
आज पूरे भारत वर्ष में खासकर उत्तर भारत में 'हरियाली तीज' को त्योहार मनाया जा रहा है। इस वर्ष इस त्योहार की तिथि 13 अगस्त में पड़ी है। यह खासकर स्त्रियों का त्योहार है, इस दौरान वे सुख-शांति के लिए मंगलकामनाएं करती हैं। यह त्योहार शादीशुदा और युवतियां दोनों मिलकर मनाती हैं। जहां शादीशुदा स्त्रियां अपने विवाहित जीवन की सभी समस्याओं के निवारण के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं, वहीं युवतियां योग्य वर प्राप्ति के लिए कामना करती हैं।
यह त्योहार सावन मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस लेख के माध्यम से जानिए 'हरियाली तीज' से संबंधित दिलचस्प तथ्य और साथ में जानिए इस दौरान आप कहां-कहां भ्रमण कर सकते हैं।

क्या है इस त्योहार का महत्व ?
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हरियाली तीज हिन्दू धर्म से जुड़ा है एक महत्वपूर्ण त्योहार है। जिसे स्त्रियां पूरे रीती-रिवाजों के साथ मनाती हैं। खासकर उत्तर भारत में इस उत्सव के खूबसूरत रंग देखे जा सकते हैं। देखा जाए तो समय के साथ-साथ धर्म परंपराओं से जुड़े इन त्योहारों का महत्व कम हो रहा है, खासकर आधुनिक समाज इन परंपराओं को ज्यादा तवज्जो नही देता है, लेकिन उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों का यह त्योहार हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है।
इस दौरान कुंआरी और शादिशुदा स्त्रियों हाथों में मेहंदी लगाती हैं, चटक रंग के कपड़े पहनती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। इस पर्व में उपवास यानी वर्त का भी विधान है।

उत्तर भारत में खास महत्व
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भारत के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर भारत में तीज का त्योहार बड़े स्तर और उत्साह के साथ मानाया जाता है। उत्तर-प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों में इस खास त्योहार की तैयारियां पहले सी ही होने लग जाती हैं। इन राज्यों में तीज से जुड़े बड़े आयोजन भी किए जाते हैं, जो खासतौर पर स्त्रियों के लिए काफी ज्यादा मायने रखते हैं। रीति-रिवाजों के मुताबिक बहुएं मायके से आए वस्त्रों और श्रृंगार की वस्तुएं धारण करती हैं, जिसे सिंधार कहा जाता है। इस दौरान घर पर तरह-तरह पकवान बनाए जाते हैं। इस दौरान लड़कियां झुला भी झुलती हैं, साथ ही लोक नृत्य-संगीत का भी आयोजन किया जाता है।

बिना मेहंदी पूरा नहीं त्योहार
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हरियाली तीज में मेहंदी का खास महत्व है, जिसके बिना न सोलह श्रृंगार पूरा हो सकता है, न ही यह तीज का त्योहार। तीज से एक दिन पहले महिलाएं और कुंआरी युवतियां अपने हाथों और पैरों में खूबसूरत मेहंदी रचाती हैं, जो उनके इस दिन को खास बनाने का काम करती है।
मेहंदी के महत्व को इस तथ्य से पता लगाया जकता है कि इसके बिना एक स्त्री का श्रृंगार अधूरा है। युवतियां खूबसूरत डिजाइन के साथ अपने हाथ, अपनी कलाइयों को मेहंदी से सजाती हैं।

पौराणिक महत्व
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यह त्योहार बहुत ही खास दिन की खुशी में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकारा था। शास्त्रों की मानें तो भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने 108 जन्म लिए थे। पार्वती की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने देवी पार्वती को स्वीकार किया।

तीज पर क्यों आएं दिल्ली ?
आप तीज त्योहार के दौरान राजधानी शहर दिल्ली आ सकते हैं। हरियाली तीज के खास अवसर पर दिल्ली पर्यटन द्वारा तीन दिल्ली हाट्स लगाए गए हैं, जहां आप हथकरघा उत्पादों की खरीदारी और राजस्थानी व्यंजनों का आनंद उठा सकते हैं। यह विशेष आयोजन का शुभारंभ महीने की 10 तारीख से शुरु हुआ था जो 14 अगस्त तक जारी रहेगा। ये दिल्ली हाट्स आईएनए, पीतमपुरा और जनकपुरी में लगाए गए हैं।
इन दिल्ली हाट्स में आप कृत्रिम आभूषण, हस्तशिल्प, उत्पादों की आकर्षक दुकानें लगाई गई हैं, साथ ही आप यहां घेवर, राजस्थानी थाली, दाल बाटी चूरमा और कचौड़ी का लुत्फ भी उठा सकते हैं। यहां खास मेहंदी स्टाल भी लगाए गए हैं, जहां आप खूबसूरत महंदी लगवा सकती हैं।



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