हाल ही में श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में बड़े ही धूम धाम के साथ उनका जन्मोत्सव राम नवमी का त्योहार मनाया गया। इसी महीने में उनके परम भक्त भगवान हनुमान की जयंती भी मनायी जाएगी। इस साल हनुमान जयंती 23 अप्रैल को मनायी जाएगी।
हनुमान भगवान को दुनिया में एकमात्र जीवित देवता माना जाता है, जो अपने भक्तों की हर समस्या का समाधान करने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। दुनिया भर में भारत समेत ऐसी कई जगहें हैं, जहां विशालाकार मानव पैरों के निशान पाए जाते हैं। विश्वास किया जाता है कि ये पैरों के निशान हनुमान जी के ही हैं।

भारत में 3 जगहों पर हनुमान जी के पैरों के निशान होने की बात कही जाती है -
1. लेपाक्षी
आंध्र प्रदेश का शहर लेपाक्षी, दो शब्दों से मिलकर बना है 'ले पक्षी'। इसका तेलुगु में अर्थ होता है पक्षी का उदय। यहां इंसानी पैरों के विशाल चिन्ह पाए जाते हैं, जिनके बारे में विश्वास किया जाता है कि ये हनुमानजी के पैरों के ही हैं। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर के प्रांगण में ये पद्चिन्ह पाए गये हैं।
दक्षिण भारतीय लोगों के मन में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। कुछ लोगों का मानना है कि पैरों के ये विशाल चिन्ह मां दुर्गा के हैं, तो कुछ इन्हें देवी सीता के भी मानते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लेपाक्षी ही वह जगह है जहां रावण से युद्ध में हारने के बाद पक्षीराज जटायू राम-लक्ष्मण और हनुमान से मिले थे।
2. जाखू
हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थित जाखू मंदिर के पास पहाड़ों पर भी हनुमान जी के पैरों के निशान मिलने की बात कही जाती है। मान्यता के अनुसार मेघनाथ का शक्ति बाण लगने के बाद मुर्छित लक्ष्मण का इलाज करने के लिए संजीवनी बूटी समेत आकाश मार्ग से पूरा पर्वत ही उठाकर लेकर जाते समय हनुमान जी ने जाखू में कुछ देर के लिए विश्राम किया था।

3. अंजनेरी पर्वत
इस पर्वत पर 5 हजार फीट की ऊंचाई पर हनुमान जी के पैरों के निशान मिलने की बात कही जाती है। माना जाता है कि हनुमान जी जब बच्चे थे, तब उन्होंने सूर्यदेव को कोई फल समझकर के उन्हें निगल लिया था। जब हनुमान जी सूर्य देव की तरफ आगे बढ़े तो जिस पत्थर पर खड़े होकर उन्होंने छलांग लगायी थी, उस पत्थर पर उनके पैरों के निशान पड़ गये थे जो आज भी मौजूद हैं।
विदेशी जगहें जहां मिलते हैं हनुमान जी पैरों के निशान
श्रीलंका

श्रीलंका में भगवान हनुमान के पैरों के निशान जिस जगह पर बने हैं, उसे 'हनुमान पद' कहा जाता है। मान्यता के अनुसार माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी ने जब समुद्र लांघने का निर्णय लिया तो उन्होंने अपना आकार विशाल बना लिया था। आकाश मार्ग से जब वह समुद्र लांघ कर लंका पहुंचे तो उन्होंने वहां समुद्रतट पर सबसे पहले जिस जगह पर अपने पैर रखें वहां उनके पैरों के निशान छप गये, जो आज भी मौजूद है।
मलेशिया
मलेशिया के पेनांग में एक मंदिर के अंदर मनुष्य के विशालाकार पैरों के निशान पाए गये हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह हनुमानजी के ही पैरों के निशान हैं या किसी और के। लेकिन इतने बड़े आकार के निशान को देखकर यह माना जाता है कि ये भगवान हनुमान के ही पैरों के निशान हैं। यहां आने वाले लोग अपने सौभाग्य की कामना के साथ ही इन पद्चिन्हों पर सिक्के फेंकते हैं।

थाईलैंड
भारत की तरह ही थाईलैंड में भी 'रामकियेन' नाम से रामायण प्रचलित है। इसे पुराने जमाने में सियाम भी कहा जाता था। कहा जाता है कि इसी वजह से जब थाईलैंड में इस तरह के विशाल आकार के पैरों के चिन्ह मिले तो उन्हें रामायण से जोड़कर उसे हनुमान जी के पैरों के निशान के रूप में ही मान्यता दे दी गयी।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि जिन जगहों पर भी मनुष्य के पैरों के निशान मिले हैं, वो सभी आदि मानवों ने बनाए हैं। लेकिन इन पैरों के आकार और आकृति को देखकर काफी लोगों को लगता है कि ये हाथ से बनाए हुए नहीं बल्कि किसी व्यक्ति का भार पत्थरों द्वारा सहन न कर पाने की वजह से उभरे पद्चिन्ह हैं। इसलिए स्थानीय लोगों का मानना है कि ये सिर्फ भगवान हनुमान के ही पैरों के निशान हो सकते हैं।



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