Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »गुरुपर्व 2017:क्या है गुरुपर्व, क्यों है सिख समुदाय के लिए महत्वपूर्ण?

गुरुपर्व 2017:क्या है गुरुपर्व, क्यों है सिख समुदाय के लिए महत्वपूर्ण?

By Goldi

गुरु नानक देवजी सिखों के दस गुरुयों में से सबसे पहले गुरु थे...जिन्हें सिख धर्म का संस्थापक भी कहा जाता है। हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन ये पर्व मनाया जाता है। नानक देव जी के जन्मदिन को सिख समुदाय बेहद धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारे में भव्य लंगर का आयोजन किया जाता है। गुरु नानक जी का जन्म 548 वर्ष पहले 15 अप्रैल 1469 में तलवंडी में हुआ था।

नानक देव की शिक्षा और सिखों के साहस को दर्शाते हैं ये गुरूद्वारे

इस स्थान को ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। ये स्थान पाकिस्तान में है। ये सिख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। इस पर्व की शुरुआत दो दिन पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ से शुरु हो जाती है। 48 घंटे तक चलने वाले इस पाठ को अखंड पाठ कहा जाता है।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से जुड़ी दिलचस्प बातें!

इस इन गुरुद्वातों में प्रसाद के लंगर का वितरण भी होता है, साथ ही बाबा के भक्त जगह जगह लंगर वितरण करते हैं। ये लंगर हर किसी को आस्था के साथ खिलाया जाता है। लंगर का भोजन गुरुद्वारे के रसोईघर में आस्था और सेवा करने की भावना रखने वाले लोगों द्वारा ही बनाया जाता है। इस दिन कई गुरुद्वारों में रात के समय गुरुबानी का पाठ होता है। आइये इसी क्रम में जानते है कुछ खास गुरुद्वारों को जो सिख गुरुयों को समर्पित हैं..

स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

हरमिंदर साहिब और दरबार साहिब के नाम से प्रख्यात स्वर्ण मंदिर सिख समुदाय का सबसे पवित्र स्थान है। इस मंदिर का निर्माण गुरु रामदास जी ने किया था..जोकि सिख समुदाय के चौथे गुरु थे। सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना के रूप में, गुरु अर्जुन दास ने गुरुद्वारा की आधारशिला रखने के लिए मुस्लिम सुफी संत हजरत मियां मीर से अनुरोध किया था। इसके चार दरवाजे है, जो यह दर्शाता है कि, यहां सभी धर्म के लोगो का स्वागत है। यह मंदिर पूरी तरह सोने से मढ़ा हुआ है..साथ ही यह मंदिर एशिया की सबसे बड़ी रसोई के रूप में भी जाना जाता है,जहां हर रोज लाखों की तादाद में भक्त लंगर चखते हैं।

PC: PhotoholicAbhishek

गुरु द्वारा बंगला साहिब

गुरु द्वारा बंगला साहिब

17वीं शताब्दी में दिल्ली स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब राजा जय सिंह का बंगला हुआ करता था..जोकि जयसिंहपुरा पैलेस के नाम से जाना जाता था। यह गुरुद्वारा जयसिंह पूरा में स्थित है..जोकि अब कनॉट प्लेस के नाम से जाना जाता है। यह गुरुद्वारा सिखों के आठ गुरु, गुरु हर किशन से जुड़ा हुआ है। यह मूल रूप से 1783 में सिख जनरल सरदार भगेल सिंह द्वारा छोटे आयामों के साथ एक तीर्थ के रूप में बनाया गया था। गुरुद्वारा परिसर के अंदर पानी का एक कुंड है,जिसे चिकित्सा गुणों के लिए जाना जाता है। कई भक्त अनुयायियों और आगंतुकों इस पानी में डुबकी लेते हैं साथ ही, दरबार में मत्था टलने से पहले आचमन लेकर आगे प्रस्थान करते हैं। दिल्ली स्थित बंगाला साहिब पर्यटकों के बीच एक आकर्षण का केंद्र भी है। PC:Sakeeb Sabakka

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड

समुद्र स्तर से 4000 मीटर की उंचाई पर स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है।यह गुरुद्वारा अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक बंद रहता है।श्री हेमकुंड साहिब अपनी वास्तु कला के लिए काफी प्रसिद्ध है।इसे गुरु गोबिंद सिंह जी की याद में बनाया गया है। इसका आकार एक सितारे जैसा है।इसके पास ही अमृत सरोवर नाम की एक पवित्र झील बहती है। PC:Satbir 4

गुरुद्वारा श्री केश्घर साहिब,आनंदपुर

गुरुद्वारा श्री केश्घर साहिब,आनंदपुर

गुरुद्वारा श्री केश्घर साहिब, पंजाब के आनंदपुर शहर में स्थित है।आनंदपुर शहर सिखों के 9वे गुरू तेग बहादुर जी ने स्थापित किया था। यह गुरुद्वारा 5 तख्तों में से एक है और इसलिए इस गुरुद्वारे की एहमियत और भी ज़्यादा है। PC:Ms Sarah Welch

 गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़, ग्वालियर

गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़, ग्वालियर

गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ ग्वालियर में स्थित है। इसे सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब की याद में बनवाया गया है। उन्होंने तत्कालीन मुगल शासक जहांगीर की कैद से 250 राजपूत राजाओं को आजाद किया था। यह गुरुद्वारा जहांगीर और गुरु हरगोबिंद जी के बीच चली लंबी लड़ाई का प्रतीक है। PC:Nagarjun Kandukuru

गुरुद्वारा मणिकरण साहिब

गुरुद्वारा मणिकरण साहिब

मनाली की खूबसूरत वादियों में स्थित है गुरुद्वारा मणिकरण साहिब। कहते हैं यह प्रथम स्थान है जहां गुरू नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान ध्यान लगाया था। जिस पूल पर यह गुरुद्वारा बना है उसके दूसरे छोर पर भगवान शिव का सुंदर और विशाल मंदिर है।

गुरुद्वारा बेर साहिब, पंजाब

गुरुद्वारा बेर साहिब, पंजाब

इस गुरुद्वारे का नाम एक बेर के पेड़ पर से रखा गया है।ऐसा माना जाता है की एक बेर के पेड़ को, पहले गुरू, गुरू नानक जी के सामने बोया गया था. यह गुरुद्वारा पंजाब के करतारपुर में स्थित है।

तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X