर घूमने जाने का प्लान बनाया है? अगर नहीं, तो अब तैयारी कर लिजीए। गुजरात के पर्यटन विभाग ने समुद्र के रास्ते भारत के साथ पाकिस्तान की सीमाओं को दिखाने की अनोखी पहल शुरू की है।
इस पहल का नाम 'समुद्री सीमा दर्शन'। इस पहल से गुजरात में घूमने आने वाले सैलानी और स्थानीय लोगों को समुद्र की सैर करने और यहां स्थित टापू पर घूमने का भी मौका मिल जाएगा। बता दें, समुद्री सीमाओं को दिखाने की पहल करने वाला भारत का पहला राज्य गुजरात ही है।

हाल ही में गुजरात के पर्यटन मंत्री मुलु बेरा ने गांधीनगर से वर्चुअली इस पहल का उद्घाटन किया। इस पहल में कच्छ जिले के तीर्थ स्थल कोटेश्वर धाम के पास स्थित लक्की नाला से बोट के माध्यम से पर्यटकों को समुद्र की सैर करवायी जाएगी। बोट राइड का संचालन गुजरात मैरिटाइम बोर्ड की ओर से किया जाएगा। पर्यटकों के लिए 3 अलग-अलग श्रेणियों में बोट राइड की सुविधा उपलब्ध करवायी जाएगी, जिसमें 6 सीटर, 12 सीटर और 20 सीटर शामिल है। ज्वार और भाटा के समय नावों का संचालन नियंत्रित किया जाएगा।
गुजरात में समुद्री सीमा दर्शन पहल के साथ बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। साल 2024-25 के बजट में इसकी घोषणा की गयी थी और उसके कुछ दिनों में ही इसे शुरू कर दिया गया। इससे पहले गुजरात के बनासकांठा जिले में नडाबेट पर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर सीमा दर्शन की शुरुआत की गयी थी। नडाबेट के बाद कच्छ जिला इसका केंद्र बनेगा।
कच्छ जिले का लक्की नाला जिसे समुद्र दर्शन पहल के तहत आम नागरिकों व सैलानियों के लिए हाल ही में खोला गया है, वह अब तक अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर होने की वजह से सैलानियों के लिए प्रतिबंधित था। अब समुद्री बॉर्डर पर पर्यटन शुरू होने की वजह से न सिर्फ लोग भारत-पाकिस्तान की समुद्री सीमा को देख सकेंगे बल्कि बीएसएफ जवानों और उनके कार्यों से भी परिचित हो सकेंगे।
बताया जाता है कि भविष्य में सैलानियों की सुविधा के लिए कच्छ में फ्लोटिंग जेट्टी, वॉट टावर, मरीन इंटरप्रिटेशन सेंटर, फूड कियॉस्क, सूचना केंद्र, कन्वेंशन सेंटर, एडवेंचर पार्क आदि को भी विकसित किया जाएगा।



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