Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »क्या अब तक आपने विश्व के एकमात्र हाथियों को समर्पित महल का दौरा किया है ?

क्या अब तक आपने विश्व के एकमात्र हाथियों को समर्पित महल का दौरा किया है ?

By Syedbelal

क्या आपने कभी एक ऐसे महल के बारे में सोचा है जहां केवल हाथी रहते हों और जो केवल हाथियों को समर्पित हो, एक ऐसा महल जहां हाथियों को खिलाया जाता हो, नहलाया जाता हो और एक छोटे बच्चे की तरह प्राकृतिक वातावरण में उनकी केयर की जाती हो। नहीं, आइये आपका स्वागत है दुनिया के एकमात्र महल में जहां केवल हाथी वास करते हैं। इस महल का निर्माण केरल के पुन्नार्थुरकोट्टा में किया गया है। गौरतलब है कि हाथी शुभ होने के अलावा केरल राज्य का राजकीय पशु भी घोषित है, जिसे आप यहां के धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों में देखेंगे।

किसी ज़माने में यह महल राजा का निवास स्थान हुआ करता था जो कि अब गुरूवायूर मंदिर के अंतर्गत आता है और यहां हाथियों की देख रेख होती है। स्थानीय लोगों के बीच यह महल अनककोट्टा के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है हाथियों का किला। एक समय में यहां 86 हाथियों का वास था लेकिन आज दुर्भाग्यवश 66 हाथी ही शेष बचे हैं, इन हाथिओं की देख रेख का प्रबंध मंदिर प्रशासन करता है और राज्य में होने वाले समारोहों के लिए इन्हें यहां ट्रेन किया जाता है।

मजेदार बात ये है कि केरल के पौराणिक हाथियों में शुमार "गुरूवायूर केशवन भी इसी महल में वास करते थे । जो लोग गुरूवायूर केशवन से अवगत नहीं हैं उनको बता दें कि केशवन केरल का सबसे प्रभावशाली हाथी है जिसे 1916 में नीलांबुर के शाही परिवार ने गुरूवायूर मंदिर को दान किया था। 3 मीटर ऊंचा ये हाथी अपने भक्त व्यवहार के लिए जाना जाता है जिसकी 1976 में मृत्यु हुई। ये हाथी 72 साल की आयु तक जीवित रहा।

विश्व का एकमात्र हाथियों को समर्पित महल

गुरूवायूर केशवन की मूर्ति

इतनी लंबी अवधि तक सेवा देने के चलते गुरूवायूर मंदिर प्रशासन ने अपने प्रांगण में गुरूवायूर केशवन की मूर्ति को लगवाया है। इस मूर्ति की एक ख़ास बात ये है कि हर साल गुरूवायूर केशवन की पुण्यतिथि के मौके पर इस महल के सभी हाथी यहां एकत्र होते हैं और समूह का प्रधान हाथी गुरूवायूर केशवन की मूर्ति को माला पहनाता है। गुरूवायूर केशवन को मलयमान भाषा की कई फिल्मों में भी दिखाया गया है। आज इस महल का सबसे पुराना हाथी रामचंद्रन है जिसकी आयु 82 बरस है।

इस महल में महावतों के भी प्रशिक्षण का काम होता है और उन्हें इस बात के लिए प्रशिक्षित किया जाता है कि वो अपने हाथी को कैसे रखें। यहां आने वाले पर्यटक देख सकते हैं कि हाथियों को कैसे खिलाया पिलाया कैसे नहलाया और बच्चों की तरह पाल कर राज्य में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

यहां आने वाले पर्यटक सुबह 8 से शाम 5. 30 तक यहां आकर इन हाथियों को देख सकते हैं। इस महल का प्रवेश शुल्क 5 रूपये है और यदि आप यहां कैमरा ले जाएंगे तो आपसे मन्दिर प्रशासन द्वारा 25 रूपये अतिरिक्त लिए जाएंगे।

कब जाएं
इस महल की यात्रा का सबसे अच्छा समय फरवरी से अप्रैल के बीच का है इस दौरान यहां कई महोत्सवों का आयोजन किया जाता है और आप इन हाथियों को देख सकते हैं।

कैसे जाएं पुन्नार्थुरकोट्टा

निकटतम हवाई अड्डा - कोच्ची अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (109 किलोमीटर)
निकटतम रेलवे स्टेशन - त्रिशूर रेलवे स्टेशन (32 किलोमीटर)

इसके अलावा देश के कई प्रमुख शहरों से आपको यहां जाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी बसें मिल जाएंगी।

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+