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जन्‍नत का छिपा दरवाज़ा है गुरेज घाटी

By: Namrata Shatsri

इस बात में कोई शक नहीं है कि धरती पर जम्‍मू-कश्‍मीर किसी स्‍वर्ग से कम है। चारों तरफ बर्फीली पहाडियों और शांत वातावरण और खूबसूरत घाटियों के बीच मैदानी क्षेत्र भारत के इस राज्‍य को सबसे खास बनाता है। जम्‍मू-कश्‍मीर में ऐसी कई जगहें हैं जहां आप घूम सकते हैं और खूब सारी मस्‍ती कर सकते हैं।

जम्‍मू-कश्‍मीर की कुछ सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है गुरेज घाटी। समुद्रतट से 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ये घाटी श्रीनगर से 125 किमी दूर है। कहीं घूमने का प्‍लान बना रहे हैं तो इस बार आपको जम्‍मू-कश्‍मीर की गुरेज घाटी जरूर आना चाहिए। आइए जानते हैं जन्‍नत जैसे जम्‍मू-कश्‍मीर की गुरेज घाटी में छिपी कुछ खूबसूतरत जगहों के बारे में...

दवार

दवार

इस घाटी का केंद्रीय हिस्‍सा है दवार जिसमें कुल मिलाकर 15 गांव है और ये गांव पूरी गुरेज घाटी में फैले हुए हैं। इसके अलावा यहां पर प्राचीन शारदा यूनिवर्सिटी के अवशेष हैं और यहां पर किशनगंगा नदी भी बहती है। इस घाटी में आने वाले पर्यटक दवार देखने जरूर आते हैं।

ऊंची-ऊंची पहाडियों से घिरे दवार में चारों ओर किशनगंगा नदी की बहती लहरों की आवाज़ गूंजती है। यहां आकर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप किसी जन्‍नत में परम आनंद के रथ पर सवार हों।

Pc:Mir mustafa

हब्‍बा खातून

हब्‍बा खातून

कश्‍मीरी कवि हब्‍बा खातून के नाम पर इस जगह का ये नाम रखा या है। इस त्रिकोणीय आकार के पर्वत में हब्‍बा खातून की अपने पति के प्रेम से जुड़ी कई कहानियां आज भी गूंजती हैं। कहा जाता है कि आज भी आप यहां हब्‍बा खातून को अपने पति की तलाश करते हुए देख सकते हैं।

ये त्रिकोणीय पर्वत गुरेज घाटी का प्रमुख आकर्षण है। अगर आप जम्‍मू-कश्‍मीर में कहीं प्राकृतिक छटाएं बिखरी हुई देखना चाहते हैं तो आपको गुरेज घाटी आना चाहिए। क्‍या पता यहां घूमते हुए आपको भी हब्‍बा खातून मिल जाए।Pc:Aniketchoudhary87

तुलैल घाटी

तुलैल घाटी

इस जगह आकर आपको दैवीय शक्‍तियों का आभास होता है। जी हां, ये जगह पूरी तरह से सकारात्‍म‍क वातावरण से भरी हुई है। तुलैल घाटी दवार से लगभग 42 किमी दूर है और पर्यटकों के लिए वाकई में ये किसी जन्‍नत से कम नहीं है।

तुलैल घाटी में कुछ गांव भी हैं। ये घाटी फिशिंग के लिए सबसे ज्‍यादा मशहूर है। अगर आप ग्रामीण जनजीवन देखना चाहते हैं तो इस घाटी आ सकते हैं। यहां आकर आपको कुछ ऐसे पल बिताने का मौका मिलेगा जो आपको जिंदगीभर याद रहेंगें।PC- ZAHID SAMOON

हरमुख

हरमुख

सिंध और किशनगंगा नदी के बीच में स्थित है हरमुख जोकि हिमालय की श्रृंख्‍लाओं का हिस्‍सा हैं। ये पहाड़ 16870 फीट ऊंचा है। हिंदुओं के लिए हरमुख धार्मिक तीर्थस्‍थल से कम नहीं है और भगवान शिव का वास होने के कारण इस स्‍थान को पवित्र माना जाता है।

हरमुख की तलहटी में गंगाबल झील है जहां से पर्यटकों को कई खूबसूरत नज़ारे देखने को मिलते हैं। पर्यटकों को ये खूबसूरत जगह बहुत पसंद आती है और एक बार आने के बाद उनका मन बार-बार आने का करता है।Pc:Mehrajmir13

गुरेज घाटी आने का सही समय : मई से अक्‍टूबर

गुरेज घाटी आने का सही समय : मई से अक्‍टूबर

जन्‍नत से भी खूबसूरत इस घाटी की यात्रा आपको जीवनभर याद रहेगी। यहां पर आप बाबा दरवाइश और बाबा रजाक और पीर बाबा की दरगाह के भी दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां रॉक क्‍लांबिंग, फिशिंग और ट्रैकिंग का मज़ा भी ले सकते हैं।